वैश्विक स्तर पर शुद्ध ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के मामले में स्वास्थ्य क्षेत्र पांचवें स्थान पर है। ऐसे में देश की स्वास्थ्य क्षेत्र की तैयारियों को जलवायु परिवर्तन के दृष्टिगत संबोधित करने के महत्व पर चर्चा करने के लिए, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) के साथ साझेदारी में एशियाई विकास बैंक ने आज गोवा में G20 के लिए स्वास्थ्य कार्य समूह में एक साइड इवेंट का आयोजन किया।
देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य, कृषि, और अन्य सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक प्रणालियों पर बोझ डालते हुए भारत में फिलहाल हीटवेव अपनी आवृत्ति, तीव्रता, और घातकता में बढ़ रही हैं।
जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र के अंतर सरकारी पैनल (IPCC) के सदस्य वैज्ञानिकों का। इन वैज्ञानिकों ने आज अपनी नवीनतम रिपोर्ट में साफ़ किया है कि अगर हम अब भी मौजूदा संसाधनों का सही रणनीतिक प्रयोग करते हैं तो जलवायु परिवर्तन की चोट के असर को काफ़ी कम कर सकते हैं।
पिछले वर्षों की अभूतपूर्व बाढ़, सूखा और बेतहाशा पानी से होने वाली घटनाएं अप्रत्याशित नहीं, बल्कि मानव द्वारा दशकों से चली आ रही पानी की बदइंतज़ामी से होने वाली सिस्टेमेटिक क्राइसेस का नतीजा हैं। यह कहना है ग्लोबल कमीशन ऑन इक्नोमिक्स ऑफ वॉटर रिपोर्ट (Global Commission on Economics of Water Report) का।
साल 2008 में 21.46 डिग्री सेल्सियस के पिछले रिकॉर्ड की तुलना में दिसंबर 2022 के 21.49 डिग्री सेल्सियस के उच्चतम औसत तापमान के साथ साल 2022 को बीते 122 वर्षों के इतिहास में सबसे गर्म साल घोषित किया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन (Joe Biden) ने गुरुवार को भारतीय-अमेरिकी व्यापार कार्यकारी अजय बंगा (Ajay Banga) को विश्व बैंक का अध्यक्ष (World Bank President) बनने के लिए नामित किया
भारत सरकार का पशुपालन और डेयरी विभाग आज गोवा में आयोजित होने वाले जी-20 स्वास्थ्य कार्य समूह के कार्यक्रम में शामिल हो रहा है। इस आयोजन का मूल विषय वन हेल्थ एजेंडा की रणनीति और संचालन है।
जी20 देशों के अध्यक्ष के रूप में भारत के पास वैश्विक स्तर पर न्यायसंगत ट्रांज़िशन (equitable transition) के वित्तपोषण तथा कई अन्य पहलुओं पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का मौका है।
ऊर्जा क्षेत्र की देश की अग्रिणी सार्वजनिक गैर बैंकिंग वित्तीय कम्पनियां (NBFC) पीएफसी और आरईसी नई प्रौद्योगिकियों (पवन बिजली सौर ऊर्जा बैटरी स्टोरेज और इलेक्ट्रिक वाहन आदि) के हिसाब से खुद को पर्याप्त रूप से बदल नहीं पाई हैं जिसके चलते इनके विकास और मुनाफ़ा कमाने की दर ठहरी हुई है।
अब, हमारा देश गरज ओलावृष्टि और बिजली गिरने के साथ-साथ प्री-मानसून बारिश और गरज के साथ बौछारों के एक और लंबे दौर के लिए तैयार है। इसके साथ, हिन्दुस्तान के कई हिस्सों में खड़ी फसल पर फसल के नुकसान का खतरा बढ़ रहा है।
पूरी दुनिया फिलहाल जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के विनाशकारी प्रभावों से जूझ रही है। ऐसे में तमाम देशों के लिए इसके प्रभावों को कम करने के लिए सक्रिय कदम उठाना ज़रूरी होता जा रहा है। इस दिशा में अफ्रीकी देश सिएरा लियोन (Sierra Leone) से एक बेहद सकारात्मक खबर आ रही है।
जलवायु परिवर्तन एक गंभीर चिंता का विषय है, लेकिन यहाँ यह समझना महत्वपूर्ण है कि हर मौसम की घटना सीधे तौर पर इससे जुड़ी नहीं होती है।











