भगवान शिव (Bhagwan Shiva) के तीसरे नेत्र के बारे में तो सभी जानते हैं कि जब भोलेनाथ (Bholenath) ने अपना...
देश के अलग-अलग भागों में स्थित भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग (Jyotirlinga) में से सबसे खास है श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग (Mahakaleshwar Jyotirlinga)। इन्हें द्वादश ज्योतिर्लिंग (Dwadash Jyotirlinga) में से एक कहा गया है। इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन, पूजन, आराधना से भक्तों के जन्म-जन्मांतर के सारे पाप समाप्त हो जाते हैं। वे भगवान शिव की कृपा के पात्र बनते हैं। यह परम पवित्र ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित है।
आप पद्मनाभ स्वामी मंदिर में स्थापित श्री विष्णु की प्रतिमा की तस्वीर के दर्शन अवश्य करे। इसके पीछे मान्यता है कि अगर जिसने पद्मनाभ स्वामी मंदिर में श्री विष्णु भगवान जी के दर्शन कर लिए, तो उसपर पूरी जिंदगी विष्णु भगवान की कृपा बनी रहेगी और धन की कमी नहीं रहेगी।
शनि के व्रत में श्रद्धा-भक्ति तथा पूर्ण समर्पण भाव सहित स्वयं के कष्ट निवारण का आग्रह मन ही मन करना चाहिए। व्रत करने वाले स्त्री-पुरुष को चाहिए कि शनिवार को प्रात:काल स्नान कर सर्वप्रथम देव, ऋषि तथा पितृ तर्पण करें। पीपल अथवा शमी वृक्ष के नीचे भक्तिपूर्वक वेदी बनाकर उसे गौ के गोबर से लीप देना चाहिए।
इस मंदिर को पशुपतिनाथ मंदिर (Pashupatinath Temple) के नाम से भी जाना जाता है चूंकि रुद्रनाथ मंदिर के अन्य मंदिरों से अलग है, इसलिए दूर दूर से लोग इस मंदिर के दर्शन करने आते हैं। जहां शिव जी के लिंग रूप की पूजा होती है वहीं इस मंदिर में केवल उनके मुख की पूजा होती है।
विवाह के समय ब्रह्मवेत्ता मुनियों के निर्देश पर शिव-पार्वती ने गणपति की पूजा संपन्न की। कोई व्यक्ति संशय न करें, क्योंकि देवता (गणपति) अनादि होते हैं।
सोने की लंका पार्वती जी ने ही बनवाई थी, जानें पूरी गाथा
श्री चिंताहरण गणेश जी की ऐसी अद्भुत और स्वयंभू अलौकिक प्रतिमा देश में शायद ही कहीं होगी। भक्त की इच्छा पूर्ण करने वाले, इच्छामण, सिद्धि देने वाले सिद्धिविनायक के साथ समस्त चिंता को दूर करने वाले चिंतामण गणेश जी विराजमान है। इनका श्रृंगार सिंदूर से किया जाता है।
स्कंद पुराण के अनुसार, एक बार माता पार्वती (Mata Parvati) के पसीने की बूंद मंदराचल पर्वत पर गिर गई और उससे बेल का पेड़ निकल आया। चूंकि माता पार्वती के पसीने से बेल के पेड़ का उद्भव हुआ।
ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, भगवान शिव अपनी शरण में आए दैत्य माली-सुमाली की दारुण व्यथा सुनकर अत्यंत क्रोधित हुए। उन्होंने कश्यप नंदन सूर्य पर अपने त्रिशूल से प्रहार कर दिया। उस समय संपूर्ण लोकों को प्रकाशित करने वाले सूर्य देव अपने सात घोड़ों के रथ पर विराजमान थे। वह भोलेनाथ का प्रहार सहन नहीं कर पाए और रथ से नीचे गिर कर अचेत हो गए। उनके गिरते ही संपूर्ण सृष्टि अंधकार में डूब गई।
यदि कोई भक्त सावन के मंगलवार के दिन पर भगवान हनुमान की पूजा सच्ची श्रद्धा से करता है तो उसे विशेष फल की प्राप्ति होती है। इस दिन हनुमानजी की पूजा-आराधना से देवाधिदेव भगवान शिव की भी कृपा प्राप्त होती है।
भगवान के हरिहर स्वरूप का क्या है रहस्य? क्या है भगवान के ‘हरिहर अवतार’ का प्रसंग? शैव और वैष्णवों में आपसी मतभेद मिटाने के लिए भगवान शिव और विष्णु ने किस तरह लीला कर संसार को संदेश दिया कि परमात्मा एक ही है, चाहे किसी भी मार्ग से उसकी उपासना की जाए।
