ऊर्जा क्षेत्र की देश की अग्रिणी सार्वजनिक गैर बैंकिंग वित्तीय कम्पनियां (NBFC) पीएफसी और आरईसी नई प्रौद्योगिकियों (पवन बिजली सौर ऊर्जा बैटरी स्टोरेज और इलेक्ट्रिक वाहन आदि) के हिसाब से खुद को पर्याप्त रूप से बदल नहीं पाई हैं जिसके चलते इनके विकास और मुनाफ़ा कमाने की दर ठहरी हुई है।
कैम्ब्रिज इकोनोमेट्रिक्स (Cambridge Econometrics) की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, जीवाश्म-ईंधन (fossil fuel) से संबंधित चीजों, जैसे परिवहन और घरेलू...
भारत द्वारा अक्षय ऊर्जा (renewable energy) और इलेक्ट्रिक वाहनों (electric vehicles) पर दी जाने वाली सब्सिडी वित्तीय वर्ष 2022 में दोगुनी से भी ज्यादा हो गयी है। मगर सरकार के सामने आने वाले वर्षों में देश के जलवायु सम्बन्धी लक्ष्यों को हासिल करने के लिये इस रफ्तार को बनाये रखने की चुनौती होगी।
पवन और सौर उत्पादन में वृद्धि 2022 की पहली छमाही में मांग वृद्धि के तीन-चौथाई से अधिक हो गई, जबकि बाकी मांग हाइड्रो से पूरी हुई। ऐसा होने से न सिर्फ जीवाश्म उत्पादन में संभावित 4% की वृद्धि रोकी जा सकी, बल्कि ईंधन लागत में $ 40 बिलियन अमरीकी डालर और 230 मीट्रिक टन CO2 एमिशन को रोका गया।
महामारी के बाद इस क्षेत्र में भारत ने वापसी की, मगर महिलाओं की भागीदारी अब तक के सबसे निचले स्तर पर
भारत साल 2030 तक अपनी गैर-जीवाश्म बिजली क्षमता (non-fossil power potential) को 500 गीगावाट (GW) तक पहुंचाएगा और इस लक्ष्य का आधा रिन्यूबल ऊर्जा (renewable energy) से हासिल किया जाएगा। साथ ही, उत्सर्जन में एक बिलियन टन की कमी और 2030 तक सकल घरेलू उत्पाद की उत्सर्जन तीव्रता में 45% की कमी कि भी घोषणा मोदी जी ने की है।
वैश्विक ऊर्जा थिंक टैंक एम्बर (global energy think tank amber) के नए विश्लेषण से पता चलता है कि 2022 में भारत की बिजली क्षमता में वृद्धि का बहुमत (92%) सौर और पवन से चलित था। इस साल, जी20 शिखर सम्मेलन के होने से पहले यह मज़बूत वृद्धि देश के जलवायु नेतृत्व ग्रहण करने के लिए मंच तैयार करती है। कोयला केवल 5% के लिए ज़िम्मेदार है।
भारत ने वर्ष 2025 तक 76 गीगावॉट यूटिलिटी स्केल सौर (solar power) और पवन बिजली (wind power) उत्पादन क्षमता विकसित करने की योजना बनाई है। इससे भारत 19.5 बिलियन डॉलर (1588 बिलियन रुपए) बचा सकता है। ग्लोबल एनर्जी मॉनिटर (Global Energy Monitor) के ताजा अध्ययन में यह बात सामने आई है।
साल 2021 में कोयले और रिन्यूबल स्त्रोतों से जुड़ी ऊर्जा परियोजनाओं की एक एनालिसिस से पता चलता है कि साल 2021 में कोयला बिजली परियोजनाओं के लिए कोई नया वित्तपोषण नहीं किया गया था। इतना ही नहीं, 2021 में नई ऊर्जा परियोजनाओं के लिए कुल वित्तपोषण, वित्त वर्ष 2017 के स्तर की तुलना में 60% कम था।
रिन्यूबल एनर्जी (renewable energy) नामक पत्रिका में हाल ही में प्रकाशित एक लेख से इस बात की प्रबल संभावना जाहिर हुई है कि दिल्ली वर्ष 2050 तक जीवाश्म ईंधन (fossil fuel) से छुटकारा पाकर 100% अक्षय ऊर्जा पर निर्भरता का लक्ष्य हासिल कर सकती है। अपनी तरह के इस पहले शोध में दिल्ली जैसे उत्तर भारतीय महानगर में 100% अक्षय ऊर्जा प्रणालियों की तकनीकी साध्यता और आर्थिक व्यवहार्यता के बारे में बात की गई है।
इस साल के अंत तक भारत ने अपने लिए 175 गीगावाट की रिन्यूबल एनेर्जी क्षमता स्थापना का लक्ष्य रखा था। मगर बीती अगस्त तक भारत ने इस लक्ष्य का दो तिहाई हासिल किया है। मतलब दिसंबर तक लक्ष्य का एक तिहाई हासिल करना बाकी है।
भारत में अक्षय ऊर्जा पर सब्सिडी 59 प्रतिशत गिरकर 6,767 करोड़ रुपये हो गई है, जो वित्त वर्ष 2017 में...







