सदियों से मौसम की मार झेल रहा यह मंदिर आज भी खड़ा है। पांडवों के बाद आज से लगभग 1000 वर्ष पहले 1060 ईं में राजा मांबाणि ने इस मंदिर का पुनः जीर्णोद्धार करवाया।
भगवान राम ने सीता जी के स्वयंवर में गुरु विश्वामित्र जी की आज्ञा से शिवजी का कठोर धनुष तोड़ कर सीता जी से विवाह किया था। लेकिन शिवजी का वह धनुष किसने और किससे बनाया था तथा वह शिव धनुष महाराज जनक जी केपास कैसे पहुंचा, इस रहस्य को बहुत कम लोग जानते हैं।
योगिनी एकादशी 14 जून, बुधवार को है। भगवान श्रीहरि विष्णु को एकादशी की तिथि अत्यंत प्रिय होती है। इसलिए जो भी भक्त किसी भी एकादशी का व्रत करते हैं, उसका फल उन्हें कई गुना अधिक मिलता है।
जब भगवान श्री कृष्ण ने जन्म लिया तो सभी देवी-देवता उनके दर्शन करने नंदगांव पधारे। कृष्णभक्त शनिदेव भी देवताओं संग श्रीकृष्ण के दर्शन करने नंदगांव पहुंचे। परंतु मां यशोदा ने उन्हें नंदलाल के दर्शन करने से मना कर दिया। मां यशोदा को डर था कि शनिदेव कि वक्र दृष्टि कहीं कान्हा पर न पड़ जाए। शनिदेव को यह अच्छा नहीं लगा और वो निराश होकर नंदगांव के पास जंगल में आकर तपस्या करने लगे। शनिदेव का मानना था कि पूर्णपरमेश्वर श्रीकृष्ण ने ही तो उन्हें न्यायाधीश बनाकर पापियों को दण्डित करने का कार्य सौंपा है।
Chaitra Navratri 2022: नवरात्रि (Navratri) में पांचवें दिन स्कंदमाता की पूजा-अर्चना (Worship of Skandmata) की जाती है। कहते हैं कि...
अनमोल कुमार बिहार की राजधानी पटना में स्थित पटन देवी मंदिर शक्ति उपासना का प्रमुख केंद्र माना जाता है। देवी...
अनमोल कुमार माउंट आबू (mount abu) में अचलगढ़ दुनिया की इकलौती ऐसी जगह है, जहां भगवान शिव (Bhagwan Shiv) के...
महर्षि वेद व्यास रचित महाभारत के मौसल पर्व में भगवान श्रीकृष्ण की मृत्यु और उनकी द्वारका नगरी के समुद्र में समा जाने का विवरण दिया गया है।
महाशिवरात्रि हिंदू धर्म में प्रतिवर्ष मनाया जाने वाला एक प्रमुख त्यौहार है जिसे भगवान शिव के सम्मान में मनाया जाता...
कहते हैं कि भगवान कृष्ण (Lord Krishna) की 16,108 पत्नियां थीं। क्या यह सही है? इस संबंध में कई कथाएं प्रचलित हैं और लोगों में इसको लेकर जिज्ञासा भी है। आइए, जानते हैं कि कृष्ण की 16,108 पत्नियां होने के पीछे राज क्या है?
राधा अष्टमी के पर्व का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है। अष्टमी का व्रत रखकर राधा की पूजा की जाती...
चैती देवी मंदिर (Chaiti Devi mandir) उत्तराखंड (Uttarakhand) के उधम सिंह नगर जिले में काशीपुर (Kashipur) सिटी बस स्टैंड से 2.5 किमी दूर काशीपुर के कुंडेश्वरी रोड पर स्थित है। चैती देवी मंदिर को माता बालसुंदरी मंदिर (Mata Balasundari mandir) के नाम से भी जाना जाता है, कई भक्त यहां आध्यात्मिक आनंद में डूबने और पवित्र मंदिर के दर्शन करने आते हैं। मंदिर को ज्वाला देवी मंदिर (Jwala Devi Mandir) और उज्जैनी देवी (Ujjaini Devi) के नाम से भी जाना जाता है। यह काशीपुर के सबसे लोकप्रिय मंदिरों में से एक है।




