देशभर में इस वर्ष कृष्ण जन्माष्टमी (Krishna Janmashtami) का पर्व आज 19 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जा रहा है। जन्माष्टमी के दिन कृष्ण मंदिरों की रौनक देखने लायक होती है। कान्हा के दर्शन के लिए मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश में एक ऐसा कृष्ण मंदिर भी है, जहां कान्हा के खिड़की से दर्शन मिलते हैं।
यह व्रत गतवैभव को प्राप्त करने के लिए किया जाता है । किसी के द्वारा बताने पर या अनंत का...
शिवपुराण के अनुसार त्रेतायुग में भगवान श्रीराम की सहायता करने और दुष्टों का नाश करने के लिए भगवान शिव ने...
सूर्यदेव (Surya Dev) अकेले एक ऐसे देवता जिनके साक्षात दर्शन हमें प्रतिदिन होते हैं। जिनके प्रताप से ही हम समय की खोज कर सके हैं। जिन्हें समस्त ग्रहों का राजा माना जाता है। जिन्हें आदित्य, भास्कर, मार्तण्ड आदि अनेक नामों से जाना जाता है।
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के बलरामपुर (Balrampur) जिले में देवी के 51 शक्तिपीठों (Shaktipeeth) में से एक पीठ स्थित है, जिसे मां पाटेश्वरी देवी मंदिर (Maa Pateshwari Devi Mandir) से जाना जाता है। यह मंदिर शिव और सती के प्रेम का प्रतीक माना जाता है।
बद्रीनाथ धाम (Badrinath Dham) अगर आप गए होंगे, तो आपने गौर किया होगा कि यहां शंख नहीं बजाया जाता। वजह वैज्ञानिक, पौराणिक और धार्मिक हर तरह से जुड़ी हुई हैं। आप भी जानिए बद्रीनाथ मंदिर (Badrinath Temple) में शंख न बजाने की क्या है वजह है।
माँ सिद्धिदात्री के निचले दाहिने हाथ में चक्र और ऊपरी दाहिने हाथ में शंख है। उनके निचले बाएँ हाथ में कमल का फूल है, और ऊपरी बाएँ हाथ में गदा है। उन्हें अक्सर कमल के फूल पर बैठे या शेर की सवारी करते हुए चित्रित किया जाता है, जो शक्ति और निडरता का प्रतीक है।
अगर इस मंदिर का प्रसादम चख लिया, तो आप जीवनपर्यंत भूखे नहीं रहेंगे तिरुवरप्पु कृष्णा...
झारखंड (Jharkhand) की राजधानी रांची (Ranchi) से 150 किमी दूरी इटखोरी (Itkhori) मेें सनातन, बौद्ध और जैन धर्म का समागम...
तमिलनाडु के पेरावोरानी के पास तंजावूर के विलनकुलम में अक्षयपुरीश्वर मंदिर (Akshayapureeswarar Temple) है। ये मंदिर भगवान शनि के पैर टूटने की घटना से जुड़ा हुआ है। इस मंदिर में शारीरिक रुप से परेशान और साढ़े साती में पैदा हुए लोग शनिदेव की विशेष पूजा के लिए आते हैं।
सनातन परम्परा के अनुसार हर वर्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की हस्त नक्षत्र युक्त तृतीया तिथि को हरतालिका तीज...
वैसे तो राधा जी (Radha Rani) के जन्म के बारे में अनेक कथाएं शास्त्रों में आती हैं, लेकिन ऐसा माना जाता है कि आज से करीब पांच हजार दो सौ वर्ष पूर्व मथुरा जिले के गोकुल-महावन कस्बे के निकट रावल गांव में भाद्र पद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि, अनुराधा नक्षत्र, मध्यान्ह काल 12 बजे और सोमवार के दिन पिता वृषभानु और माता कीर्तिदा की पुत्री के रूप में श्री राधिका जी ने जन्म लिया था।




