तिरुनलार सनीश्वरन मंदिर (Tirunallar Saneeswaran Temple) या धरबरनीश्वर मंदिर (Dharbarneeshwar Temple) भारत के पांडिचेरी के कराईकल जिले में भगवान शनि (Shanidev) को समर्पित मंदिरों में से एक है।
छत्तीसगढ़ में एक ऐसा शनि मंदिर हैं, जहां शनि देव अपनी पत्नी के साथ विराजित है। एक तरफ जहां शनि मंदिर में महिलाओं का प्रवेश वर्जित है, वहीं यह एक अनोखा मंदिर है जहां पति-पत्नी साथ पूजा करते हैं।
शास्त्रों में कुछ देवी-देवताओं की मूर्तियां या फोटो को घर पर रखना वर्जित माना गया है। इन्हीं में से एक शनिदेव की मूर्ति भी है।
एक समय माता छाया के विलुप्त होने के बाद पूरे घटनाक्रम से अनजान होने के चलते संध्या के प्रति अनुराग...
श्मशान में जब महर्षि दधीचि के मांसपिंड का दाह संस्कार हो रहा था तो उनकी पत्नी अपने पति का वियोग...
बहुत कम लोग भगवान शिव भगवान शिव (Lord Shiva) के एक ऐसे अवतार के बारे में जानते होंगे जिन्होंने शनिदेव (Shanidev) पर प्रहार किया था। उसकी के कारण शनिदेव की गति मंद हो गई।
जन्म से 5 वर्ष तक किसी भी बालक की कुंडली में शनि का स्थान नहीं होगा। जिससे कोई और बालक मेरे जैसा अनाथ न हो।
कौरवों से जुए में राज-पाट हारने के बाद पाण्डवों को 12 साल का वनवास और एक वर्ष का अज्ञातवास हुआ था। 12 साल का समय समाप्त होने में कुछ समय शेष रह गया था और अज्ञातवास का आरंभ होना था।
भगवान शिव के फल से ज्येष्ठ की अमावस्या में भगवान शनिदेव (Shanidev) का जन्म हुआ। सूर्य के तेज और तप के कारण शनिदेव का रंग काला हो गया। लेकिन माता की घोर तपस्या के कारण शनि महाराज में अपार शक्तियों का समावेश हो गया।
सूर्यपुत्र शनिदेव (Shanidev) भगवान जी कहते हैं मैं गुरुओं का भी गुरु हूं और योद्धाओं का भी योद्धा हूं योगियों...
शनिदेव व्यक्ति को माया, मोह, असत्य, इन्द्रियजन्य सुख, विषय-वासना की आसक्ति से हटाकर परमतत्व का ज्ञान कराते हैं। साथ ही अच्छे-बुरे की पहचान भगवान शनिदेव द्वारा ही होती है। स्वार्थ की धुरी पर चलने वाली इस सृष्टि में व्यक्ति को परमात्मा की ओर मोड़ने वाले एक मात्र भगवान शनिदेव ही हैं। भगवान शनिदेव मानव को विभन्न प्रकार की कष्टाग्नि में तपाकर कुंदन बनाते हैं तथा समय के अनुसार चलना सिखाते हैं।
शनि देव के पैर में खराबी का गवाह है अक्षयपुरीश्वर मंदिर









