मान्यता है कि इस दिन हनुमान जी की सच्चे मन से पूजा और सेवा करने वालों को वह कभी निराश नहीं करते और हर संकट से उन्हें बचाने स्वंय दौड़े चले आते हैं। यही वजह है कि मंगलवार व्रत का विशेष महत्व है।
भूमि न खाली करने पर होगी कार्रवाई, जेसीबी आदि के खर्च की वसूली भी भगवान से होगी
काशी (Kashi) यानी वाराणसी (Varanasi) में हनुमान जी (Hanuman ji) का मंदिर आस्था और विश्वास का बहुत बड़ा धार्मिक स्थल माना गया है। संकटमोचन मंदिर (Sankatmochan Mandir) के नाम से प्रसिद्ध इस मंदिर का इतिहास करीब 400 साल पुराना है।
बजरंगबली (Bajrangbali) को भगवान भोलेनाथ का ग्यारहवां अवतार भी माना गया है। उन्हें कलयुग का देवता कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि जो भी व्यक्ति मंगलवार को विधि-विधान से हनुमान जी की पूजा करता है, उसके जीवन के सारे संकट दूर हो जाते हैं।
हनुमान जी (Hanuman ji) के माता-पिता का नाम केसरी व अंजना था, जिन्होंने उन्हें बहुत यत्न के बाद प्राप्त किया...
बेतिया में राज देवड़ी से पूरब वाले प्राचीन द्वार से निकलते ही एक ओर भगवान गणेश और दूसरी ओर भगवान हनुमान के दर्शन होते हैं। हम आपको बताते हैं इन प्रतिमाओं का महत्व क्या है? इनका इतिहास क्या है?
कलयुग में बजरंग बली (Bajrangbali) हनुमानजी (Hanumanji) को हिन्दू धर्म में बड़ा ही शुभ और मंगलकारी माना गया है। मंगलवार को इनका पूजन करना बहुत शुभफलदायी मन जाता है।
बजरंगबली (Bajrangbali) ने शनि महाराज (Shani Maharaj) को कष्टों से मुक्त कराया था और उनकी रक्षा की थी इसलिए शनि देवता (Shani Devta) ने यह वचन दिया था हनुमानजी की उपासना करने वालों को वे कभी कष्ट नहीं देंगे। शनि या साढ़े साती की वजह से होने वाले कष्टों के निवारण हेतु हनुमानजी की आराधना करनी चाहिए।
देशभर में हनुमान जी (Hanuman ji) के कई चमत्कारी मंदिर है। इन मंदिरों में कहीं बजरंगबली (Bajrangbali) लेटे हुए, कहीं बैठे हुए तो कहीं उनकी सबसे ऊंची प्रतिमा देखी होगी। लेकिन गुजरात के द्वारका में हनुमान जी का एक अनोखा ही मंदिर है। इस मंदिर में हनुमान जी अपने पुत्र मकरध्वज के साथ विराजमान हैं। जी हां आपको जानकर आश्चर्य जरुर हुआ होगा, क्योंकि हनुमान जी तो बालब्रह्मचारी थे। जानिए, इस मंदिर से जुड़ी कुछ रोचक बातें।
राम भक्त हनुमानजी (Hanumanji) की पूंछ में चमत्कारिक असर माना गया है। यही कारण है कि ग्रहों के दुष्प्रभाव को दूर करने के लिए भी उनकी पूंछ की पूजा की जाती है। हनुमान जी को देवी-देवताओं ने कई तरह की शक्तियों का वरदान दिया है। अष्टसिद्धि और नवनिधि के दाता की पूंछ में भी कम ताकत नहीं होती।
हनुमानजी (Hanuman ji) लंका अकेले नहीं गए थे, अपने हृदय के सिंहासन पर श्रीराम को विराजमान कर ले गए थे। तभी तो सीताजी के समक्ष हनुमानजी के हृदय में विराजमान राम अपनी विरह-व्यथा स्वयं ही कहते हैं- 'कहेउ राम वियोग तव' हनुमानजी को ‘सिन्दूरारूणविग्रह’ कहा जाता है।
कलयुग के प्रमुख देवताओं में से एक बजरंगबली (Bajrangbali) को चिरंजवी माना जाता है। अर्थात वे अजर-अमर हैं। हनुमान जी...





