मान्यताओं के अनुसार कोई भी शुभ कार्य करने से पहले भगवान गणेश (Ganesh Bhagwan) की पूजा की जानी जरूरी है। भगवान गणेश सभी लोगों के दुखों को हरते हैं। काशी (Kashi) में जिसे खासतौर पर भगवान शिव की नगरी कहा जाता है, यह उनके पुत्र भगवान गणेश के लिए भी प्रचलित है। काशी में ही शिव जी के पुत्र भगवान गणेश अपने विशेष रूप में स्थापित हैं।
महर्षि वेद व्यास रचित महाभारत के मौसल पर्व में भगवान श्रीकृष्ण की मृत्यु और उनकी द्वारका नगरी के समुद्र में समा जाने का विवरण दिया गया है।
शनि, ग्रह व देवता दोनों रूप में पूजे जाते हैं। शनिदेव (Shanidev) व्यक्ति को उसके अच्छे व बुरे कर्मो का फल प्रदान करते हैं। इसी कारण इन्हें कर्म दंडाधिकारी का पद प्राप्त है। यह पद उन्हें भगवान शंकर से प्राप्त है।
मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम भक्त हनुमान जी (Hanuman ji) को लेकर कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। पौराणिक कथाओं में हनुमान जी का वानर रूप में वर्णन किया गया है। हनुमान जी की माता का नाम अंजनी और पिता का नाम केसरी था। हनुमान जी की माता इंद्र देवता के दरबार में अप्सरा थीं और उनका नाम पुंजिकस्थला था। कहा जाता है कि वह अभूतपूर्व सुंदरी और बहुत चंचल भी थीं।
भारत के धार्मिक स्थल विशेषकर मंदिर एक से बढ़कर एक रहस्य अपने में समेटे हुए हैं। ऐसा ही एक मंदिर है उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जनपद के पाटन गांव में सिरिया नदी के तट पर स्थित मां पाटेश्वरी का मंदिर (Maa Pateshwari Mandir)। इस मंदिर के कारण ही इस पूरे मंडल का नाम देवीपाटन पड़ा हुआ है।
कर्नाटक के उडुपी के हतियनगडी में आठवीं सदी का एतिहासिक श्री सिद्धि विनायक मंदिर (Siddhi Vinayak Temple) है। यह मंदिर कुंदापुर तालुक में बरहा नदी के पास स्थित है। यह ऐतिहासिक जगह देश-दुनिया भर के हिंदुओं के लिये एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है।
एकादशी व्रत (Ekadashi Vrat) के पुण्य के समान और कोई पुण्य नहीं है। जो पुण्य सूर्यग्रहण में दान से होता है, उससे कई गुना अधिक पुण्य एकादशी (Ekadashi) के व्रत से होता है । जो पुण्य गौ-दान सुवर्ण-दान, अश्वमेघ यज्ञ से होता है, उससे अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है।
एक बार श्री कृष्ण और अर्जुन (Arjun) कहीं जा रहे थे। रास्ते में अर्जुन ने श्री कृष्ण से पूछा- हे प्रभु! एक जिज्ञासा है मेरे मन में, अगर आज्ञा हो तो पूछूँ ? तब श्री कृष्ण जी (Krishna ji) ने कहा-अर्जुन! तुम मुझ से बिना किसी हिचक, कुछ भी पूछ सकते हो। तब अर्जुन ने कहा कि मुझे आज तक यह बात समझ नहीं आई है। कि दान तो मैं भी बहुत करता हूँ, परंतु सभी लोग सूर्य पुत्र कर्ण (Karan) को ही सब से बड़ा दानी क्यों कहते हैं?
वाराणसी (Varanasi) में काशी विश्वनाथ (Kashi Vishwanath) के अलावा मां दुर्गा (Maa Durga) का भी एक दिव्य और पुरातन मंदिर भी है। लाल पत्थरों से बने इस मंदिर में माता के कई स्वरूपों का दर्शन करने का सौभाग्य मिलता है। इसकी भव्यता ऐसी है कि कहा जाता है कि मंदिर परिसर में जाने वाले भक्त मां की प्रतिमा को देखकर मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। मंदिर में एक अलग तरह की सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह महसूस होता है।
जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तो इसे मकर संक्रांति (Makar Sankranti) कहा जाता है। मकर संक्रांति को बहुत शुभ दिन माना गया है। इसे उत्तरायण, पोंगल और खिचड़ी जैसे नामों से भी जाना जाता है। ज्यादातर ये त्योहार 14 या 15 जनवरी को मनाया जाता है। इस साल मकर संक्रांति 14 जनवरी को है अथवा 15 जनवरी को है, इसे लेकर लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
ब्रम्हा, विष्णु और महेश में देवाधिदेव शिव सबसे शक्तिशाली माने जाते हैं। इसी कारण महादेव को देवाधिदेव भी कहा जाता...
हनुमान जी के कई स्थानों पर पदचिह्न भी बताए जाते है। ऐसे में हनुमानजी के ये पैरों के निशान के दर्शन करना अपने आप में अद्भुत अनुभव होता है। आइए जानते हैं कहां-कहां भगवान हनुमानजी ने धरती पर अपने कदम रखे थे, जहां उनके पैरों के निशान बन गए। उनमें से कुछ प्रमुख पदचिह्नों के बारे में तस्वीरों सहित संक्षिप्त में जानें।











