उत्तराखंड (Uttarakhand) पिथौरागढ़ (Pithoragarh) जिला से करीब 90 किलोमीटर दूर गंगोलीहाट के भुवनेश्वर गांव में पाताल भुवनेश्वर गुफा (Patal Bhubaneswar Cave) स्थित है। यह गुफा समुद्र तल से 1350 किलोमीटर की ऊंचाई पर है। यह गुफा किसी आश्चर्य से कम नहीं है। यह प्रवेश द्वार से 160 मीटर लंबी और 90 फीट गहरी है।
एक बार माता पार्वती (Mata Parvati) ने भगवान शिव (Lord Shiva) से कहा की प्रभु मैंने पृथ्वी पर देखा है कि जो व्यक्ति पहले से ही अपने प्रारब्ध से दुःखी है आप उसे और ज्यादा दुःख प्रदान करते हैं और जो सुख में है आप उसे दुःख नहीं देते है।
इस पौराणिक कथा की मानें तो एक तरह से क्रोधासुर श्री गणेश का भाई ही था, क्योंकि वो शिव जी के स्खलन से जन्मा उनका ही अंश था। उसी को नियंत्रित करने के लिए गणपति ने लंबोतर के रूप में अवतार लिया था
पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर (Shri Jagannath Temple) में मिलने वाले प्रसाद को क्यों कहा जाता है महाप्रसाद (Mahaprashad), जानें इसके पीछे का रहस्य।
भुवनेश्वर: ओडिसा के पुरी में बाट मंगला मंदिर स्थित है। यहां मंगला देवी कमल पर विराजमान वैष्णवी ठाकुर्नी का चतुर्भुज...
हिंदू पंचांग के अनुसार माता लक्ष्मी की पूजा शुक्रवार के दिन की जाती है। इसके साथ ही कई लोग माता...
आज एक विशेष शिव मंदिर के बारे में बता रहे हैं, जिसे मनुष्य नहीं, बल्कि पारलौकिक शक्तियों ने बनाया है। यह एलोरा (Ellora) का कैलाश मंदिर (Kailash Temple) है जो कि औरंगाबाद (Aurangabad) में है।
भगवान विष्णु के मोहिनी रूप को देखकर भगवान शिव काम-मोहित हो गए। जब भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप का त्याग किया तो भगवान शिव का मन दुखी हो गया। उसी समय उनका शुक्र धरती पर स्खलित हो गया। उससे एक परम प्रतापी काले रंग का असुर पैदा हुआ।
श्मशान में जब महर्षि दधीचि के मांसपिंड का दाह संस्कार हो रहा था तो उनकी पत्नी अपने पति का वियोग...
ओडिशा राज्य के पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर को पूरी दुनिया में जाना जाता है। आखिर क्या हैं, इस मंदिर में? दरअसल, इस मंदिर से जुड़ी कुछ ऐसी बातें है, जिसके पीछे का रहस्य विज्ञान भी नहीं आज तक ढूंढ सका।
पूजा करते वक्त कुछ संकेत ऐसे होते हैं जो सीधे तौर पर भगवान का इशारा होते हैं इन इशारों का...
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