राष्ट्रीय राजधानी में बढ़ते वायु प्रदूषण के मद्देनजर, दिल्ली विश्वविद्यालय ने अपने छात्रों के लिए 13 से 19 नवंबर तक शीतकालीन अवकाश की घोषणा की है।
जहां एक ओर देश के चार महानगरों में पिछले साल के मुकाबले इस वर्ष पीएम 2.5 की मात्रा में इजाफा हुआ है, वहीं देश के सबसे बड़े राज्य, उत्तर प्रदेश, की राजधानी लखनऊ में पीएम 2.5 की मात्रा में कमी देखी गयी।
CAQM के आंकड़ों से पता चलता है कि हरियाणा ने भी अपनी पराली जलाने की घटनाओं में साल-दर-साल 40 प्रतिशत की कमी की है, लेकिन नवंबर में धान के भूसे के लिए वर्षा कवर की कमी के कारण घटनाएं फिर से देखी गईं।
गुरुवार को दिल्ली के आनंद विहार इलाके में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 500 के पैमाने पर 415 था, जो प्रदूषण के 'गंभीर' स्तर का संकेत देता है।
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने वायु गुणवत्ता में और गिरावट को रोकने के लिए 11-सूत्रीय कार्य योजना लागू की है। प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण 23-24 अक्टूबर को दिल्ली का AQI 'बहुत खराब' श्रेणी में पहुंचने की आशंका है।
राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण फैलाने वाले ट्रकों और वाणिज्यिक चार पहिया वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
उत्तर भारतीय राज्यों में बढ़ते वायु प्रदूषण के मद्देनज़र हरियाणा सरकार ने पराली जलाने वाले किसानों पर सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। सरकार ने 31 अक्टूबर तक पराली जलाने वाले किसानों पर 25 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया है।
डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि दिल्ली में गंभीर वायु प्रदूषण का सबसे अधिक प्रभाव गर्भवती महिलाओं और शिशुओं पर पड़ेगा, साथ ही अजन्मे नवजात शिशुओं में बाद में जीवन में एलर्जी विकसित होने का खतरा अधिक होगा।
पंजाब में इस मौसम में पराली जलाने के अब तक के सबसे अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। रविवार को राज्य में एक ही दिन में 1000 खेतों में आग लगाने की घटनाएं सामने आईं हैं।
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने खराब वायु गुणवत्ता के कारण सबसे अधिक प्रभावित स्थानों के बारे में बात की और कहा कि सरकार प्रदूषण के स्थानीय स्रोतों की पहचान और निरीक्षण के लिए विशेष टीमें तैनात करेगी।
सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च (SAFAR-India) के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी में समग्र वायु गुणवत्ता रविवार सुबह 10:30 बजे 204 के समग्र AQI के साथ 'खराब' श्रेणी में रही।






