इस साल देवशयनी एकादशी (Devshayani Ekadashi) में बेहद ख़ास संयोग बन रहा है। इस दिन एक या दो नहीं, पूरे चार शुभ योग रहने वाले हैं। जानिए, इस साल देवशयनी एकादशी का व्रत कब रखा जायेगा और इस दिन कौन से विशेष योग बन रहे हैं?
किया अपने ससुर राजा दशरथ का पिंडदान, वट वृक्ष को दिया आशीर्वाद
दिवाली का हिंदू त्योहार या रोशनी का त्योहार 2,500 साल से अधिक पुराना है। यह हर साल दुनियाभर के हिंदू...
हनुमान जी (Hanuman ji) और अंगद जी (Angad ji) दोनों ही समुद्र लाँघने में सक्षम थे, फिर पहले हनुमान जी लंका क्यों गए? अंगद जी बुद्धि और बल में बाली के समान ही थे। समुद्र के उस पार जाना भी उनके लिए बिल्कुल सरल था। किन्तु वह कहते हैं कि लौटने में मुझे संशय है। आखिर कौन सा संशय था उन्हें? जानिए पूरी कथा।
सोमवार को कलश स्थापना के साथ ही नवरात्रि की शुरुआत हो गई। इस नवरात्रि मां दुर्गा के नौ रूपों की अलग-अलग तरीके से पूजा की जाएगी। आयुर्वेद में मां दुर्गा के नौ रूपों की अलग-अलग तरह से परिकल्पना की गई है। जमशेदपुर की आयुर्वेद एवं प्राकृतिक चिकित्सा विशेषज्ञ का कहना है कि ब्रह्माजी के दुर्गा कवच में वर्णित नवदुर्गा नौ विशिष्ट औषधियों में विराजमान है। आइये जानते हैं वो कौन सी औषधि हैं।
इस बार चैत्र नवरात्र पर वर्षों बाद दुर्लभ योग बन रहा है। नवरात्र की शुरुआत सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग में हो रही है।
सूर्यपुत्र शनिदेव (Shanidev) भगवान जी कहते हैं मैं गुरुओं का भी गुरु हूं और योद्धाओं का भी योद्धा हूं योगियों...
अनमोल कुमार माउंट आबू (mount abu) में अचलगढ़ दुनिया की इकलौती ऐसी जगह है, जहां भगवान शिव (Bhagwan Shiv) के...
महाशिवरात्रि भगवान शिव शंकर का दिन है। जहां सौंदर्य, सत्य और परोपकार है, वहां शिव हैं और, ऐसा कोई स्थान...
देवउठनी एकादशी का शुभ अवसर, जिसे प्रबोधिनी या देवोत्थान एकादशी के नाम से भी जाना जाता है, कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष में मनाया जाता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, इस साल देवउठनी एकादशी का दिन 12 नवंबर को मनाया जाएगा।
रामभक्त हनुमान (Hanuman ji) हमेशा ही अपने आराध्य देव भगवान श्री राम (Shri Ram) के समीप ही रहा करते थे और भगवान राम भी हनुमान जी को पुत्रवत प्रेम किया करते थे। हनुमान जी के कारण ही मृत्यु के देवता काल देव राम जी के पास आने से डरते थे।
पूर्णागिरी मंदिर काली नदी के तट पर स्थित है और इसे पूनागिरी के नाम से भी जाना जाता है। इन सभी पीठों में यह भक्ति पीठ, मलकागिरी, कालिकागिरी और हिमलागिरी प्रमुख स्थान रखती है। पूर्णागिरी पर्वत के उच्चतम बिंदु से, काली नदी को नेपाल से होते हुए देखा जा सकता है।






