Kailash Mansarovar Yatra 2026: The Kailash Mansarovar Yatra has commenced from Tanakpur, Uttarakhand. Chief Minister Pushkar Singh Dhami flagged off...
हनुमानजी (Hanuman ji) रावण (Ravan) की स्वर्ण नगरी लंका को जला कर राख करके चले जाते हैं और रावण उनका कुछ नहीं कर सका। वह सोचते-सोचते परेशान हो जाता है कि आखिर उस हनुमान में इतनी शक्ति आई कहां से?
सप्तऋषियों में एक ऋषि भृगु थे, वो स्त्रियों को तुच्छ समझते थे। वो शिवजी (Shivji) को गुरुतुल्य मानते थे, किन्तु...
देवाधिदेव महादेव शिव को भगवान विष्णु (Bhagwan Vishnu) का आराध्य और श्री हरि विष्णु (Shri Hari Vishnu) को देवाधिदेव महादेव (Mahadev) का आराध्य बताया जाता रहा है। भगवान विष्णु अगर जगत का पालन करते हैं तो भगवान शिव (Bhagwan Shiv) इस संसार का संहार करते हैं। दोनों में कोई न बड़ा है और न ही छोटा है।
Char Dham Yatra, a pilgrimage to the four holy sites of Yamunotri, Gangotri, Kedarnath, and Badrinath, holds great significance for the devotees, which is scheduled to begin on May 10.
अकाल मृत्यु, महारोग, धन-हानि, गृह क्लेश, ग्रहबाधा, ग्रहपीड़ा, सजा का भय, प्रॉपर्टी विवाद, समस्त पापों से मुक्ति आदि जैसे स्थितियों में भगवान शिव के महामृत्युंजय मंत्र या लघु मृत्युंजय मंत्र का जाप इन सभी समस्याओं से मुक्ति के लिए किया जाता है।
देवो के देव महादेव (Mahadev) भगवान शिव और सती का अद्भुत प्रेम शास्त्रों में वर्णित है। इसका प्रमाण है सती के यज्ञ कुण्ड में कूदकर आत्मदाह करना और सती के शव को उठाए क्रोधित शिव का तांडव करना। हालांकि यह भी शिव की लीला थी क्योंकि इस बहाने शिव 51 शक्ति पीठों की स्थापना करना चाहते थे।
जिस प्रकार महादेव की महिमा अपरम्पार है उसी प्रकार उनके रूप-स्वरुप की भी महिमा अपरम्पार है। महादेव (Mahadev)अपने शरीर पर...





