जिस रफ़्तार पर फ़िलहाल दुनिया चल रही है, उस रफ़्तार और इरादों से पैरिस समझौते के लक्ष्यों को हासिल कर...
इंसान की नुकसानदेह गतिविधियों के कारण जलवायु और जैव-विविधता में हुए अप्रत्याशित बदलाव अब एक साथ मिल गये हैं और...
जलवायु परिवर्तन के वित्तीय प्रभावों का सामना इंडिया इंक भी कर रहा है। इसका असर कुछ ऐसे पड़ेगा कि महत्वाकांक्षी...
वर्ष 2019 में 90 लाख लोगों की मौत का कारण बना वायु प्रदूषण, बीते चार सालों में स्थिति में मामूली सुधार
इस ग्लासगो समझौते ने की पेट्रोल और डीजल वाहनों के लिए सड़क के अंत की शुरुआत दुनिया के चौथे सबसे...
वैश्विक ऊर्जा थिंक टैंक एम्बर (global energy think tank amber) के नए विश्लेषण से पता चलता है कि 2022 में भारत की बिजली क्षमता में वृद्धि का बहुमत (92%) सौर और पवन से चलित था। इस साल, जी20 शिखर सम्मेलन के होने से पहले यह मज़बूत वृद्धि देश के जलवायु नेतृत्व ग्रहण करने के लिए मंच तैयार करती है। कोयला केवल 5% के लिए ज़िम्मेदार है।
आईपीसीसी की ताजा रिपोर्ट इस बात की गवाही देती है कि दुनिया प्रदूषण उत्सर्जन न्यूनीकरण के लक्ष्यों को हासिल कर पाने की राह पर नहीं है। इस मार्ग पर आगे बढ़ने के लिये जरूरी है कि प्रयासों को दोगुना किया जाए और नुकसान को जहां तक हो सके, कम किया जाए।
आईएमडी (IMD) का कहना है कि साइक्लोन ‘मोका’ में हवा की रफ्तार 175 किमी. प्रति घंटे को भी पार करने की संभावना है। इसके असर से अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 13 मई को अधिकांश जगहों पर बारिश की संभावना है।
भारत के 2 अरब यात्री उत्सर्जन मुक्त सौर ऊर्जा से चलने वाली ट्रेनों में यात्रा कर सकते हैं प्रधान मंत्री...
इस ताज़ा रिपोर्ट की मानें तो भारत के रिन्यूएबल एनेर्जी और ग्रिड प्रोजेक्ट्स में निवेश करने के लिए ग्लोबल निवेशकों...
मानसून का जल्दी आना और बारिश के पैटर्न में बदलाव, इस वर्ष बार-बार आने वाली अचानक बाढ़ की वजह समझने में मदद कर सकता है। पड़ोसी देश बांग्लादेश में तो अप्रैल के पहले सप्ताह में ही बाढ़ आ गयी जो की मार्च में हुई भारी बारिश का नतीजा थी। विशेषज्ञों ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और मानसून की जल्दी आमद के बीच एक मजबूत संबंध है जिसके कारण अचानक बाढ़ आई है।
अब समय है स्वीकारने का कि जलवायु परिवर्तन हमारी रोज़मर्रा की जिंदगी पर दिखा रहा है असर, ग्लोबल वार्मिंग भारत...


