क्या हाइड्रोजन वाकई गेम चेंजर बन सकता है, जैसा कि कुछ का मानना है? इन सवालों के जवाब के लिए कुछ बातों को समझना और उन पर गौर करना ज़रूरी है।
एक ऐतिहासिक घटनाक्रम में भारत सरकार ने आदिवासी समुदायों के जीवन में उजाला करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है।
COP28 के अंतिम सत्र में, फ़ोस्सिल फ्यूल (Fossil Fuel) से दूर जाने पर ध्यान केंद्रित करने वाले एक विशेष सौदे के रूप में ग्लोबल स्टॉकटेक टेक्स्ट, बिना किसी असहमति के स्वीकार कर लिया गया है।
हाइड्रोजन बनाने और इसे एक उपयोगी प्रारूप में बदलने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है - और वह ऊर्जा हमेशा रिन्यूबल नहीं होती है।
दरअसल भारत में कोयला बिजली संयंत्र साल 2022 में, लगातार दूसरे साल, प्रोजेक्ट फायनेंसिंग के लिए उधार हासिल करने में विफल रहे। और इससे सीधा संकेत यह मिलता है है कि ऋणदाताओं के लिए रिन्यूबल एनेर्जी परियोजनाओं (renewable energy projects) के लिए ऋण देना प्राथमिकता है।
फॉसिल फ्यूल (Fossil Fuel) से वैश्विक स्तर पर होने वाले एमिशन में वर्ष 2023 में एक बार फिर उछाल आया है और अब यह रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने आज अंतरिम बजट पेश किया।
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि चालू वर्ष में सर्वकालिक उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद, वैश्विक कोयले की मांग में कमी आने की उम्मीद है।
दुनिया में कार्बन डाइऑक्साइड का 40 फीसद एमिशन कोयले के कारण होता है जबकि बाकी के लिए तेल और गैस जिम्मेदार हैं।
यह अभूतपूर्व रिपोर्ट फ़ौसिल फ्यूल उद्योग की भ्रामक सोशल मीडिया अभियानों में भागीदारी की गहराई को उजागर करती है। सीसीएस को जलवायु परिवर्तन के लिए रामबाण के रूप में पेश करने के लिए फ़ौसिल फ्यूल कंपनियां कथित तौर पर ऑनलाइन विज्ञापन और जनसंपर्क प्रयासों में लाखों डॉलर का निवेश कर रही हैं।
दो दिन पहले की बात है। कुछ बच्चों से पता चला कि आठ साल का अंकित स्कूल आते समय रास्ते...
एक कड़वा सच जो मूंह बाए देख रहा है वो ये है कि चीन को छोड़कर, विकासशील देशों को 2030 तक जलवायु वित्त में कम से कम 2.4 ट्रिलियन डॉलर की आवश्यकता है। वहीं 54 देशों में आर्थिक संकट ने उन्हें ऋण संकट में भी डाल दिया है, जिससे उनके विकास में बाधा उत्पन्न हो रही है और टिकाऊ ऊर्जा प्रणाली का रुख करने में बाधा आ रही है।









