एक के बाद एक वैज्ञानिक सबूत हमारे सामने आते जा रहे हैं जो साफ कर रहे हैं कि बीती जुलाई मानव इतिहास, या उससे पहले के कालखंड की भी सबसे अधिक गरम जुलाई थी।
बारिश की आमद गर्मी से राहत देने के लिए जानी जाती थी। मगर अब, यह राहत बन रही है आफत। भारत में चरम मौसम की घटनाओं में वृद्धि का पैमाना हर गुजरते साल के साथ नई ऊंचाई छू रहा है।
क्लाइमेट सेंट्रल के इस विश्लेषण की मानें तो 14-16 जून, 2023 के बीच पूरे उत्तर प्रदेश में चलने वाली तीन दिन रही मारक हीटवेव (Heat Wave) की संभावना जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के कारण कम से कम दो गुना अधिक पाई गई।
जी7, जी20 और यूएनएफसीसीसी सीओपी28 की अध्यक्षता इस साल क्रमशः जापान, भारत और संयुक्त अरब अमीरात के रूप में एशियाई देशों के पास है। ये अंतरराष्ट्रीय आयोजन दरअसल जलवायु परिवर्तन (Climate Change), ऊर्जा संक्रमण और वित्त के बारे में एक परिप्रेक्ष्य प्रदान करते हैं।
फ्रांस गुरुवार से शुरू होने वाले इस दो दिवसीय शिखर सम्मेलन को आने वाले महीनों में महत्वपूर्ण आर्थिक और जलवायु बैठकों की एक श्रृंखला से पहले विचारों को साझा करने के एक अवसर के रूप में देखता है।
इस साल के, अरब सागर में आए, पहले चक्रवात (cyclone) 'बिपरजॉय' (Biparjoy) ने फिलहाल काफी गंभीर सूरत धारण कर ली है। लेकिन इसी बीच राहत की बात ये है कि मानसून कुछ दिनों की देरी से कल केरल पहुंच गया। मगर हां, चक्रवात की वजह से मॉनसून की गति पर प्रभाव पड़ सकता है।
जर्मनी की लाइपजिग यूनीवर्सिटी में हुए ताज़ा शोध की मानें तो इस साल, बीते लगभग सवा लाख साल बाद जुलाई का महीना सबसे गर्म रहेगा।
भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन (Climate Change) मंत्रालय ने 'ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम (जीसीपी)' कार्यान्वयन नियमों के मसौदे को सार्वजनिक करते हुए एक बेहतर और पर्यावरण हित में एक साहसिक कदम उठाया है।
दुनिया भर में प्राकृतिक आपदाओं (Natural Disasters) के बढ़ते हमले से निपटने के लिए, वर्ल्ड बैंक समूह ने देशों को तेजी से और प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया देने में मदद करने के उद्देश्य से कई नए और विस्तारित उपायों की घोषणा की है।
वैश्विक मामलों के थिंकटैंक ओडीआई की एक ताजा रिसर्च में यह बात सामने आई है कि निम्न और मध्यम आमदनी वाले देशों में जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuel) के खनन से संबंधित कर्ज के कुचक्र से वैश्विक स्तर पर एनेर्जी ट्रांज़िशन को खतरा उत्पन्न हो रहा है।
शिखर सम्मेलन के दौरान, SAIARD द्वारा ग्लोबल डेल्टा कैटलॉग का भी लॉन्च किया गया। यह कैटलॉग एक व्यापक सूची है जो दुनिया भर में 32 डेल्टाओं के बारे में जानकारी प्रदान करती है, जिसमें उनका भूगोल, भौतिक विज्ञान, कृषि पद्धतियां और जनसंख्या शामिल है।
पृथ्वी पर पहली बार मानवता के लिए सुरक्षा और न्याय का ऐसा मूल्यांकन किया गया है। इन वैज्ञानिकों के अनुसार यह बेहद चुनौतीपूर्ण रहा क्योंकि अर्थ कमीशन नाम के इस समूह का निष्कर्ष है कि पृथ्वी के लिए अब तक कई सुरक्षित सीमाएं पहले ही पार हो चुकी हैं।












