दुनिया भर के शोधकर्ताओं के एक समूह ने हाल में नेचर कम्युनिकेशन नामक पत्रिका में एक शोध पत्र प्रकाशित कर...
बीते एक साल में सात राज्यों में थर्मल पावर प्लांट्स में कोल फ्लाई ऐश से जुड़ी 17 प्रमुख दुर्घटनाएं की...
इस साल की शुरुआत में, अपनी जलवायु कार्य योजना को मज़बूत करने के लिए जलवायु समूह के अंडर2 गठबंधन में...
भारत इस वक्त ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) की जबर्दस्त मार सहने को मजबूर है। भीषण गर्मी के कारण तापमान बढ़ने...
तेल और गैस कंपनियां अगले पांच वर्षों में, आर्कटिक क्षेत्र में अपने उत्पादन में 20 प्रतिशत की वृद्धि करने की...
पैरिस समझौते के क्रम में ग्लोबल वार्मिंग को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने के लिए आवश्यक है कि वैश्विक...
प्रधान मंत्री मोदी के ग्लासगो में भारत के साल 2070 तक नेट ज़ीरो होने की घोषणा के बाद से नेट...
साल 2021 की पहली छमाही में बढ़ती वैश्विक बिजली की मांग ने स्वच्छ बिजली में वृद्धि को पीछे छोड़ दिया,...
जंगलों में लगने वाली आग अब तक हमें अमेरिका और ब्राज़ील की याद दिलाती हैं। लेकिन अब, आग लगने की...
इस वक़्त अगर आप इस ख़बर को पढ़ रहे हैं तो मतलब आपके पास बिजली की सप्लाई है। और इस...
उत्सर्जन में कटौती के बिना, ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करना पहुंच से बाहर है। इस काम के लिए ऊर्जा क्षेत्र में बड़े बदलाव की आवश्यकता है और जीवाश्म ईंधन के उपयोग में भारी कमी लानी होगी ।
पिछले वर्षों की अभूतपूर्व बाढ़, सूखा और बेतहाशा पानी से होने वाली घटनाएं अप्रत्याशित नहीं, बल्कि मानव द्वारा दशकों से चली आ रही पानी की बदइंतज़ामी से होने वाली सिस्टेमेटिक क्राइसेस का नतीजा हैं। यह कहना है ग्लोबल कमीशन ऑन इक्नोमिक्स ऑफ वॉटर रिपोर्ट (Global Commission on Economics of Water Report) का।

