ब्रम्हा, विष्णु और महेश में देवाधिदेव शिव सबसे शक्तिशाली माने जाते हैं। इसी कारण महादेव को देवाधिदेव भी कहा जाता...
हनुमान जी के कई स्थानों पर पदचिह्न भी बताए जाते है। ऐसे में हनुमानजी के ये पैरों के निशान के दर्शन करना अपने आप में अद्भुत अनुभव होता है। आइए जानते हैं कहां-कहां भगवान हनुमानजी ने धरती पर अपने कदम रखे थे, जहां उनके पैरों के निशान बन गए। उनमें से कुछ प्रमुख पदचिह्नों के बारे में तस्वीरों सहित संक्षिप्त में जानें।
देवताओं की सेना के सेनापति कार्तिकेय (Kartikeya) या मुरुगन भगवान (Lord Murugan) शिव और माता पार्वती के सबसे बड़े पुत्र हैं । हालांकि संपूर्ण भारत में ही कार्तिकेय की पूजा की जाती है
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत मे दो तरह की मंदिर निर्माण शैलियां है उत्तर भारत (नागर शैली) दक्षिण भारत (द्रविड़ शैली)। उत्तर भारत मे छत को मंदिर वास्तु की भाषा मे शिखर कहते है और दक्षिण भारत मे इसको विमान कहते है। दक्षिण भारत मे शिखर सिर्फ ऊपर रखे पत्थर को बोलते, जबकि उत्तर भारत मे सबसे ऊपर कलश रखा होता है। इसके अलावा इन से मिलती-जुलती कुछ और मंदिर निर्माण शैलियां भी होती है।
प्रथम पूज्य गणेशजी (Ganeshji) के प्राचीन मंदिरों में से एक मधुर महागणपति मंदिर (Mahaganapati Mandir) केरल में मधुरवाहिनी नदी के तट पर स्थित है। इसका इतिहास 10वीं शताब्दी का माना जाता है। प्रारंभ में यहां शिवजी का ही मंदिर था, लेकिन बाद में ये गणेशजी का मुख्य मंदिर बन गया। इस संबंध में क्षेत्र में कई मान्यताएं प्रचलित हैं।
शंकर भगवान (Bhagwan Shankar) की एक बहन भी थी अमावरी। जिसे माता पार्वती की जिद पर खुद महादेव ने अपनी माया से बनाया था। भगवान शिव और माता पार्वती का एक ही पुत्र था, जिसका नाम था कार्तिकेय।गणेश भगवान तो मां पार्वती ने अपने उबटन (शरीर पर लगे लेप) से बनाए थे।
कर्नाटक के उडुपी के हतियनगडी में आठवीं सदी का एतिहासिक श्री सिद्धि विनायक मंदिर (Siddhi Vinayak Temple) है। यह मंदिर कुंदापुर तालुक में बरहा नदी के पास स्थित है। यह ऐतिहासिक जगह देश-दुनिया भर के हिंदुओं के लिये एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है।
भगवान शिव को समर्पित श्री राजा राजेश्वर स्वामी मंदिर (Sri Raja Rajeswara Swamy Temple) के तेलंगाना के वेमुलावाड़ा में स्थित है। यह मंदिर प्राचीन और प्रसिद्ध शिव मंदिरों में से एक है। मंदिर के प्रमुख देवता स्थानीय रूप से राजन्ना के रूप में लोकप्रिय हैं। मुख्य देवता की मूर्ति नीला लोहिता शिव लिंगम के रूप में है। देवता के साथ ही श्री राजा राजेश्वरी देवी और सिद्धि विनायक की मूर्तियाँ हैं।
शनिदेव (Shanidev) ने अपनी साधना तपस्या द्वारा शिवजी को प्रसन्न कर अपने पिता सूर्य की भाँति शक्ति प्राप्त की और शिवजी ने शनि देव को वरदान मांगने को कहा। तब शनि देव ने प्रार्थना की कि युगों-युगों में मेरी माता छाया की पराजय होती रही हैं, मेरे पिता पिता सूर्य द्वारा अनेक बार अपमानित किया गया हैं।
हर मनुष्य के लिए आश्चर्य का विषय है कि जगन्नाथ पुरी (Jagannath Puri) के मंदिर में भगवान कृष्ण के साथ राधा क्यों नहीं हैं और दूसरा, तीनों भाई बहन की आंखें इतनी फैली हुई क्यों हैं? इस विषय में एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा इस प्रकार है।
देशभर में हनुमान जी (Hanuman ji) के कई चमत्कारी मंदिर है। इन मंदिरों में कहीं बजरंगबली (Bajrangbali) लेटे हुए, कहीं बैठे हुए तो कहीं उनकी सबसे ऊंची प्रतिमा देखी होगी। लेकिन गुजरात के द्वारका में हनुमान जी का एक अनोखा ही मंदिर है। इस मंदिर में हनुमान जी अपने पुत्र मकरध्वज के साथ विराजमान हैं। जी हां आपको जानकर आश्चर्य जरुर हुआ होगा, क्योंकि हनुमान जी तो बालब्रह्मचारी थे। जानिए, इस मंदिर से जुड़ी कुछ रोचक बातें।
कटारमल सूर्य मंदिर (Katarmal Surya Mandir) देश का प्राचीनतम सूर्य मंदिर है। यह पूर्वाभिमुखी है तथा उत्तराखण्ड (Uttarakhand) राज्य में अल्मोड़ा (Almora) जिले के अधेली सुनार नामक गॉंव में स्थित है। इसकी विशेषता है कि यहां पर सूर्य देव की मूर्ति किसी धातु या पत्थर से निर्मित नहीं, बल्कि एक बड़ के पेड़ की लकड़ी से बनी है। यह अपने आप में अद्भुत व अनोखी है। इस सूर्य मंदिर को “बड़ आदित्य मंदिर” (Aditya Mandir) भी कहा जाता है।










