शनि का श्याम वर्ण को देखकर सूर्य ने अपनी पत्नी छाया पर यह आरोप लगाया कि शनि मेरा पुत्र नहीं...
मान्यताओं के अनुसार इसी दिन चारों वेदों का ज्ञान देने वाले महर्षि वेद व्यास जी का जन्म हुआ था। शिवपुराण के अनुसार, वेद व्यास जी भगवान विष्णु के अंशावतार माने जाते हैं। ऐसे में पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु की पूजा का भी विशेष महत्व होता है।
माता पार्वती ने अपने शरीर के मैल से एक चेतन पुरुष की रचना की, जो सभी गुणों से संपन्न, दोषों से रहित, सुंदर अंग वाला, अद्भुत शोभायमान, महाबली और पराक्रमी था। उन्होंने अपने इस पुत्र को विनायक का नाम दिया। यही विनायक मस्तक कटने के बाद गणेश के नाम से जाने गए।
दिवाली का त्योहार, जिसे दीपावली के नाम से भी जाना जाता है, दुनिया भर में उत्सव समारोहों, आतिशबाजी और प्रार्थना के साथ मनाया जा रहा है।
सनातन धर्म में किसी भी पूजा के वक्त एक श्लोक बोला जाता है- वह है अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनूमानश्च विभीषण:। कृप:...
शनि, ग्रह व देवता दोनों रूप में पूजे जाते हैं। शनिदेव (Shanidev) व्यक्ति को उसके अच्छे व बुरे कर्मो का फल प्रदान करते हैं। इसी कारण इन्हें कर्म दंडाधिकारी का पद प्राप्त है। यह पद उन्हें भगवान शंकर से प्राप्त है।
देवताओं की सेना के सेनापति कार्तिकेय (Kartikeya) या मुरुगन भगवान (Lord Murugan) शिव और माता पार्वती के सबसे बड़े पुत्र हैं । हालांकि संपूर्ण भारत में ही कार्तिकेय की पूजा की जाती है
सूर्यदेव के रथ को संभालने वाले इन सात घोड़ों के नाम हैं- गायत्री, भ्राति, उस्निक, जगति, त्रिस्तप, अनुस्तप और पंक्ति। कहा जाता है कि यह सात घोड़े एक सप्ताह के सात दिनों को दर्शाते हैं। यह तो महज एक मान्यता है जो वर्षों से सूर्य देव के सात घोड़ों के संदर्भ में प्रचलित है लेकिन क्या इसके अलावा भी कोई कारण है, जो सूर्यदेव (Suryadev) के इन सात घोड़ों की तस्वीर और भी साफ करता है।
अग्रतश्चतुरो वेदा: पृष्ठत: सशरं धनु: । इदं ब्राह्मम् इदं क्षात्रं शापादपि शरादपि ॥ अर्थ : चारों वेद कंठस्थ कर ब्राह्मतेज...
"धनतेरस" शब्द दो शब्दों के मेल से बना है: "धन," जिसका अर्थ है धन, और "तेरस", जो तेरहवें दिन को संदर्भित करता है। इस दिन, लोग आयुर्वेद और स्वास्थ्य के देवता भगवान धन्वंतरि की पूजा करते हैं और अच्छे स्वास्थ्य और कल्याण के लिए आशीर्वाद मांगते हैं।
आज शुक्रवार मां लक्ष्मी का दिन है। मान्यता है कि आज के दिन मां लक्ष्मी की विधि-विधान के साथ पूजा करने पर माता की कृपा हमेशा व्यक्ति पर बनी रहती है। साथ ही व्यक्ति को सुख-समृद्धि और शांति भी मिलती है।







