यूरोपीय संघ की ग्रीन डील के तहत, साल 2050 तक जलवायु तटस्थ बनने के लक्ष्यों को हासिल करने की और...
पर्यावरण और विकास को जोड़ने वाला एक नया आंदोलन आज एकजुट हो रहा है, जिसमें दुनिया भर के नागरिक समाज...
पिछले हफ्ते भारत से वैक्सीन पा कर ब्राज़ील के प्रधान मंत्री जैयर बोल्सनारो ने हनुमान जी द्वारा संजीवनी बूटी लाने...
जनता का मूड इन दिनों तर्क से परे है; बुद्धिवाद के बजाय मनोदशा और बेतुकापन नया मानदंड हो गया है...
तेल और गैस कंपनियां अगले पांच वर्षों में, आर्कटिक क्षेत्र में अपने उत्पादन में 20 प्रतिशत की वृद्धि करने की...
तमाम देश और कंपनियां सफल जलवायु कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण नेट जीरो लक्ष्यों के लिए प्रतिबद्ध हैं। ख़ास तौर से...
देश में कार्बन न्युट्रेलिटी का भविष्य कितना उज्ज्वल है इसका अंदाज़ा इसी से लग जाता है जब पता चलता है...
राष्ट्रीय स्तर की वायु गुणवत्ता मॉनिटरिंग और शहर के एक्शन प्लान साबित हुए हैं अप्रभावी, राज्यों के एक्शन प्लान नहीं...
जलवायु परिवर्तन (Climate Change) सतत विकास के लिए एकमात्र सबसे बड़ा खतरा बन कर खड़ा है और इसके व्यापक और अभूतपूर्व प्रभाव सबसे गरीब और सबसे कमजोर लोगों पर असमान रूप से अधिक दुष्प्रभाव डालते हैं। जलवायु परिवर्तन को रोकने और इसके दुष्प्रभावों से निपटने के लिए तत्काल कार्रवाई सभी सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को सफलतापूर्वक प्राप्त करने का अभिन्न अंग है।
एक नई रिपोर्ट से पता चलता है कि जहां एक ओर भारत और नेपाल में दुनिया भर में वायु प्रदूषण (Air Pollution) के सबसे खराब प्रदूषण से जूझ रहे हैं, वहीं इन देशों की इस समस्या से निपटने में मदद करने के लिए उन्हें अंतरराष्ट्रीय दानदाताओं से बेहद कम आर्थिक सहयोग मिलता है।
पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धता के अनुरूप, भारत 2070 तक नेट ज़ीरो के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कार्बन एमिशन की तीव्रता को कम करने के लिए वैश्विक स्तर पर लगातार काम कर रहा है।
बाबाजी में आस्था के नाम पर फिर 130 से ज्यादा निश्छल श्रद्धालुओं ने अपने प्राण गंवा दिए।


