स्वामी सहजानन्द सरस्वती अपने युग-धर्म के अवतार थे। वे नि:संग थे। अपने समय के पदचाप के आकुल पहचान थे। किसान विस्फोट के प्रतीक थे। किसान आंदोलन के पर्यायवाची थे। उत्कट राष्ट्रवादी थे। पद राष्ट्रवादी वामपंथ के अग्रणी सिद्धांतकार, सूत्रकार एवं संघर्षकार थे। दुर्द्धर्ष व्यक्तित्व के धनी थे। सामाजिक न्याय के प्रथम उद्घोषक थे। संगठित किसान आंदोलन के जनक एवं संचालक थे। अथक परिश्रमी थे. तेजस्वी व्यक्तित्व के स्वामी थे।
‘सनातन धर्म’ एक महान धर्म है और विश्व में इसका कोई पर्याय नहीं । हमारे इसी धर्म पर ईसाई मिशनरी...
सम्भल जाओ मित्रों वरना…. खुद समझ जाओ… ● आयुर्वेद के अनुसार हमारे शरीर में जितने भी रोग होते हैं वो...
ईशान संहिता के अनुसार फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी की महानिशा यानी आधी रात के वक्त भगवान शिव लिंग रूप में प्रकट...
पटना: राष्ट्र और धर्म जब संकट में होते हैं, तब धर्मसंस्थापना का कार्य इसी ‘गुरु-शिष्य’ परंपरा ने किया है ।...
फाल्गुनी पूर्णिमा के दिन आने वाला होली यह त्योहार देशभर में उत्साह से मनाया जाता है। दुष्ट प्रवृत्ती एवं अमंगल...
''वहॉं अन्धेरा है, वहॉं जाने में डर लगता है।''- यह वह पाठ है, जिसे बच्चे रात को प्राय; घर-घर दुहराते...
आयुर्वेद में छाछ (Buttermilk) को सात्विक आहार माना गया है। दही से बनने वाला यह पेय पदार्थ स्वास्थ्य के लिए...
सरकार बढ़ती बेरोजगारी के बीच naukri.com जैसे निजी नौकरी पोर्टल के साथ प्रतिस्पर्धा के लिए मंच तैयार कर रहा है।
मां दरबार आने वाले हर भक्त की झोली भरती हैं। हर जगह लोग मातारानी को प्रसाद के रूप में मिठाई...
नई दिल्ली: भारत के कट्टर मुसलमान देश के नौकरवर्ग को स्वयं के नियंत्रण में लेने के लिए 'यू.पी.एस.सी. जिहाद' अर्थात...
नई दिल्ली: सड़क सुरक्षा की इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और यातायात कानून-पालन के लिये सड़क यातायात और राजमार्ग मंत्रालय ने एक अधिसूचना...

