दुनिया भर में प्राकृतिक आपदाओं (Natural Disasters) के बढ़ते हमले से निपटने के लिए, वर्ल्ड बैंक समूह ने देशों को तेजी से और प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया देने में मदद करने के उद्देश्य से कई नए और विस्तारित उपायों की घोषणा की है।
वैश्विक मामलों के थिंकटैंक ओडीआई की एक ताजा रिसर्च में यह बात सामने आई है कि निम्न और मध्यम आमदनी वाले देशों में जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuel) के खनन से संबंधित कर्ज के कुचक्र से वैश्विक स्तर पर एनेर्जी ट्रांज़िशन को खतरा उत्पन्न हो रहा है।
शिखर सम्मेलन के दौरान, SAIARD द्वारा ग्लोबल डेल्टा कैटलॉग का भी लॉन्च किया गया। यह कैटलॉग एक व्यापक सूची है जो दुनिया भर में 32 डेल्टाओं के बारे में जानकारी प्रदान करती है, जिसमें उनका भूगोल, भौतिक विज्ञान, कृषि पद्धतियां और जनसंख्या शामिल है।
पृथ्वी पर पहली बार मानवता के लिए सुरक्षा और न्याय का ऐसा मूल्यांकन किया गया है। इन वैज्ञानिकों के अनुसार यह बेहद चुनौतीपूर्ण रहा क्योंकि अर्थ कमीशन नाम के इस समूह का निष्कर्ष है कि पृथ्वी के लिए अब तक कई सुरक्षित सीमाएं पहले ही पार हो चुकी हैं।
पैरिस समझौते (Paris Agreement) के बाद से पवन और सौर ऊर्जा के कारण जी20 देशों में कोयले से बनने वाली बिजली की हिस्सेदारी में गिरावट आयी है।
हर साल, मध्यप्रदेश के धार ज़िले में किसान समुदाय अक्षय तृतीया से ही खेती संबंधी तैयारी में जुट जाते हैं। यह किसान अक्षय तृतीया पर जमीनों के सौदे और खेतों को किराए पर देने से लेकर अन्य व्यवस्थाओं को भी इसी समय तय कर लेते हैं।
जी7, जी20 और यूएनएफसीसीसी सीओपी28 की अध्यक्षता इस साल क्रमशः जापान, भारत और संयुक्त अरब अमीरात के रूप में एशियाई देशों के पास है। ये अंतरराष्ट्रीय आयोजन दरअसल जलवायु परिवर्तन (Climate Change), ऊर्जा संक्रमण और वित्त के बारे में एक परिप्रेक्ष्य प्रदान करते हैं।
फ्रांस गुरुवार से शुरू होने वाले इस दो दिवसीय शिखर सम्मेलन को आने वाले महीनों में महत्वपूर्ण आर्थिक और जलवायु बैठकों की एक श्रृंखला से पहले विचारों को साझा करने के एक अवसर के रूप में देखता है।
इस साल के, अरब सागर में आए, पहले चक्रवात (cyclone) 'बिपरजॉय' (Biparjoy) ने फिलहाल काफी गंभीर सूरत धारण कर ली है। लेकिन इसी बीच राहत की बात ये है कि मानसून कुछ दिनों की देरी से कल केरल पहुंच गया। मगर हां, चक्रवात की वजह से मॉनसून की गति पर प्रभाव पड़ सकता है।
इंसान की गतिविधियों की वजह से पैदा हुए जलवायु परिवर्तन (Climate Change) ने बांग्लादेश, भारत, लाओस और थाईलैंड में रिकॉर्ड तोड़ उमस भरी ताप लहर (Heatwave) की संभावनाओं को 30 गुना तक बढ़ा दिया है।
क्या आप किसी विषय को बीस से तीस सेकंड में समझने की कल्पना कर सकते हैं? अगर नहीं, तो आपको ऐसी कोई कल्पना करने की ज़रूरत नहीं। क्योंकि यह एक हक़ीक़त है। तो क्या है ये हक़ीक़त, इसे जानने के लिए यह लेख अंत तक पढ़िये
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (World Meteorological Organization) की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, पहाड़ की चोटियों से लेकर समुद्र की गहराई तक, जलवायु परिवर्तन (Climate Change) ने 2022 में अपनी प्रगति बरक़रार रखी।












