एक ऐसे भी शिव भक्त (Shiv Bhakt) मिले जिन्होंने अपने बाइक पर बाबा भोले के मंदिर की स्थापना कर ली है। बाबा भोलेनाथ (Bholenath) की मंदिर नुमा झांकी को बाइक पर लगाकर बाबा बैद्यनाथ (Baba Baidyanath), देवघर (Devghar) के दर्शन को निकल पड़े।
नंदी को भक्ति और शक्ति के प्रतीक माना गया है। कहा जाता है कि जो भी भगवान भोले (Bholenath) से मिलना चाहता है नंदी पहले उसकी भक्ति की परीक्षा लेते हैं। भगवान शिव के प्रति नंदी की भक्ति और समर्पण की वजह से ही कलियुग में भी भगवान शिव के साथ नंदी की पूजा की जाती है।
भगवान शिव (Bhagwan Shiva) के तीसरे नेत्र के बारे में तो सभी जानते हैं कि जब भोलेनाथ (Bholenath) ने अपना...
अक्षयपुरीश्वर मंदिर (Akshaypurishwar Mandir) के प्रमुख भोलेनाथ (Bholenath) और देवी पार्वती (Devi Parvati) हैं। इनके साथ ही मंदिर में शनिदेव की पूजा उनकी पत्नियों मंदा और ज्येष्ठा के साथ की जाती है।
इस मंदिर को पशुपतिनाथ मंदिर (Pashupatinath Temple) के नाम से भी जाना जाता है चूंकि रुद्रनाथ मंदिर के अन्य मंदिरों से अलग है, इसलिए दूर दूर से लोग इस मंदिर के दर्शन करने आते हैं। जहां शिव जी के लिंग रूप की पूजा होती है वहीं इस मंदिर में केवल उनके मुख की पूजा होती है।


