भारत में अनेक प्राचीन मंदिर है और हर मंदिर की एक चमत्कारिक कथा हैं। इन मंदिरों का जिक्र ग्रंथों में भी मिलता है। ऐसा ही एक मंदिर तमिलनाडु के अलनगुड़ी में स्थित है। इस मंदिर का विशेष महत्व है। इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि इस पावन स्थान पर देवगुरु बृहस्पति ने भगवान शिव की अराधना करके नवग्रहों में प्रथम स्थान का आशीर्वाद पाया था।
शनि के व्रत में श्रद्धा-भक्ति तथा पूर्ण समर्पण भाव सहित स्वयं के कष्ट निवारण का आग्रह मन ही मन करना चाहिए। व्रत करने वाले स्त्री-पुरुष को चाहिए कि शनिवार को प्रात:काल स्नान कर सर्वप्रथम देव, ऋषि तथा पितृ तर्पण करें। पीपल अथवा शमी वृक्ष के नीचे भक्तिपूर्वक वेदी बनाकर उसे गौ के गोबर से लीप देना चाहिए।
यह कराची में उन हिंदुओं के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण मंदिर है, जो भारत में गंगा या सिंधु के किनारे की यात्रा नहीं कर सकते।
अक्षयपुरीश्वर मंदिर (Akshaypurishwar Mandir) के प्रमुख भोलेनाथ (Bholenath) और देवी पार्वती (Devi Parvati) हैं। इनके साथ ही मंदिर में शनिदेव की पूजा उनकी पत्नियों मंदा और ज्येष्ठा के साथ की जाती है।
Chaitra Navratri 2022: चैत्र नवरात्रि के अंतिम दिन आज मां सिद्धिदात्री (Maa Siddhidatri) की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं...
Varuthini Ekadashi 2022: इस साल वरुथिनी एकादशी (Varuthini Ekadashi) आज मंगलवार 26 अप्रैल को है। मंगलवार को एकादशी (Ekadashi) होने...
पूजा करते वक्त कुछ संकेत ऐसे होते हैं जो सीधे तौर पर भगवान का इशारा होते हैं इन इशारों का...
हिंदुओं की आस्था के केंद्र यमुनोत्री धाम स्थान यमुनोत्तरी हिमनद से 5 मील नीचे दो वेगवती जलधाराओं के मध्य एक कठोर शैल पर है। बांदरपूंछ के पश्चिमी छोर के एक संकरे स्थान पर पवित्र यमुनाजी का मंदिर है।
शनिदेव (Shanidev) की पूजा को लेकर कई तरह के सवाल लोगों के मन में उठते रहते हैं। इन्हीं में से...
भगवान सूर्य (Bhagwan Surya) जिस सात घोड़े (Seven horses) वाले रथ पर सवार रहते हैं उसके संबंध में धार्मिक ग्रंथों...
कुष्मांडा माता (Kushmanda Mata) एक हिंदू देवी हैं जिनकी हिंदू धर्म में पूजा की जाती है, खासकर नवरात्रि के त्योहार के दौरान।




