उत्पन्ना एकादशी (Utpanna Ekadashi) का व्रत मार्गशीर्ष माह की कृष्ण पक्ष की एकादशी को रखा जाता है। इस साल यह व्रत 20 नवंबर को रखा जाएगा। ऐसी मान्यता है कि उत्पन्ना एकादशी का व्रत रखने से मनुष्यों के पिछले जन्म के पाप भी नष्ट हो जाते हैं। उत्पन्ना एकादशी व्रत के प्रभाव से जातक को संतान सुख, आरोग्य और जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति मिलती है। इस साल उत्पन्ना एकादशी का व्रत बेहद खास रहने वाला है। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार उत्पन्ना एकादशी पर एक नहीं बल्कि पांच-पांच शुभ योग बन रहे हैं।
इस मंदिर का निर्माण कांची मठ के श्री चंद्रशेखरेंद्र सरस्वती स्वामी की इच्छा पर किया गया था। मंदिर का अभिषेक 5 अप्रैल 1976 को अहोबिला मठ के 44वें गुरु वेदांत ढेसिका यतीन्द्र महाधेसिकन स्वामी की उपस्थिति में हुआ था।
कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरू में स्थित है प्रसिद्ध पंचमुखी गणेश मंदिर (Panchmukhi Ganesh Temple)। यहां पर भगवान गणेश पंचमुखी अवतार में विराजमान है। इसलिए इस मंदिर को पंचमुखी गणेश मंदिर कहा जाता है। यह मंदिर देश के अन्य गणेश मंदिरों से काफी अलग है।
तमिलनाडु के तंजावुर शहर में स्थित भगवान शिव का प्रसिद्ध बृहदेश्वर मंदिर (Brihadeeswarar Temple) है। एक हजार वर्ष पुराने बृहदेश्वर मंदिर को UNESCO World Heritage Site लिस्ट में विश्व धरोहर घोषित किया है। यह दुनिया में पहला और एकमात्र ऐसा मंदिर है जो पूरी तरह ग्रेनाइट पत्थरों से बना हुआ है।
जगत के पालनहार भगवान विष्णु (Lord Vishnu) सृष्टि को रक्षा करने के लिए कई बार धर्म और मर्यादा का भी उल्लंघन करना पड़ा, यहां तक कि इन्हें भगवान शिव (Lord Shiva) को धोखा और एक स्त्री के साथ छल से संबंध भी बनाने पड़े। जानिए ऐसी घटनाएं, जिनमें सृष्टि के कल्याण के लिए उन्होंने छल का सहारा लिया।
इस मंदिर में मां जागृत अवस्था में विराजमान है। माँ के दर्शन के लिए लिए टिकारी शहर, इसके आस पास के गावँ के तथा टिकारी से बाहर रहने वाले लोग भी आते रहते हैं।
एक बार किसी ने भगवान विष्णु से पूछ दिया-महाराज! आपने नारद के चरित्र में कलंक क्यों लगवा दिया? क्योंकि नारद...
अंगद ने रामचन्द्र जी के विश्वास को बनाए रखा। उनकी आज्ञा लेकर रावण के दरबार में पहुंचे। रावण के पास जाकर उन्होंने भगवान राम की वीरता और शक्ति का बखान करने के साथ ही रावण को चुनौती भी दे डाली कि अगर लंका में कोई वीर हो तो मेरे पांव को जमीन से उठा कर दिखा दे।
हनुमान चालीसा में जिक्र है कि अगर आप बहुत अधिक संकट में हैं तो 8 मंगलवार हनुमान जी के दर्शन कर ले तो आपके सारे संकट दूर हो जाएंगे। जोधपुर के एक प्राचीन पंचमुखी हनुमान मंदिर हैं। इस मंदिर की विशालकाय प्रतिमा के बारे में कहा जाता है कि यह स्वयंभू हैं और पंचमुखी हनुमान (Swayambhu Panchmukhi Hanuman) जी के दर पर जो भी मत्था टेक ले उसके सभी कष्ट व पीड़ा हनुमान जी हर लेते हैं। इस मंदिर में श्रद्धालु साल के सालों भी आते हैं, लेकिन मंगलवार और शनिवार को श्रद्धालुओं का भारी जमावड़ा रहता है।
ज्योतिष शास्त्र में शनिदेव (Shanidev) को कर्मफल दाता कहा जाता है। वहीं लाल किताब में शनि को पापी ग्रह का दर्जा दिया गया है। राहु और केतु इसके सेवक हैं। यह तीनों ग्रह एक साथ मिलकर कुंडली में खतरनाक स्थिति बनाते हैं। कुंडली में शनि शुभ योग में हो तो जातक को शुभ फल मिलते हैं।
हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को भगवान विष्णु के शालीग्राम स्वरूप और माता तुलसी का विवाह किया जाता है। इस दिन को देवउठनी एकादशी कहा जाता है। देवउठनी एकादशी (Dev Uthani Ekadashi) के दिन ही भगवान विष्णु चार महीने बाद योगनिद्रा से जागते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीहरि योग निद्रा से जागने के बाद सर्वप्रथम हरिवल्लभा यानी माता तुलसी की पुकार सुनते हैं। तुलसी विवाह के साथ ही विवाह के शुभ मुहूर्त भी शुरू हो जाते हैं।
उत्तराखंड की धर्मनगरी हरिद्वार में प्रसिद्ध माँ चंडी देवी का मंदिर (Chandi Devi Mandir) है। देश में मौजूद 52 पीठों में से एक नील पर्वत पर स्थित इस मंदिर में मां खंभ के रूप में विराजमान है। वैसे तो यहां साल भर भक्तों का तांता लगा रहता है, लेकिन मान्यता है की नवरात्र के दौरान जो भक्त माता के इस दरबार में सच्चे मन प्रार्थना करता है, मां उसकी हर मन्नत पूरी करती है।
