जलवायु थिंक टैंक 'क्लाइमेट ट्रेंड्स' ने भारत में मानसून के बदलते ढर्रे की वजह से अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन करने के लिए शुक्रवार को एक वेबिनार आयोजित किया, जिसमें विशेषज्ञों ने देश में जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम के बदले मिजाज और मौजूदा हालात से निपटने की संभावनाओं पर व्यापक चर्चा की।
जहां भारत में बड़े अपने तजुर्बों से नसीहत देते हैं कि कोर्ट-कचहरी और मुकदमेबाज़ी से बचना चाहिए, वहीं कोरिया से,...
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) की जर्मनी (Germany) में हुए जी-7 (G7) सम्मेलन में मौजूदगी ने जहां एक ओर दुनिया के पटल पर भारत की प्रासंगिकता को एक बार फिर साबित किया, वहीं प्रधानमंत्री ने इस वैश्विक मंच का भरपूर फायदा उठाते हुए दुनिया को न सिर्फ़ शांति का संदेश दिया बल्कि यह भी साफ़ किया कि जलवायु गुणवत्ता (climate quality) के प्रति भारत का निश्चय उसके प्रदर्शन से साफ़ झलकता है और दुनिया को उससे सीखना चाहिए।
फिलहाल प्रदूषण को लेकर जो भी नीतिगत निर्णय और कार्य किये जा रहे हैं, वे सभी सर्दियों के कुछ महीनों को ध्यान में रखकर ही हो रहे हैं। हालांकि सच्चाई यह है कि हम साल के ज्यादातर महीनों में वायु प्रदूषण के उच्च स्तरों की जद में होते हैं जिनका मानव स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। इसलिए यह ज़रूरी है कि वायु प्रदूषण से निपटान के लिए नीतीयां सिर्फ सर्दियों को नहीं बल्कि गर्मियों के महीनों को भी ध्यान में रख कर बनाई जाएँ।
हर पांच में से एक व्यक्ति अपनी आमदनी और भोजन के लिये वन्यजीव प्रजातियों पर है निर्भर। इंसान के भोजन के लिये 10 हजार वन्यजीव प्रजातियों का होता है दोहन
यूरोप के तमाम विकसित देश अक्सर भारत जैसे विकासशील देशों पर अधिक कार्बन एमिशन (carbon emission) का आरोप लगाते हैं और उम्मीद करते हैं कि वो अपना एमिशन सतत गति से कम करें और एनेर्जी ट्रांज़िशन (energy transition) की सोचें, लेकिन आज हालात ऐसे बन गए हैं कि यूरोप ख़ुद एक ऊर्जा संकट (energy crisis) की मझधार में फंसा दिख रहा है।
दलित समाज से ताल्लुक रखने वाले रामनाथ कोविंद के बाद अब आदिवासी समाज से आने वाली मुर्मू को राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार बनाना महज संयोग नहीं वरन एक सुविचारित कदम है। इस एक कदम से भाजपा ने समाज के एक बड़े वर्ग को बड़ा संदेश दिया है। इसमें महिलाएं, दलित और आदिवासी समाज शामिल हैं।
ऑफशोर वायु ऊर्जा (Offshore Wind Energy) उद्योग के लिए वर्ष 2021 अब तक का सबसे बेहतरीन साल साबित हुआ। इस साल 21.1 गीगावॉट की नई क्षमता को ग्रिड से जोड़ा गया। ग्लोबल विंड एनर्जी काउंसिल (जीडब्ल्यूईसी) द्वारा जारी अपनी ताजा 'ग्लोबल ऑफशोर विंड रिपोर्ट' में यह दावा किया गया है।
अब समय आ गया है जब मीडिया को अपनी पहचान बनाए रखने के लिए ऐसी खबरों का बहिष्कार करना चाहिए ताकि लोगों के बीच सदभाव कायम हो सके और एक-दूसरे के बीच जो विश्वास खत्म हो गया था फिर से कायम हो सके। मीडिया का रोल (role of media) बहुत ही महत्वपूर्ण है, जो दोनों समुदायों के बीच एक सेतू का काम कर सकती है, जिससे द्वेष की भावना का खात्मा किया जा सके और लोगों में फिर से सदभाव कायम हो सके।
भारत, नाइजीरिया, फिलीपींस और अफ्रीका समेत 33 देशों के बच्चे एक साथ हीटवेव, बाढ़, चक्रवात, बीमारी, सूखा और वायु प्रदूषण जैसे जलवायु प्रभावों का सामना कर रहे हैं। मगर इस सब के बावजूद, भारत में, बच्चों को दी जाने वाली जानकारी उतनी नहीं जितनी संभवतः आवश्यक है। और मानो इतना काफ़ी न हो, एनसीईआरटी (NCERT) ने हाल ही में इस संदर्भ में अपने स्कूल पाठ्यक्रम में जो बदलाव कर दिये हैं वो हैरान करने वाले हैं।
दरअसल आर्थिक और राजनीतिक निर्णयों ने मुख्य रूप से प्रकृति के कुछ ही मूल्यों को प्राथमिकता दी है। इनमें विशेष रूप से प्रकृति के बाजार-आधारित मूल्य, जैसे खाद्य पदार्थ, प्राथमिकता पाते हैं। इसके अलावा, नीति निर्धारण कि प्रक्रिया में आमजन के लिए प्रकृति के योगदान से जुड़े कई गैर-बाजार मूल्यों की अनदेखी होती है, जैसे कि जलवायु विनियमन और सांस्कृतिक पहचान।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की वायु गुणवत्ता (Air Quality) के सम्पूर्ण सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण (Air Pollution) के खतरे को कम करने के लिए एक व्यापक नीति तैयार की है।
