वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने आज अंतरिम बजट पेश किया।
ग्लोबल स्टील प्लांट ट्रैकर के डेटा के वार्षिक सर्वेक्षण में पाया गया है कि कोयला आधारित स्टील उत्पादन क्षमता में वृद्धि का लगभग पूरा काम (99 प्रतिशत) एशिया में ही हो रहा है और चीन तथा भारत की इन परियोजनाओं में कुल हिस्सेदारी 79 प्रतिशत है।
वैश्विक स्तर पर 90% नेट ज़ीरो (Net Zero) ग्रीनहाउस गैस एमिशन (Greenhouse Gas Emissions) प्रतिज्ञाओं के पूर्ण कार्यान्वयन के बाद भी अपेक्षित सफलता मिलना मुश्किल है। उनके मुताबिक जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए और अधिक मजबूत उपायों की तत्काल आवश्यकता है।
दुनिया की 24 सबसे बड़ी तथाकथित "क्लाइमेट लीडर" (Climate Leader) कंपनियों की जलवायु रणनीतियाँ (climate strategies) पूरी तरह से अपर्याप्त हैं और अस्पष्टता से घिरी हुई हैं।
कोलम्बिया सेंटर ऑन सस्टेनेबल इन्वेस्टमेंट (CCSI) ने आज रेन्युबल ऊर्जा में निवेश के कारकों और उसमें आने वाली बाधाओं पर आधारित अपनी दो नयी रिपोर्टें पेश कीं।
तमाम वैश्विक संस्थानों और सरकारों के लिए नेट ज़ीरो लक्ष्य हासिल करने को सुगम बनाते हुए इंटेरनैशनल स्टैंडर्ड्ज ऑर्गनाइज़ेशन, आईएसओ, ने आज बहुप्रतीक्षित नेट जीरो दिशानिर्देश प्रकाशित किए हैं।
भारत वर्ष 2030 तक अपनी अक्षय ऊर्जा क्षमता को तीन गुना से भी ज्यादा बढ़ाने की योजना पहले से ही बना रहा है, मगर ऐसा करने के लिये 293 बिलियन डॉलर की जरूरत पड़ेगी। वैश्विक थिंक टैंक ‘एम्बर’ की एक नयी रिपोर्ट में यह बात सामने आयी है।
जी7, जी20 और यूएनएफसीसीसी सीओपी28 की अध्यक्षता इस साल क्रमशः जापान, भारत और संयुक्त अरब अमीरात के रूप में एशियाई देशों के पास है। ये अंतरराष्ट्रीय आयोजन दरअसल जलवायु परिवर्तन (Climate Change), ऊर्जा संक्रमण और वित्त के बारे में एक परिप्रेक्ष्य प्रदान करते हैं।
जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuel) से स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों की तरफ बढ़ते रुझान और नेटजीरो (Net Zero) लक्ष्यों के प्रति भारत...
लक्जमबर्ग (Luxembourg) स्थित आर्सेलर मित्तल (ArcelorMittal) कम्पनी को अगली मई में होने जा रही अपनी वार्षिक सभा में मुश्किल सवालों का सामना करने के लिये तैयार रहना चाहिये।
जिस दिन तमिलनाडु चक्रवात मंडौस (Cyclone Mandaus) के तट पर दस्तक देने की तैयारी कर रहा था, ठीक उसी दिन राज्य सरकार ने तमिलनाडु जलवायु परिवर्तन (Climate Change) मिशन के शुभारंभ के साथ जलवायु लचीलापन की दिशा में काम करने की अपनी तैयारियों और प्रतिबद्धता पर फिर से जोर दिया है।
जहां एक ओर भारत ने साल 2070 तक नेट ज़ीरो (Net Zero) होने का अपना लक्ष्य दुनिया के सामने रखा है, वहीं इस संदर्भ में दुनिया की सबसे बड़ी उप-राष्ट्रीय इकाई, उत्तर प्रदेश, न सिर्फ राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप होने की कोशिशें कर रही है बल्कि वह भारत की सबसे बड़ी यातायात व्यवस्था को भी प्रदूषण मुक्त (Pullution free) करने की कवायद में सक्रिय है।






