सूर्य और चंद्र इस पृथ्वी के साक्षात देवता हैं जो हमें प्रत्यक्ष स्वरूप में दिखाई देते हैं। वेदों में सूर्य...
भगवान शिव (Lord Shiva) के मस्तक पर गंगा के विराजमान होने की घटना का संबंध राजा भगीरथ से माना जाता है। कथा है कि भगीरथ ने अपने पूर्वज सगर के पुत्रों को मुक्ति दिलाने के लिए गंगा को स्वर्ग से पृथ्वी पर उतारा था। लेकिन इस कथा के पीछे कई कथाएं हैं जिनसे भगीरथ का प्रयास सफल हुआ।
करवा चौथ केवल उपवास के बारे में नहीं है - यह पति-पत्नी के बीच विश्वास, धैर्य, प्रेम और भावनात्मक जुड़ाव के बारे में है। यह वह त्योहार है जो जोड़ों को याद दिलाता है कि सच्चे प्यार का मतलब सिर्फ़ अपने लिए नहीं, बल्कि एक-दूसरे की भलाई के लिए प्रार्थना करना है।
कटारमल सूर्य मंदिर (Katarmal Surya Mandir) देश का प्राचीनतम सूर्य मंदिर है। यह पूर्वाभिमुखी है तथा उत्तराखण्ड (Uttarakhand) राज्य में अल्मोड़ा (Almora) जिले के अधेली सुनार नामक गॉंव में स्थित है। इसकी विशेषता है कि यहां पर सूर्य देव की मूर्ति किसी धातु या पत्थर से निर्मित नहीं, बल्कि एक बड़ के पेड़ की लकड़ी से बनी है। यह अपने आप में अद्भुत व अनोखी है। इस सूर्य मंदिर को “बड़ आदित्य मंदिर” (Aditya Mandir) भी कहा जाता है।
इस प्राचीन भगवान जगन्नाथ मंदिर के गर्भगृह के शिखर पर एक पत्थर लगा है। मान्यता है कि मई-जून की चिलचिलाती धूप व गर्मी के बीच पत्थर से पानी की छोटी-बड़ी बूंदे मानसून आने के लगभग 20 दिन पहले ही टपकने लगती हैं।
बिहार की राजधानी पटना के हृदयस्थली अवस्थित उत्तर भारत का एक प्रसिद्ध मंदिर है। सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में शामिल पटना जंक्शन स्थित महावीर मंदिर (Mahavir Mandir) में राम नवमी (Ram Navami) के दिन अयोध्या की हनुमानगढ़ी के बाद सबसे ज्यादा भीड़ उमड़ती है।
मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम भक्त हनुमान जी (Hanuman ji) को लेकर कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। पौराणिक कथाओं में हनुमान जी का वानर रूप में वर्णन किया गया है। हनुमान जी की माता का नाम अंजनी और पिता का नाम केसरी था। हनुमान जी की माता इंद्र देवता के दरबार में अप्सरा थीं और उनका नाम पुंजिकस्थला था। कहा जाता है कि वह अभूतपूर्व सुंदरी और बहुत चंचल भी थीं।
शनिदेव (Shanidev) ने अपनी साधना तपस्या द्वारा शिवजी को प्रसन्न कर अपने पिता सूर्य की भाँति शक्ति प्राप्त की और शिवजी ने शनि देव को वरदान मांगने को कहा। तब शनि देव ने प्रार्थना की कि युगों-युगों में मेरी माता छाया की पराजय होती रही हैं, मेरे पिता पिता सूर्य द्वारा अनेक बार अपमानित किया गया हैं।
शास्त्रों में नौ के आंकड़े को पूर्णांक व शुभ माना जाता है, इसलिए पूजा विधि में नौ ग्रहों की स्थापना होती है। रंग भी नौ हैं जिन्हें नवरंग कहा जाता है। श्रीराम ने शबरी को नवधा (नौ प्रकार) भक्ति का ज्ञान दिया था। नौ रसों का भी जीवन में बड़ा महत्व है। यहां हम माता के नौ रूपों को नौ रंगों में प्रस्तुत कर रहे हैं।
सनातन धर्म में भगवान विश्वकर्मा को निर्माण का देवता माना जाता है। इंजीनियरिंग और कला के देवता भगवान विश्वकर्मा जयंती...
चैत्र नवरात्रि को वसंत नवरात्रि के रूप में भी जाना जाता है जो सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है...
माँ कात्यायनी को अक्सर शेर पर सवार, चार भुजाओं वाली एक उग्र और शक्तिशाली देवी के रूप में चित्रित किया गया है। उन्हें आमतौर पर एक हाथ में तलवार और दूसरे हाथ में कमल का फूल पकड़े हुए दिखाया जाता है, जबकि अन्य दो हाथ सुरक्षा और वरदान देने की मुद्रा में होते हैं।







