इनमे से अधिकांश लोग जलवायु और ऊर्जा नीतियों के पक्ष में सतर्क, चिंतित ,और फिक्रमंद हैं
जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र के अंतर सरकारी पैनल (IPCC) के सदस्य वैज्ञानिकों का। इन वैज्ञानिकों ने आज अपनी नवीनतम रिपोर्ट में साफ़ किया है कि अगर हम अब भी मौजूदा संसाधनों का सही रणनीतिक प्रयोग करते हैं तो जलवायु परिवर्तन की चोट के असर को काफ़ी कम कर सकते हैं।
फिक्र की बात यह है कि अल नीनो जैसे खतरनाक प्रभाव की वापसी हो रही है। जलवायु परिवर्तन (Climate Change) से जुड़े मॉडल्स के अनुमानों के मुताबिक अल नीनो का प्रभाव मई-जुलाई के दौरान लौटने की सम्भावना है। यह अवधि गर्मी और मानसून के मौसम को आपस में जोड़ती है। मानसून की अवधि जून से सितंबर के बीच मानी जाती है।
अगर एमिशन के मौजूदा स्तर बने रहे तो अगले नौ वर्षों के दौरान ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) में वृद्धि के डेढ़ डिग्री सेल्सियस की सीमा को पार कर जाने की आशंका 50% तक बढ़ जाएगी।
इस सर्वे में शामिल 64% लोगों का कहना है कि भारत सरकार को ग्लोबल वार्मिंग से निपटने के लिए और अधिक प्रयास करने चाहिए
प्रधान मंत्री का संसदीय क्षेत्र बनेगा यूपी का पहला और देश का 7वां शहर जहां कार्बन क्रेडिट से होगी कमाई
पवन बिजली उद्योग (wind power industry) 2025 तक, ओनशोर या तटवर्ती और ऑफशोर या अपतटीय, दोनों बाज़ारों में तेज़ी से आगे बढ़ते हुए वर्ष 2027 तक 680 गीगावाट की रिकॉर्ड स्थापना की उम्मीद कर रहा है। सप्लाई चेन की रुकावटों को दूर करने के लिया नीति निर्माताओं को 2026 से काम करने की ज़रूरत है।
पिछले वर्षों की अभूतपूर्व बाढ़, सूखा और बेतहाशा पानी से होने वाली घटनाएं अप्रत्याशित नहीं, बल्कि मानव द्वारा दशकों से चली आ रही पानी की बदइंतज़ामी से होने वाली सिस्टेमेटिक क्राइसेस का नतीजा हैं। यह कहना है ग्लोबल कमीशन ऑन इक्नोमिक्स ऑफ वॉटर रिपोर्ट (Global Commission on Economics of Water Report) का।
संयुक्त राष्ट्र की 27वीं जलवायु वार्ता (27th Climate Talks), या कॉप 27 (COP 27), आज मिस्र में समाप्त हुई। जहां एक ओर इस सम्मेलन में जलवायु संकट (Climate Crisis) के सबसे कमजोर लोगों पर असर को कम करने पर अहम फैसले लिए गए, वहीं इस वार्ता में ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) के कारणों को दूर करने के लिए कुछ खास देखने या सुनने को नहीं मिला।
संयुक्त राष्ट्र की आज जारी एमिशन्स गैप रिपोर्ट की मानें तो वर्ष 2021 में ब्रिटेन के ग्लासगो में हुए CoP26 में सभी देशों द्वारा अपने नेशनली डिटरमाइंड कंट्रीब्यूशंस (Nationally Determined Contributions) को और मजबूत करने का संकल्प व्यक्त किये जाने और राष्ट्रों द्वारा कुछ अपडेटेड जानकारी दिये जाने के बावजूद प्रगति के मोर्चे पर बुरी तरह नाकामी ही नजर आ रही है।
जब ग्लासगो में प्रधानमंत्री मोदी ने COP 26 के दौरान जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के खिलाफ़ वैश्विक जंग के संदर्भ में अंग्रेज़ी के शब्द LIFE के अक्षरों में छिपे एक मंत्र ‘लाइफ़स्टाइल फॉर एनवायरनमेंट’ (Lifestyle for Environment) का उल्लेख किया था, तब वो महज़ उनके चिर-परिचित अंदाज़ वाला शब्दों का खेल नहीं था।
आज का दिन ख़ास है। आज, सितंबर सात, को हर साल साफ हवा और नीले आसमान को समर्पित अंतर्राष्ट्रीय दिवस के तौर पर मनाया जाता है। मगर इस साल साफ हवा और नीले आसमान को मिलेंगे बोल और धुन।





