दुनिया में अपनी तरह के इस पहले विश्लेषण में विश्व भर के हर राज्य और प्रान्त की जलवायु का तुलनात्मक अध्ययन किया गया है। इस रिपोर्ट में पाया गया है कि भारत के नौ राज्य जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के आठ नुकसानदेह प्रभावों से होने वाली क्षति के सबसे गम्भीर खतरे वाले दुनिया के टॉप 50 क्षेत्रों की सूची में शामिल हैं।
जलवायु परिवर्तन (Climate Change) सतत विकास के लिए एकमात्र सबसे बड़ा खतरा बन कर खड़ा है और इसके व्यापक और अभूतपूर्व प्रभाव सबसे गरीब और सबसे कमजोर लोगों पर असमान रूप से अधिक दुष्प्रभाव डालते हैं। जलवायु परिवर्तन को रोकने और इसके दुष्प्रभावों से निपटने के लिए तत्काल कार्रवाई सभी सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को सफलतापूर्वक प्राप्त करने का अभिन्न अंग है।
जलवायु परिवर्तन (Climate Change) से गंभीर प्रभावों से बचने के लिए दुनिया को कोयले के जलने से होने वाले कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को कम करने के लिए तेजी से आगे आना चाहिए। ऐसा कुछ करने के लिए ज़रूरी है कि कोयले के स्वच्छ ऊर्जा विकल्पों के लिए बड़े पैमाने पर वित्तपोषण को तेजी से बढ़ाया जाए और तत्काल नीति कार्रवाई सुनिश्चित कि जाए।
सभी देश और वहाँ की स्वास्थ्य प्रणालियाँ COVID-19 महामारी के सामाजिक और आर्थिक प्रभावों से उबर ही रही थीं कि ठीक तब ही रूस और यूक्रेन के संघर्ष ने एक वैश्विक ऊर्जा संकट खड़ा कर दिया। और इस सब के साथ जलवायु परिवर्तन (Climate change) बेरोकटोक अपनी गति से बढ़ता चला जा रहा है।
जलवायु परिवर्तन (Climate Change) की वैश्विक लड़ाई में स्थानीय कार्यवाही की प्रासंगिकता को लगातार सिद्ध करने के लिए भारत सरकार ने उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग को वैश्विक पटल पर अपने नवाचारों को पूरी दुनिया के शीर्ष नेतृत्व के समक्ष प्रस्तुत करने का एक मौका देना का फैसला किया है।
जब ग्लासगो में प्रधानमंत्री मोदी ने COP 26 के दौरान जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के खिलाफ़ वैश्विक जंग के संदर्भ में अंग्रेज़ी के शब्द LIFE के अक्षरों में छिपे एक मंत्र ‘लाइफ़स्टाइल फॉर एनवायरनमेंट’ (Lifestyle for Environment) का उल्लेख किया था, तब वो महज़ उनके चिर-परिचित अंदाज़ वाला शब्दों का खेल नहीं था।
फिक्र की बात यह है कि अल नीनो जैसे खतरनाक प्रभाव की वापसी हो रही है। जलवायु परिवर्तन (Climate Change) से जुड़े मॉडल्स के अनुमानों के मुताबिक अल नीनो का प्रभाव मई-जुलाई के दौरान लौटने की सम्भावना है। यह अवधि गर्मी और मानसून के मौसम को आपस में जोड़ती है। मानसून की अवधि जून से सितंबर के बीच मानी जाती है।
जिस दिन तमिलनाडु चक्रवात मंडौस (Cyclone Mandaus) के तट पर दस्तक देने की तैयारी कर रहा था, ठीक उसी दिन राज्य सरकार ने तमिलनाडु जलवायु परिवर्तन (Climate Change) मिशन के शुभारंभ के साथ जलवायु लचीलापन की दिशा में काम करने की अपनी तैयारियों और प्रतिबद्धता पर फिर से जोर दिया है।
इसके साथ भारत हुआ उन 60 देशों की विशिष्ट सूची में शामिल जिन्होंने अब तक सौंपे हैं UNFCCC को अपनी रणनीति
इस सर्वे में शामिल 64% लोगों का कहना है कि भारत सरकार को ग्लोबल वार्मिंग से निपटने के लिए और अधिक प्रयास करने चाहिए
ऑस्कर विजेता निर्माताओं द्वारा बनाई यह फीचर फिल्म पोप फ्रांसिस की व्यक्तिगत कहानी की न सिर्फ एक अनदेखी झलक पेश करती है बल्कि वैश्विक जलवायु न्याय के लिए दबाव भी बनाती है
रायपुर: छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन एवं मानव स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन राजधानी रायपुर...



