हिंदू धर्मग्रंथों में धन समृद्धि की देवी लक्ष्मी को बताया गया है। इन्हें भगवान विष्णु की पत्नी और आदिशक्ति भी कहा जाता है। आखिर मां लक्ष्मी की पूजा में कमल का पुष्प विशेष रूप से क्यों चढ़ाया जाता है। माता लक्ष्मी की मूर्ति और चित्र में लोगों ने देखा होगा कि देवी लक्ष्मी कमल के पुष्प पर विराजमान रहती है। आज हम जानेंगे कि आखिर क्या कारण है कि माता लक्ष्मी को कमल का पुष्प प्रिय है और वे उन पर विराजित हैं।
आज मां दुर्गाजी की नौवीं शक्ति सिद्धिदात्री की आराधना का दिन हैं। ये सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली...
अक्टूबर का महीना शुरू हो गया है और इस महीने से त्योहारों का सिलसिला भी शुरू हो गया है। हिन्दू पंचांग के अनुसार इस समय आश्विन मास का शुक्ल पक्ष चल रहा है। कार्तिक का महीना 9 अक्टूबर को अश्विन की पूर्णिमा के बाद शुरू होगा। दशहरा, दिवाली, करवाचौथ जैसे कई त्योहार अक्टूबर 2022 में मनाए जाएंगे, जो इस माह को धार्मिक दृष्टिकोण से बहुत महत्वपूर्ण महीना बनाते हैं।
यह देश में एकमात्र ऐसा स्थान है जो दुर्गा सप्तशती के वर्णन से मेल खाता है। कल्याण की धार्मिक किताब के शक्ति अंक ने यह भी पुष्टि की है कि यह विशेष स्थान एक शक्तिपीठ है। हरिद्वार (Haridwar) में कनखल (Kankhal) में एक नदी के साथ लगे दुर्गा मंदिर को भी, इन दो लोगों की पूजा स्थल माना जाता है। हालांकि, दुर्गा की मूर्ति वहाँ मिट्टी से बनी नहीं है हालांकि दक्षिणा प्रजापति का मंदिर कनखल में स्थित है।
सोमवार को कलश स्थापना के साथ ही नवरात्रि की शुरुआत हो गई। इस नवरात्रि मां दुर्गा के नौ रूपों की अलग-अलग तरीके से पूजा की जाएगी। आयुर्वेद में मां दुर्गा के नौ रूपों की अलग-अलग तरह से परिकल्पना की गई है। जमशेदपुर की आयुर्वेद एवं प्राकृतिक चिकित्सा विशेषज्ञ का कहना है कि ब्रह्माजी के दुर्गा कवच में वर्णित नवदुर्गा नौ विशिष्ट औषधियों में विराजमान है। आइये जानते हैं वो कौन सी औषधि हैं।
शास्त्रों में नौ के आंकड़े को पूर्णांक व शुभ माना जाता है, इसलिए पूजा विधि में नौ ग्रहों की स्थापना होती है। रंग भी नौ हैं जिन्हें नवरंग कहा जाता है। श्रीराम ने शबरी को नवधा (नौ प्रकार) भक्ति का ज्ञान दिया था। नौ रसों का भी जीवन में बड़ा महत्व है। यहां हम माता के नौ रूपों को नौ रंगों में प्रस्तुत कर रहे हैं।
दशहरा (Dussehra) केवल त्योहार ही नहीं, बल्कि इसे कई बातों का प्रतीक भी माना जाता है। इस त्योहार के साथ कई धार्मिक मान्यताएँ व कहानियाँ भी जुड़ी हुई है। आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को दशहरा या विजयदशमी (Vijayadashami) के रूप में मनाया जाता है जो हिन्दू धर्म के बड़े त्योहारों में से एक है।
बिहार की राजधानी पटना में स्थित पटन देवी मंदिर (Patan Devi Mandir) शक्ति उपासना का प्रमुख केंद्र माना जाता है। देवीभागवत और तंत्रचूड़ामणि के अनुसार, सती की दाहिनी जांघ यहीं गिरी थी. नवरात्र के दौरान यहां काफी भीड़ उमड़ती है। सती के 51 शक्तिपीठों में प्रमुख इस उपासना स्थल में माता की तीन स्वरूपों वाली प्रतिमाएं विराजित हैं।
मां तारा देवी और मंदिर की स्थापना कब और किसने किया किसी को कोई जानकारी नही है। गाव के बुजुर्ग भी इस संबंध में कुछ नही जानते। कच्ची मिट्टी और गदहिया ईट से निर्मित मंदिर के गर्भ गृह की दीवार 4-5 फीट मोटी है। गर्भ गृह की सुन्दर #नक्काशिया मंदिर में प्रवेश करने वाले श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है।
बिहार के दरभंगा जिले में मां काली का यह भव्य मंदिर मौजूद है, जिन्हें यहां भक्त श्यामा माई (Shyama Mai) के नाम से पुकारते हैं। इस मंदिर के निर्माण की कहानी जिसे सुनकर सब हैरान हो जाते हैं। मां काली का यह मंदिर दरभंगा राज परिवार के महान साधक महाराज रामेश्वर सिंह की चिता पर बना है।
हमारे सनातनधर्म में कलश स्थापन का विशेष महत्व है। प्रत्येक शुभ कार्य में तथा छोटे से छोटे व वृहद् से वृहद् पूजनकर्म व अनुष्ठान में कलश स्थापन किया जाता है, और नवरात्रि में तो इसका अपना एक अलग हीं महत्व है।
शारदीय नवरात्रि का नौ दिवसीय पावन पर्व सोमवार 26 सितंबर 2022 को घटस्थापना के साथ शुरू होगा। नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है।
