देश में अनेक मंदिर ऐसे हैं, जो अपने अंदर तमाम अनसुलझे रहस्यों को समेटे हुए है। विज्ञान भी इसकी तह तक नहीं जा सका। ऐसा ही है छत्तीसगढ़ के गरियाबंद शहर से 12 किलोमीटर दूर हरी-भरी पहाड़ियों पर स्थित निराई माता मंदिर (Nirai Mata Mandir)।
वास्तुशास्त्र के दोष दूर करने के लिहाज से भगवान गणेश (Lord Ganesha) की प्रतिमा बेहद उपयोगी सिद्ध हो सकती है। नए घर में प्रवेश से लेकर उसमें रहते हुए आप कई तरह से गणेशजी की प्रतिमा का इस्तेमाल कर सकते है।
सूर्यदेव के रथ को संभालने वाले इन सात घोड़ों के नाम हैं- गायत्री, भ्राति, उस्निक, जगति, त्रिस्तप, अनुस्तप और पंक्ति। कहा जाता है कि यह सात घोड़े एक सप्ताह के सात दिनों को दर्शाते हैं। यह तो महज एक मान्यता है जो वर्षों से सूर्य देव के सात घोड़ों के संदर्भ में प्रचलित है लेकिन क्या इसके अलावा भी कोई कारण है, जो सूर्यदेव (Suryadev) के इन सात घोड़ों की तस्वीर और भी साफ करता है।
उत्तर भारत का तिरुपति के तौर पर विकसित किया जा रहा धाम को
भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए शास्त्रों में कई विधि-विधान बताए गए हैं। जिसमें भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, दूध अर्पित करने आदि का भी उल्लेख मिलता है। आइए जानें कि शिवलिंग पर दूध क्यों चढ़ाया जाता है और ऐसा करने से क्या होता है?
एक बार किसी ने भगवान विष्णु से पूछ दिया-महाराज! आपने नारद के चरित्र में कलंक क्यों लगवा दिया? क्योंकि नारद...
ऋषि कश्यप की कई पत्नियां थीं, जिनमें से दो वनिता और कद्रू थी। ये दोनों ही बहनें थी, जो एक दूसरे से ईर्ष्या रखती थी। दोनों के पुत्र नहीं थे तो पति कश्यप ने दोनों को पुत्र के लिए एक वरदान दे दिया। वनिता ने दो बलशाली पुत्र मांगे जबकि कद्रू ने हजार सर्प पुत्र रूप में मांगे जो कि अंडे के रूप में जन्म लेने वाले थे। सर्प होने के कारण कद्रू के हजार बेटे अंडे से उत्पन्न हुए और अपनी मां के कहे अनुसार काम करने लगे।
श्रीराम अवतार के समय हनुमान जी को स्वयं भगवान श्रीराम ने अमर होने का आशीर्वाद दिया था। इसी कारण हनुमानजी का प्रताप चारों युगों में रहा है और आगे भी रहेगा, क्योंकि वे अजर-अमर हैं। अंजनी सुत जब तक चाहें शरीर में रहकर इस धरती पर मौजूद रह सकते हैं।
उत्तराखंड (Uttarakhand) के हरिद्वार (Haridwar) में एक प्राचीन मां चंडी देवी मंदिर(Chandi Devi Mandir) है। मां चंडी देवी को चंडिका देवी के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर शक्ति स्वरुप मां चंडी देवी को समर्पित है। यहां माता खंभ के रूप में विराजमान है।
पुणे से 51 किमी दूर रंजनगांव में एक पौराणिक गणपति मंदिर है। हिन्दू धर्म ग्रंथों के मुताबिक इस स्थान पर...
उत्पन्ना एकादशी (Utpanna Ekadashi) का व्रत मार्गशीर्ष माह की कृष्ण पक्ष की एकादशी को रखा जाता है। इस साल यह व्रत 20 नवंबर को रखा जाएगा। ऐसी मान्यता है कि उत्पन्ना एकादशी का व्रत रखने से मनुष्यों के पिछले जन्म के पाप भी नष्ट हो जाते हैं। उत्पन्ना एकादशी व्रत के प्रभाव से जातक को संतान सुख, आरोग्य और जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति मिलती है। इस साल उत्पन्ना एकादशी का व्रत बेहद खास रहने वाला है। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार उत्पन्ना एकादशी पर एक नहीं बल्कि पांच-पांच शुभ योग बन रहे हैं।
इस मंदिर का निर्माण कांची मठ के श्री चंद्रशेखरेंद्र सरस्वती स्वामी की इच्छा पर किया गया था। मंदिर का अभिषेक 5 अप्रैल 1976 को अहोबिला मठ के 44वें गुरु वेदांत ढेसिका यतीन्द्र महाधेसिकन स्वामी की उपस्थिति में हुआ था।
