गुजरात के बनासकांठा जिले में अंबाजी मंदिर (Ambaji Mandir) दुर्गा माता (Durga Mata) का सबसे लोकप्रिय मंदिर है। इस मंदिर के लिए भक्तों में इतनी अपार श्रद्धा है कि यहां विदेश में रहने वाले गुजराती भी मां अंबाजी जी के दर्शन करने के लिए आते हैं।
छपरा जिला मुख्यालय से महज दस किमी की दूरी पर स्थित पैराणिक गोदना, वर्तमान में रिविलगंज, के विषय में कम जानते होंगे। वस्तुत: यह क्षेत्र आरण्यक संस्कृति का प्रतिविम्ब है। घाघरा के तट पर यह स्थान ऋषि-मुनियों का साधना क्षेत्र रहा है। त्रेता युग में इसी स्थान पर महर्षि श्रृंगी के द्धारा कराए गए पुत्र्येष्टि यज्ञ के कारण ही प्रभु श्रीराम का जन्म हुआ था।
हनुमान जन्मोत्सव (Hanuman Janmotsav), जिसे हनुमान जयंती (Hanuman Jayanti) के रूप में भी जाना जाता है, भगवान हनुमान के जन्म को चिह्नित करने के लिए मनाया जाने वाला एक हिंदू त्योहार है, जिसे हिंदू पौराणिक कथाओं में शक्ति, भक्ति और वफादारी के प्रतीक के रूप में माना जाता है।
उत्तराखंड (Uttarakhand) राज्य के रुद्रप्रयाग (Rudraprayag) शहर से 3 किलोमीटर दूर प्राचीन कोटेश्वर महादेव मंदिर (Koteshwar Mahadev Mandir) स्थित है। इस मंदिर का निर्माण 14वीं शताब्दी में किया गया था।
Kamada Ekadashi: धर्मराज युधिष्ठिर कहने लगे कि हे भगवन्! मैं आपको कोटि-कोटि नमस्कार करता हूँ। अब आप कृपा करके चैत्र...
देहरादून स्थित मां संतला देवी मंदिर (Maa Santala Devi Mandir) भक्तों की आस्था का केंद्र है। मंदिर में शनिवार को भक्तों का जमावड़ा लगता है, माना जाता है कि हर शनिवार को मां संतला देवी एक पत्थर की मूर्ति में परिवर्तित हो जाती हैं।
हनुमान जी का जन्म 58 हजार 112 वर्ष पहले त्रेतायुग के अन्तिम चरण में चैत्र पूर्णिमा को मंगलवार के दिन चित्रा नक्षत्र और मेष लग्न के योग में सुबह 6.03 बजे आज के झारखण्ड राज्य के गुमला जिले के आंजन नाम के छोटे से पहाड़ी गाँव के एक गुफा में हुआ था।
‘गणेश टोक’ (Ganesh Tok) गंगटोक (Gangtok) में भगवान गणेश (Lord Ganesha) को समर्पित मंदिर है। गंगटोक से 6 किमी की दूरी पर स्थित यह मंदिर, ताशी व्यूपॉइंट के पास, गणेश टोक व्यू पॉइंट गंगटोक के सबसे लोकप्रिय आकर्षणों में से एक है।
दान से मंदिर को इस वर्ष कुल 18.90 करोड़ रुपये की आय हुई है। सबसे ज्यादा शीघ्र दर्शनम कूपन से मंदिर को इनकम हुई।
सूर्य देव ने देखा कि इतना सब के बाद भी समुद्र के जल स्तर में रत्ती भर की कमी नहीं आई थी और न ही स्वयं के तेज में। जबकि इस कार्य में सहयोगी हवा भी सोंधी महक से सुरभित हो गई थी।
बहुत कम लोग भगवान शिव भगवान शिव (Lord Shiva) के एक ऐसे अवतार के बारे में जानते होंगे जिन्होंने शनिदेव (Shanidev) पर प्रहार किया था। उसकी के कारण शनिदेव की गति मंद हो गई।
महावीर मदिर में चढ़ाया जाने वाला प्रसाद नैवेद्यम लोगों की आस्था और श्रद्धा का प्रतीक है। इसके स्वाद, शुद्धता और पवित्रता का हर व्यक्ति कायल है।











