रिपोर्ट में जनवरी से जून 2023 तक, पिछले साल की समान अवधि की तुलना में, 78 देशों में बिजली उत्पादन डेटा का विश्लेषण किया गया है।
साल 2021 में भविष्यवाणी की गई थी कि यह झील ओवरफ्लो हो जाएगी और बांध को प्रभावित करेगी। ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) के कारण ग्लेशियर पिघलने (melting glaciers) के कारण ग्लेशियर झीलों की संख्या में वृद्धि हुई है।
इस नए शोध की मानें तो जलवायु परिवर्तन (Climate Change) और भीषण गर्मी आपके बच्चे का बुढ़ापा खराब कर सकती है।
वार्षिक पवन ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना के वर्ष 2022 में 78 गीगावॉट से वर्ष 2027 में दोगुना होकर 155 गीगावॉट हो जाने की संभावना है। इससे अगले मात्र पांच वर्षों के दौरान वैश्विक स्तर पर कुल पवन ऊर्जा क्षमता बढ़कर 1500 गीगावॉट से ज्यादा हो जाएगी।
इन विषयों पर जानकारी को सटीक और जिम्मेदारी से प्रसारित करने में मीडिया कर्मियों की ख़ास जिम्मेदारी है और इस वजह से इसलिए सस्टेनेबिलिटी और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों की पत्रकारों में बेहतर समझ होना भी काफ़ी ज़रूरी है।
शोधकर्ताओं का मानना है कि इस तरह की नमी की कमी से मानसून के दौरान भूमि और वायुमंडल के बीच कपलिंग प्रभावित होगी, जिससे मानसूनी वर्षा के पैटर्न में बदलाव आएगा।
ग्लोबल कोल माइन ट्रैकर (Global Coal Mine Tracker) के डेटा से हमें दुनिया में 4300 सक्रिय और प्रस्तावित कोयला खदानों तथा परियोजनाओं में व्याप्त रोजगार के अवसरों के बारे में अपनी तरह का पहला जायजा मिलता है। यह खदानें दुनिया में होने वाले कुल कोयला उत्पादन में 90% से ज्यादा का योगदान करती हैं।
आप सोचेंगे तो आपको समझ आएगा कि जलवायु परिवर्तन सिर्फ मौसम को ही नहीं बदलता; यह इन दिव्याँगजनों के मौलिक मानवाधिकारों तक को प्रभावित कर सकता है।
तर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने वर्ल्ड एनर्जी आउटलुक 2023 नामक एक रिपोर्ट जारी की है जो दर्शाती है कि सौर पैनल, पवन ऊर्जा, इलेक्ट्रिक कार और हीट पंप जैसी स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियाँ अधिक लोकप्रिय हो रही हैं। ये प्रौद्योगिकियां हमारे कारखानों, वाहनों, घरेलू उपकरणों और हीटिंग सिस्टम जैसी चीजों को बिजली देने के तरीकों को बदल रही हैं।
ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (Green Hydrogen Mission) को रफ्तार देते हुए हाल ही में भारत सरकार ने 400 करोड़ रुपये की लागत वाला एक आर एण्ड डी (अनुसंधान एवं विकास) रोडमैप पेश किया है।












