इस कलयुग में हिंदुओं में सबसे अधिक हनुमान जी (Hanuman ji) को पूजा जाता है। भगवान राम के आशीर्वाद से हनुमान जी को कलयुग का जीवित देवता माना जाता है।
रामभक्त हनुमान (Hanuman ji) हमेशा ही अपने आराध्य देव भगवान श्री राम (Shri Ram) के समीप ही रहा करते थे और भगवान राम भी हनुमान जी को पुत्रवत प्रेम किया करते थे। हनुमान जी के कारण ही मृत्यु के देवता काल देव राम जी के पास आने से डरते थे।
भारत में हनुमान जी के देशभर में कई प्रसिद्ध मंदिर स्थापित हैं। परंतु झांसी में स्थापित हनुमान मंदिर ऐसा है, जो अपनी खास विशेषता के कारण के चलते चर्चा का विषय बना हुआ है।
हनुमानजी (Hanuman ji) रावण (Ravan) की स्वर्ण नगरी लंका को जला कर राख करके चले जाते हैं और रावण उनका कुछ नहीं कर सका। वह सोचते-सोचते परेशान हो जाता है कि आखिर उस हनुमान में इतनी शक्ति आई कहां से?
छपरा जिला मुख्यालय से महज दस किमी की दूरी पर स्थित पैराणिक गोदना, वर्तमान में रिविलगंज, के विषय में कम जानते होंगे। वस्तुत: यह क्षेत्र आरण्यक संस्कृति का प्रतिविम्ब है। घाघरा के तट पर यह स्थान ऋषि-मुनियों का साधना क्षेत्र रहा है। त्रेता युग में इसी स्थान पर महर्षि श्रृंगी के द्धारा कराए गए पुत्र्येष्टि यज्ञ के कारण ही प्रभु श्रीराम का जन्म हुआ था।
हनुमान जी (Hanuman ji) और अंगद जी (Angad ji) दोनों ही समुद्र लाँघने में सक्षम थे, फिर पहले हनुमान जी लंका क्यों गए? अंगद जी बुद्धि और बल में बाली के समान ही थे। समुद्र के उस पार जाना भी उनके लिए बिल्कुल सरल था। किन्तु वह कहते हैं कि लौटने में मुझे संशय है। आखिर कौन सा संशय था उन्हें? जानिए पूरी कथा।
मान्यता है कि इस दिन हनुमान जी की सच्चे मन से पूजा और सेवा करने वालों को वह कभी निराश नहीं करते और हर संकट से उन्हें बचाने स्वंय दौड़े चले आते हैं। यही वजह है कि मंगलवार व्रत का विशेष महत्व है।
पुरी के जगन्नाथ मंदिर (Jagannath Temple) के बारे में कहा जाता है कि पास स्थित समुंदर की लहरें कभी भी मंदिर के प्रांगण में आ जाती थीं, जिससे वहां लगभग हर वक़्त स्थिति आपदा वाली रहती थी।
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कलयुग में सबसे ज्यादा पूजे जाने वाले हनुमान जी के पास अनेक अस्त्र-शस्त्र हैं, जिनमें पहले स्थान पर उनका गदा आता है। आइये जानते हैं हनुमान जी को गदा कैसे प्राप्त हुआ और इसकी विशेषताएं क्या हैं?
इस हनुमान मंदिर (Hanuman Mandir) को हनुमानगढ़ी (Hanumangarhi) के नाम से जाना जाता है। नैनीताल के अतिरिक्त भारत के अन्य प्रदेशों में भी हनुमान गढ़ी के नाम से कई मंदिर प्रसिद्ध हैं।
सबसे पहले हनुमानजी ने भगवान राम को समर्पित एक रामायण चट्टान पर लिखी थी। उन्होंने लेखनी के लिए अपने नाखूनों का इस्तेमाल किया। उन्होंने यह कथा वाल्मीकि से भी पहले लिखी थी।










