ऐसे करेंगे पूजन तो कालसर्प संबंधी दोष से मिलेगी मुक्ति
हिंदू धर्म में माँ अंबिका भवानी को पार्वती, गौरी,दुर्गा आदि नामों से जाना जाता है। यह मंदिर छपरा (सारण) मुख्यालय से तकरीबन 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
अक्षयपुरीश्वर मंदिर (Akshaypurishwar Mandir) के प्रमुख भोलेनाथ (Bholenath) और देवी पार्वती (Devi Parvati) हैं। इनके साथ ही मंदिर में शनिदेव की पूजा उनकी पत्नियों मंदा और ज्येष्ठा के साथ की जाती है।
नफरती भाषण देने पर कई पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज
इस माह को मलमास व पुरुषोत्तममास के नाम से भी जाना जाता है, किवंदती है कि इस माह में सभी 33 कोटि देवतागण राजगीर में निवास करते हैं, किसी भी शुभ कार्यों के लिए पूर्णतया वर्जित है यह मास
इस कलयुग में हिंदुओं में सबसे अधिक हनुमान जी (Hanuman ji) को पूजा जाता है। भगवान राम के आशीर्वाद से हनुमान जी को कलयुग का जीवित देवता माना जाता है।
हरियाली तीज भगवान शिव और देवी पार्वती को समर्पित है। किंवदंतियों के अनुसार, देवी पार्वती ने भगवान शिव का स्नेह पाने के लिए 107 जन्मों तक कठोर तपस्या की थी और इसी दिन दोनों का मिलन संभव हुआ था।
आम के एक घने वृक्ष के नीचे हनुमान जी दीन-दुनिया से बेखबर गहरी नींद में सोए थे और एक लय में खर्राटों से राम नाम की ध्वनि उठ रही थी।
मान्यता है कि शाम की आरती होने के बाद जब मंदिर के कपाट बंद करके सभी पुजारी नीचे आ जाते हैं तब यहां मंदिर के अंदर से घंटी और पूजा करने की आवाज आती है।
महाभारत (Mahabhart) में युद्ध रोकने के लिए श्रीकृष्ण पांडवों की ओर से दूत के रूप में हस्तिनापुर गए थे। वे दुर्योधन के पास गए और पांडवों से युद्ध न करने की सलाह दी। श्रीकृष्ण ने दुर्योधन को बहुत समझाया कि वह ये युद्ध न करे। लेकिन, वह नहीं माना। दुर्योधन ने अपने महल में श्रीकृष्ण का स्वागत किया और उनसे भोजन करने का आग्रह भी किया।
मध्यप्रदेश के देवास के ग्राम नागदा में एक अति प्राचीन श्री सिद्धि विनायक गणेश मंदिर (Siddhi Vinayak Ganesh Mandir) है। महाभारत कालीन इस मंदिर के बारे में बताया जाता है ये करीबन 5000 साल से भी अधिक पुराना है।
वृक्ष सदा उपकार की खातिर जीते है। इसलिये हम वृक्षों के कृतज्ञ है। वृक्षों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने हेतु परिवार के प्रति व्यक्ति को हरियाली अमावस्या पर एक-एक पौधारोपण करना चाहिये।











