रिपोर्ट शीर्ष पांच प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं - चीन, यूरोपीय संघ, संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान और भारत - और उभरते हरित औद्योगिक युग पर हावी होने की दौड़ में उनकी संबंधित स्थिति का व्यापक विश्लेषण प्रदान करती है।
भारत की अध्यक्षता में G20 देशों की ऊर्जा, जलवायु एवं पर्यावरण से सम्बन्धित बैठकें पिछले महीने सम्पन्न हुईं।
मिड डे मील में बाजरा शामिल करने के बाद MSP पर ज्वार खरीदने का निर्णय
जलवायु परिवर्तन (Climate Change) से निपटने की जितनी तात्कालिकता आज के दौर में महसूस होती है, उतनी पहले कभी नहीं रही और वक़्त के साथ इस विषय की प्रासंगिकता बढ़ती ही जाएगी।
जर्मनी की लाइपजिग यूनीवर्सिटी में हुए ताज़ा शोध की मानें तो इस साल, बीते लगभग सवा लाख साल बाद जुलाई का महीना सबसे गर्म रहेगा।
भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन (Climate Change) मंत्रालय ने 'ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम (जीसीपी)' कार्यान्वयन नियमों के मसौदे को सार्वजनिक करते हुए एक बेहतर और पर्यावरण हित में एक साहसिक कदम उठाया है।
भारत में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) देश की GDP का 30% हिस्सा हैं और 110 मिलियन से अधिक श्रमिकों को रोजगार देते हैं।
जी20 देशों की फ़ोसिल फ़्यूल सब्सिडी (Fossil Fuel Subsidy) को रिन्यूबल एनर्जी (Renewable Energy) स्रोतों में निवेश की ओर पुनर्निर्देशित करने से न केवल जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के खिलाफ लड़ाई में मदद मिल सकती है
हिमाचल प्रदेश में बारिश और उसके बाद हुए भूस्खलन में कम से कम 75 लोगों की जान जाने के बाद वहाँ की सरकार ने वहाँ राज्य स्तरीय आपदा घोषित कर दी। उत्तराखंड में भी हाल कुछ मिलता जुलता ही है।
एक के बाद एक वैज्ञानिक सबूत हमारे सामने आते जा रहे हैं जो साफ कर रहे हैं कि बीती जुलाई मानव इतिहास, या उससे पहले के कालखंड की भी सबसे अधिक गरम जुलाई थी।
बारिश की आमद गर्मी से राहत देने के लिए जानी जाती थी। मगर अब, यह राहत बन रही है आफत। भारत में चरम मौसम की घटनाओं में वृद्धि का पैमाना हर गुजरते साल के साथ नई ऊंचाई छू रहा है।
क्लाइमेट सेंट्रल के इस विश्लेषण की मानें तो 14-16 जून, 2023 के बीच पूरे उत्तर प्रदेश में चलने वाली तीन दिन रही मारक हीटवेव (Heat Wave) की संभावना जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के कारण कम से कम दो गुना अधिक पाई गई।











