भगवान शिव की बात सुनकर पार्वती मुस्कुरा उठी और कहा कि प्रभु आपकी इच्छा को पूर्ण करने के लिए मैं अवश्य मृत्यु लोक में पुरुष के रूप में अवतरित होऊंगी। आपकी प्रसन्नता के लिए मैं पृथ्वी पर वासुदेव के घर पुरुष के रूप में जन्म लूंगी, लेकिन महादेव आपको भी मेरी प्रसन्नता का ध्यान रखना होगा।
पुराणों में वर्णन है कि एक बार यमराज की मृत्यु हुई थी। यमराज बड़े भयानक रूप के देवता है, जो...
राम और रावण युद्ध के बाद जब प्रभु श्रीराम अयोध्या (Ayodhya) लौट आए तो उन्होंने अश्वमेध यज्ञ का आयोजन कराया।...
भद्रा पृथ्वी पर नहीं पाताल लोक में, प्रतिपदा तिथि में नहीं बांधी जाती राखी
देवाधिदेव महादेव शिव को भगवान विष्णु (Bhagwan Vishnu) का आराध्य और श्री हरि विष्णु (Shri Hari Vishnu) को देवाधिदेव महादेव (Mahadev) का आराध्य बताया जाता रहा है। भगवान विष्णु अगर जगत का पालन करते हैं तो भगवान शिव (Bhagwan Shiv) इस संसार का संहार करते हैं। दोनों में कोई न बड़ा है और न ही छोटा है।
वैसे तो देवाधिदेव शिव के कई प्राचीन मंदिर हैं, लेकिन संगम के नजदीक अरैल स्थित शूलटंकेश्वर महादेव मंदिर सूर्यदेव से संबंधित है। शिवपुराण और स्कन्द पुराण में इस मंदिर का वर्णन शूलटंकेश्वर महादेव मंदिर के नाम से किया गया है। सबसे खास बात यह है इस मंदिर में दर्शन और पूजा करने से भगवान शिव के साथ ही सूर्यदेव भी प्रसन्न होकर भक्तों को आशीर्वाद देते हैं।
धार्मिक मान्यताओं में दंड के अधिकारी माने जाने वाले शनिदेव के बारे में कहा जाता है कि जिस पर भी शनि की तिरछी नजर पड़ जाए वह उनके प्रकोप से बच नहीं सकता। यहां तक कि स्वयं देवाधिदेव महादेव भी उनके प्रकोप से बच नहीं सके। आइए जानते हैं क्या है शनिदेव और महादेव की यह कहानी और किसने बनाया शनिदेव को दंड का अधिकारी।
यह स्थान उत्तर प्रदेश के कानपुर के ग्रामीण क्षेत्र बांका छतरपुर, शिवराजपुर में बाबा खेरेश्वर धाम के नाम से स्थित है। कहते हैं कि अमर अश्वत्थामा आज भी यहां नित्य शिव उपासना करने आते हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार सावन के बुधवार को भगवान गणेश की पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है। इस दिन विधि विधान से श्री गणेश की पूजा करने पर वे भक्तों के कष्टों को मिटाकर उनकी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
सनातन धर्म में मां लक्ष्मी (Maa Laxmi) को धन की देवी कहा जाता है। शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी को अर्पित किया गया है। कहा जाता है मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए शुक्रवार के दिन व्रत रखना चाहिए और पूरे विधि-विधान से माता लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए, जिससे उनका आशीर्वाद और उनकी कृपा आप पर बनी रहे।
महाभारत में सैकड़ों पात्रों, स्थानों, घटनाओं तथा विचित्रताओं व विडंबनाओं का वर्णन है। प्रत्येक हिंदू के घर में महाभारत महाकाव्य होना चाहिए। महाभारत में कई रहस्य भरे हुए हैं। महाभारत युद्ध में 8 और 18 संख्या का बहुत महत्व है। आओ जानते हैं 8 और 18 अंक का महाभारत में क्या रहस्य है।
माना जाता है कि इस स्थान का नाम तीन पशुओं श्री यानी मकड़ी, काल यानी सर्प और हस्ती यानी हाथी के नाम पर किया गया है। कहा जाता है कि तीनों ने ही यहां पर भगवान शिव की आराधना करके मुक्ति पाई थी। मकड़ी ने शिवलिंग पर तपस्या करके जाल बनाया, सांप ने शिवलिंग पर लिपटकर आराधना की और हाथी ने शिवलिंग को जल से स्नान करवाया था।
