पिछले वर्षों की अभूतपूर्व बाढ़, सूखा और बेतहाशा पानी से होने वाली घटनाएं अप्रत्याशित नहीं, बल्कि मानव द्वारा दशकों से चली आ रही पानी की बदइंतज़ामी से होने वाली सिस्टेमेटिक क्राइसेस का नतीजा हैं। यह कहना है ग्लोबल कमीशन ऑन इक्नोमिक्स ऑफ वॉटर रिपोर्ट (Global Commission on Economics of Water Report) का।
ग्लोबल एनेर्जी मॉनिटर के नौवें वार्षिक सर्वे की मानें तो भविष्य में अपने कोयले के इस्तेमाल को लेकर भारत वैश्विक स्तर पर मिले जुले संकेत भेजता रहा है।
जिस रफ्तार से सौर और पवन ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहन आदि अन्य कम कार्बन प्रौद्योगिकियां फल-फूल रही हैं, उसके मद्देनज़र...
कोविड का नाम सुनते ही साँसों का उखड़ना, खांसी, और फेफड़ों की जकड़न का ख्याल आता है। दमा के मरीज़ों...
जलवायु परिवर्तन की गंभीरता न समझने और उसके दुष्प्रभावों से निपटने के लिए निष्क्रियता दिखाना शायद ऑस्ट्रेलियाई सरकार को अब...
फ़िलहाल मानव इतिहास में अब तक का सबसे गर्म साल 2016 को माना जाता था। लेकिन अब, 2020 को भी...
दलित समाज से ताल्लुक रखने वाले रामनाथ कोविंद के बाद अब आदिवासी समाज से आने वाली मुर्मू को राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार बनाना महज संयोग नहीं वरन एक सुविचारित कदम है। इस एक कदम से भाजपा ने समाज के एक बड़े वर्ग को बड़ा संदेश दिया है। इसमें महिलाएं, दलित और आदिवासी समाज शामिल हैं।
आईईए के वर्ल्ड एनर्जी आउटलुक (World Energy Outlook) के ताजा संस्करण के मुताबिक युक्रेन पर रूस की सैन्य कार्रवाई के कारण उत्पन्न हुआ वैश्विक ऊर्जा संकट गहरे और लम्बे वक्त तक बरकरार रहने वाले बदलावों की वजह बन रहा है। इन परिवर्तनों में ऊर्जा प्रणाली में अधिक टिकाऊ और सुरक्षित रूपांतरण को तेज करने की क्षमता रखते हैं।
हाल के दिनों में भारत बदल रहा है। परिवार-केंद्रित भारतीय राजनीति ने व्यक्ति-केंद्रित राजनीति का मार्ग प्रशस्त किया है।
प्रधान मंत्री मोदी के ग्लासगो में भारत के साल 2070 तक नेट ज़ीरो होने की घोषणा के बाद से नेट...
जो स्वच्छ वायु नीतियां जीवाश्म ईंधन उत्सर्जन को कम और जलवायु परिवर्तन को संभालने में मदद कर सकती हैं, वही...
India और Pakistan में पिछले लंबे समय से चल रही ताप लहर (Heatwave) की वजह से इंसानी आबादी को बड़े...


