पटन देवी भी दो हैं- छोटी पटन देवी और बड़ी पटन देवी, दोनों के अलग-अलग मंदिर हैं। पटना की नगर रक्षिका भगवती पटनेश्वरी (Pataneshwari) हैं जो छोटी पटन देवी के नाम से भी जानी जाती हैं। यहां मंदिर परिसर में मां महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती की स्वर्णाभूषणों, छत्र व चंवर के साथ विद्यमान हैं। लोग प्रत्येक मांगलिक कार्य के बाद यहां जरूर आते हैं। इस मंदिर के पीछे एक बहुत बड़ा गड्ढा है, जिसे ‘पटनदेवी खंदा’ कहा जाता है।
मां लक्ष्मी के रूप में मां त्रिपुर सुंदरी यहां विराजती हैं, यहां है एकमात्र शक्तिपीठ जहां होती है गुप्त साधना
यह मंदिर तमिलनाडु के तिरुवरुर जिले के शहर कुटनूर में स्थित है। कूटनूर से करीब 3 किमी दूर तिलतर्पण पुरी है। जहां आदि विनायक मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र है। इस विनायक मंदिर में श्री गणेश की नरमुखी प्रतिमा यानी इंसान स्परुप की पूजा की जाती है।
शरभ अवतार ब्रह्मांड की रक्षा के लिए भगवान शिव (Bhagwan Shiv) द्वारा लिया गया सबसे शक्तिशाली अवतार था। माना जाता हैं की शरभ अवतार का पूजा-पाठ करने से भाग्यशाली होने, नुकसान से बचाव सहित विभिन्न विवादों में भी जीत मिलती है।भगवान शिव के इस अवतार का उद्देश्य भगवान विष्णु के भयंकर और उग्र नरसिंह अवतार को काबू करना था।
शनि का श्याम वर्ण को देखकर सूर्य ने अपनी पत्नी छाया पर यह आरोप लगाया कि शनि मेरा पुत्र नहीं...
भारत में अनेक प्राचीन मंदिर है और हर मंदिर की एक चमत्कारिक कथा हैं। इन मंदिरों का जिक्र ग्रंथों में भी मिलता है। ऐसा ही एक मंदिर तमिलनाडु के अलनगुड़ी में स्थित है। इस मंदिर का विशेष महत्व है। इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि इस पावन स्थान पर देवगुरु बृहस्पति ने भगवान शिव की अराधना करके नवग्रहों में प्रथम स्थान का आशीर्वाद पाया था।
मंदिर परिसर में सूर्यदेव के अलावा शिव-पार्वती, विष्णु, भैरव, दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती आदि के भी छोटे-छोटे मंदिर हैं। सूर्य मंदिर के आधार पर इस गांव को आदित्यगांव भी कहा जाता है। मंदिर में लगी सूर्य की मूर्ति सबसे बड़ी है। इस मूर्ति में भगवान सूर्यनारायण सात अश्वों के एक चक्रीय रथ पर सुखासन में बैठे हैं जिनके दोनों हाथ कंधे तक उठे हैं।
मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले में नरसिंहगढ़ से 15 किलोमीटर दूर स्थित भगवान विष्णु का साका श्याम मंदिर (Saka Shyam Mandir) काफी प्रसिद्ध और प्राचीन माना जाता है। इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां भगवान विष्णु के दस अवतार एक साथ मौजूद है। जिनका एक अलग ही महत्व है।
पूरी दुनिया में ताजनगरी के नाम से मशहूर आगरा (Agra) शहर में एक ऐसा दिव्य और चमत्कारी हनुमान मंदिर (Hanuman Mandir) है जो करीब 500 साल पुराना है। इस मंदिर को लंगड़े की चौकी के नाम से जाना जाता है। भगवान हनुमान का ये चमत्कारी मंदिर मुगलकालीन है। सिविल लाइंस में मौजूद इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि ये मंदिर अकबर के काल से ही मौजूद है।
राजस्थान के झुंझनूं जिले से 70 किलोमीटर दूर आड़ावल पर्वत के उदयपुरवाटी के कस्बे में लोहार्गल (Lohargal) स्थित सूर्य मंदिर (Surya Mandir) को भगवान सूर्य (Bhagwan Surya) का घर माना जाता है। इसका संबंध पांडवों से जुड़ा हुआ है। इस तीर्थ स्थल को पुष्कर (Pushkar) तीर्थ (Pushkar) के सभी तीर्थों में से मुख्य तीर्थ स्थल माना जाता है।
छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के महासमुंद (Mahasamund) जिले में एक ऐसी जगह है, जिसके बारे में कहा जाता है कि वहां महाबली भीम और राक्षसी हिडिंबा का विवाह हुआ था। इस स्थान पर माता खल्लारी (Khallari Mata) का मंदिर है, जिनके दर्शन के लिए देश के कोने-कोने से लोग पहुंचते हैं। महासमुंद जिले में शहर से करीब 24 किलोमीटर दूर स्थित पहाड़ियों पर माता खल्लारी का मंदिर है।
कोंकण समुद्र तट पर श्री गणेश का एक विशाल मंदिर स्थापित है। मंदिर में भक्तों का तांता सालभर लगा रहता है। गणेशोत्सव के दौरान तो यहां की रौनक आकर्षण का केंद्र होती है। यहां स्थित स्वयंभू गणेश मंदिर पश्चिम द्वारदेवता के रूप में भी प्रसिद्ध हैं। गणेश जी के इस प्राचीन मंदिर में लोग गणपति का आशीर्वाद लेने दूर-दूर से आते हैं और प्रसन्न होकर जाते हैं।
