ये कहानी भगवान विष्णु (Lord Vishnu) के नरसिंह अवतार (Narsingh Avtaar) से जुड़ी हुई है। प्रह्लाद की रक्षा के लिए श्रीहरि ने नरसिंह अवतार धारण करके हिरण्यकशिपु का वध अपने पंजे से कर दिया। लेकिन भक्त पर हुए अत्याचार से नाराज नरसिंह पूरी सृष्टि के विनाश के लिए उतारु हो गए।
मकर संक्रांति पर इस बार दो तिथियों को लेकर लोग उलझन में हैं। हालांकि संक्रांति तब शुरू होती है जब सूर्य देव राशि परिवर्तन कर मकर राशि में पहुंचते हैं।
सनातन धर्म में मां लक्ष्मी (Maa Laxmi) को धन की देवी कहा जाता है। शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी को अर्पित किया गया है। कहा जाता है मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए शुक्रवार के दिन व्रत रखना चाहिए और पूरे विधि-विधान से माता लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए, जिससे उनका आशीर्वाद और उनकी कृपा आप पर बनी रहे।
राजा मननसिंह की हटधर्मिता के बाद रहषु भगत के बुलावे पर मां कमाख्या से चलकर कोलकाता (काली के रूप में...
महाशिवरात्रि पर घर में पारद शिवलिंग की स्थापना करें और उसकी पूजा करें। इसके बाद नीचे लिखे मंत्र का 108 बार जाप करें-
ऐं ह्रीं श्रीं ऊं नम: शिवाय: श्रीं ह्रीं ऐं
शनिदेव ने कोकिलावन धाम में तपस्या की, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें कोयल के रूप में वहां दर्शन दिए। साथ ही शनिदेव से कहा कि वे अब यहीं ठहर जाएं। अपने आराध्य की आज्ञा मानते हुए शनि वहीं विराजमान हो गए।
हिंदू पंचांग के अनुसार माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन बसंत पंचमी का त्यौहार मनाया जाता...
इस बार चैत्र नवरात्र पर वर्षों बाद दुर्लभ योग बन रहा है। नवरात्र की शुरुआत सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग में हो रही है।
नई दिल्ली: 19 नवम्बर, 2021 (28 कार्तिक, शक संवत 1943) को आंशिक चंद्र ग्रहण घटित होगा । भारत में चंद्रोदय...
सावन (Sawan) माह शिव जी को बेहद प्रिय है। सावन का पहला सोमवार 18 जुलाई को है। सावन के हर सोमवार का विशेष महत्व है। पुराणों के अनुसार महादेव को प्रसन्न करने के लिए सावन का माह सर्वोत्तम माना गया है।
योगिनी एकादशी 14 जून, बुधवार को है। भगवान श्रीहरि विष्णु को एकादशी की तिथि अत्यंत प्रिय होती है। इसलिए जो भी भक्त किसी भी एकादशी का व्रत करते हैं, उसका फल उन्हें कई गुना अधिक मिलता है।
पिंडदान की शुरुआत कब और किसने की, यह बताना उतना ही कठिन है जितना कि भारतीय धर्म-संस्कृति के उद्भव की कोई तिथि निश्चित करना। परंतु स्थानीय पंडों का कहना है कि सर्व प्रथम सतयुग में ब्रह्माजी ने पिंडदान किया था। महाभारत के 'वन पर्व' में भीष्म पितामह और पांडवों की गया यात्रा का उल्लेख मिलता है। श्रीराम ने महाराजा दशरथ का पिण्डदान गया में किया था।




