एक बार गणेशजी ने भगवान शिवजी से कहा-पिताजी आप यह चिताभस्म लगाकर, मुण्डमाला धारणकर अच्छे नहीं लगते। मेरी माता गौरी...
एक बार लक्ष्मीजी (Laxmiji) , पार्वतीजी (Parvatiji) और सरस्वतीजी (Saraswatiji) को अपने पातिव्रत्य पर गर्व हो गया। भगवान को गर्व सहन नहीं होता है। उन्होंने इन तीनों के गर्वहरण के लिए एक लीला करने की सोची । इस कार्य के लिए उन्होंने नारदजी के मन में प्रेरणा उत्पन्न की।
हनुमानजी रामचन्द्र जी को उदास देख उनके पास आये तथा उदासी का कारण पूछा। तब श्रीरामजी ने पूरी बात उन्हें बताई।
एक दिन आकाश में विचरण करते हुए सूर्यदेव ने काशी में भगवान विष्णु को महादेव विश्वनाथजी की पूजा करते हुए...
भगवान शंकर (विश्वनाथ) की अर्धांगिनी हैं माता अन्नपूर्णा । माता पार्वती ही सृष्टिकाल में महामाया, पालन करते समय अन्नपूर्णा और...
राम और रावण युद्ध के बाद जब प्रभु श्रीराम अयोध्या (Ayodhya) लौट आए तो उन्होंने अश्वमेध यज्ञ का आयोजन कराया।...
एक बार गणेशजी ने भगवान शिवजी से कहा-पिताजी आप यह चिताभस्म लगाकर, मुण्डमाला धारणकर अच्छे नहीं लगते। मेरी माता गौरी...
जिन पर माता लक्ष्मी की कृपा हो जाती है वह धन धान्य से परिपूर्ण हो जाता है। हर कोई उनका...
जब भगवान श्री कृष्ण (Lord Krishna) अपने बाल्यावस्था में थे। उस समय ब्रह्मा जी को पता चला कि भगवान विष्णु स्वयं श्री कृष्ण के रूप में पृथ्वी पर अवतरित हुए हैं, तो उनके मन में श्री कृष्ण के दर्शन करने का विचार आया। वह ब्रह्मलोक से पृथ्वी पर आए और देखा कि अपने सिर पर मोर मुकुट को धारण किए एक बालक गायों और ग्वालों के साथ मिट्टी में खेल रहा है।
अनमोल कुमार जब-जब मनुष्य या देवताओं पर किसी तरह का संकट आया तब-तब भगवान विष्णु अवतार लेकर रक्षा की है।...
ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, भगवान शिव अपनी शरण में आए दैत्य माली-सुमाली की दारुण व्यथा सुनकर अत्यंत क्रोधित हुए। उन्होंने कश्यप नंदन सूर्य पर अपने त्रिशूल से प्रहार कर दिया। उस समय संपूर्ण लोकों को प्रकाशित करने वाले सूर्य देव अपने सात घोड़ों के रथ पर विराजमान थे। वह भोलेनाथ का प्रहार सहन नहीं कर पाए और रथ से नीचे गिर कर अचेत हो गए। उनके गिरते ही संपूर्ण सृष्टि अंधकार में डूब गई।
भगवान शिव कितने भोले हैं यह तो...


