अब, हमारा देश गरज ओलावृष्टि और बिजली गिरने के साथ-साथ प्री-मानसून बारिश और गरज के साथ बौछारों के एक और लंबे दौर के लिए तैयार है। इसके साथ, हिन्दुस्तान के कई हिस्सों में खड़ी फसल पर फसल के नुकसान का खतरा बढ़ रहा है।
पूरी दुनिया फिलहाल जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के विनाशकारी प्रभावों से जूझ रही है। ऐसे में तमाम देशों के लिए इसके प्रभावों को कम करने के लिए सक्रिय कदम उठाना ज़रूरी होता जा रहा है। इस दिशा में अफ्रीकी देश सिएरा लियोन (Sierra Leone) से एक बेहद सकारात्मक खबर आ रही है।
जलवायु परिवर्तन एक गंभीर चिंता का विषय है, लेकिन यहाँ यह समझना महत्वपूर्ण है कि हर मौसम की घटना सीधे तौर पर इससे जुड़ी नहीं होती है।
फिक्र की बात यह है कि अल नीनो जैसे खतरनाक प्रभाव की वापसी हो रही है। जलवायु परिवर्तन (Climate Change) से जुड़े मॉडल्स के अनुमानों के मुताबिक अल नीनो का प्रभाव मई-जुलाई के दौरान लौटने की सम्भावना है। यह अवधि गर्मी और मानसून के मौसम को आपस में जोड़ती है। मानसून की अवधि जून से सितंबर के बीच मानी जाती है।
जिस दिन तमिलनाडु चक्रवात मंडौस (Cyclone Mandaus) के तट पर दस्तक देने की तैयारी कर रहा था, ठीक उसी दिन राज्य सरकार ने तमिलनाडु जलवायु परिवर्तन (Climate Change) मिशन के शुभारंभ के साथ जलवायु लचीलापन की दिशा में काम करने की अपनी तैयारियों और प्रतिबद्धता पर फिर से जोर दिया है।
इसके साथ भारत हुआ उन 60 देशों की विशिष्ट सूची में शामिल जिन्होंने अब तक सौंपे हैं UNFCCC को अपनी रणनीति
साल 2008 में 21.46 डिग्री सेल्सियस के पिछले रिकॉर्ड की तुलना में दिसंबर 2022 के 21.49 डिग्री सेल्सियस के उच्चतम औसत तापमान के साथ साल 2022 को बीते 122 वर्षों के इतिहास में सबसे गर्म साल घोषित किया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन (Joe Biden) ने गुरुवार को भारतीय-अमेरिकी व्यापार कार्यकारी अजय बंगा (Ajay Banga) को विश्व बैंक का अध्यक्ष (World Bank President) बनने के लिए नामित किया
दुनिया में अपनी तरह के इस पहले विश्लेषण में विश्व भर के हर राज्य और प्रान्त की जलवायु का तुलनात्मक अध्ययन किया गया है। इस रिपोर्ट में पाया गया है कि भारत के नौ राज्य जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के आठ नुकसानदेह प्रभावों से होने वाली क्षति के सबसे गम्भीर खतरे वाले दुनिया के टॉप 50 क्षेत्रों की सूची में शामिल हैं।
जलवायु परिवर्तन (Climate Change) सतत विकास के लिए एकमात्र सबसे बड़ा खतरा बन कर खड़ा है और इसके व्यापक और अभूतपूर्व प्रभाव सबसे गरीब और सबसे कमजोर लोगों पर असमान रूप से अधिक दुष्प्रभाव डालते हैं। जलवायु परिवर्तन को रोकने और इसके दुष्प्रभावों से निपटने के लिए तत्काल कार्रवाई सभी सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को सफलतापूर्वक प्राप्त करने का अभिन्न अंग है।
जलवायु परिवर्तन (Climate Change) से गंभीर प्रभावों से बचने के लिए दुनिया को कोयले के जलने से होने वाले कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को कम करने के लिए तेजी से आगे आना चाहिए। ऐसा कुछ करने के लिए ज़रूरी है कि कोयले के स्वच्छ ऊर्जा विकल्पों के लिए बड़े पैमाने पर वित्तपोषण को तेजी से बढ़ाया जाए और तत्काल नीति कार्रवाई सुनिश्चित कि जाए।
सभी देश और वहाँ की स्वास्थ्य प्रणालियाँ COVID-19 महामारी के सामाजिक और आर्थिक प्रभावों से उबर ही रही थीं कि ठीक तब ही रूस और यूक्रेन के संघर्ष ने एक वैश्विक ऊर्जा संकट खड़ा कर दिया। और इस सब के साथ जलवायु परिवर्तन (Climate change) बेरोकटोक अपनी गति से बढ़ता चला जा रहा है।








