भगवान श्री कृष्ण (Shri Krishna) का पांचजन्य शंख (Panchajanya Shankh) बड़ा ही विशिष्ट शंख है, यह दुर्लभ है। कहते हैं इस शंख की उत्पत्ति समुद्र मंथन के समय हुई थी। समुद्र मंथन में उत्पन्न रत्नों में छठा रत्न यही शंख था और उसके पश्चात भगवान विष्णु के पास माता लक्ष्मी तथा यह शंख सुशोभित हुए। किन्तु महाभारत में भी इस शंख की उपस्थिति का वर्णन है।
शालीग्राम एक प्रकार का जीवाश्म पत्थर है, जिसका प्रयोग परमेश्वर के प्रतिनिधि के रूप में भगवान #विष्णु जी का आह्वान...
जब भगवान श्री कृष्ण ने जन्म लिया तो सभी देवी-देवता उनके दर्शन करने नंदगांव पधारे। कृष्णभक्त शनिदेव भी देवताओं संग श्रीकृष्ण के दर्शन करने नंदगांव पहुंचे। परंतु मां यशोदा ने उन्हें नंदलाल के दर्शन करने से मना कर दिया। मां यशोदा को डर था कि शनिदेव कि वक्र दृष्टि कहीं कान्हा पर न पड़ जाए। शनिदेव को यह अच्छा नहीं लगा और वो निराश होकर नंदगांव के पास जंगल में आकर तपस्या करने लगे। शनिदेव का मानना था कि पूर्णपरमेश्वर श्रीकृष्ण ने ही तो उन्हें न्यायाधीश बनाकर पापियों को दण्डित करने का कार्य सौंपा है।
प्रथम पूज्य देव भगवान श्री गणेश को विघ्नविनाशक माना जाता है। सप्ताह में इनका दिन बुधवार माना गया है। वहीं...
स्कंद पुराण के अनुसार, एक बार माता पार्वती (Mata Parvati) के पसीने की बूंद मंदराचल पर्वत पर गिर गई और उससे बेल का पेड़ निकल आया। चूंकि माता पार्वती के पसीने से बेल के पेड़ का उद्भव हुआ।
हमारे देश में सूर्योपासना के लिए प्रसिद्ध पर्व है छठ। मूलत: सूर्य षष्ठी व्रत होने के कारण इसे छठ कहा...
शास्त्रों के अनुसार नवरात्रि (Navratri) नौ दिनों तक मनाई जाती है और नौ ग्रह हैं, नौ हमारी इंद्रियां हैं, नौ उपनिषद हैं और नौ दुर्गा के रूप हैं। मान्यता के अनुसार नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा करने से शरीर स्वस्थ रहता है, मन प्रसन्न रहता है और सभी ग्रह अनुकूल रहते हैं।
भगवान सूर्य की आराधना करने वाले मनुष्य को राग-द्वेष, झूठ और हिंसा से दूर रहना चाहिए
वैसे तो राधा जी (Radha Rani) के जन्म के बारे में अनेक कथाएं शास्त्रों में आती हैं, लेकिन ऐसा माना जाता है कि आज से करीब पांच हजार दो सौ वर्ष पूर्व मथुरा जिले के गोकुल-महावन कस्बे के निकट रावल गांव में भाद्र पद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि, अनुराधा नक्षत्र, मध्यान्ह काल 12 बजे और सोमवार के दिन पिता वृषभानु और माता कीर्तिदा की पुत्री के रूप में श्री राधिका जी ने जन्म लिया था।
मां लक्ष्मी के रूप में मां त्रिपुर सुंदरी यहां विराजती हैं, यहां है एकमात्र शक्तिपीठ जहां होती है गुप्त साधना
मार्कण्डेय पुराण के अनुसार सूर्य ब्रह्मस्वरूप है, सू्र्य से जगत उत्पन्न होता है। सूर्य नवग्रहों में प्रमुख देवता हैं। सूर्यदेव की दो भुजाएं हैं। वे कमल के आसन पर विराजमान हैं। उनके दोनों हाथों में कमल सुशोभित हैं। उनके सिर पर सुंदर स्वर्ण मुकुट और गले में रत्नों की माला है। सूर्य देव 7 घोड़ों के रथ पर सवार हैं।
विघ्नों के नाशक माने जाने वाले भगवान गणेश (Lord Ganesha) ने कभी तुलसी के प्रेम को अस्वीकार कर दिया था और नाराज होकर उसे शाप भी दिया था। फिर गणेश जी ने भी तुलसी को शाप दिया।

