भारत में उड़ीसा के कोणार्क का सूर्य मंदिर ऐसे तो विश्व प्रसिद्ध है, लेकिन उत्तराखंड (Uttarakhand) की पवित्र देवभूमि में भी भगवान सूर्यदेव साक्षात विराजते हैं कटारमल सूर्य मंदिर (Katarmal Surya Mandir) के रूप में।
उत्तराखंड (Uttarakhand) के चमोली (Chamoli) जिले के जोशीमठ (Joshimath) क्षेत्र में हालिया भू-धंसाव की घटनाओं की पृष्ठभूमि में, सरकार ने संसद को बताया है कि हिमालय के कई हिस्सों में "अस्थिर और गतिशील भूविज्ञान है, जो भू-धंसाव और भूस्खलन का कारण बन सकता है"।
लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तराखंड 20-22 वर्ष पहले यूपी का हिस्सा था। यूपी-उत्तराखंड अलग नहीं हो सकते।...
अभी कुछ समय पहले तक उत्तराखंड (Uttarakhand) का रैनी गाँव सुर्खियों में था और अब, पास का ही जोशीमठ (Joshimath) खबरों में है। फिलहाल प्रशासन वहाँ से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पुनर्स्थापित करने की कवायद में है और विशेषज्ञ अपनी अपनी समझ से समस्या के कारणों पर गौर कर रहे हैं।
उत्तराखंड (Uttarakhand) पिथौरागढ़ (Pithoragarh) जिला से करीब 90 किलोमीटर दूर गंगोलीहाट के भुवनेश्वर गांव में पाताल भुवनेश्वर गुफा (Patal Bhubaneswar Cave) स्थित है। यह गुफा समुद्र तल से 1350 किलोमीटर की ऊंचाई पर है। यह गुफा किसी आश्चर्य से कम नहीं है। यह प्रवेश द्वार से 160 मीटर लंबी और 90 फीट गहरी है।
उत्तराखंड (Uttarakhand) में देवी-देवताओं के कई चमत्कारिक मंदिर हैं। इन्हीं में से एक मंदिर गोलू देवता (Golu Devta Mandir) का भी है। गोलू देवता को स्थानीय मान्यताओं में न्याय का देवता कहा जाता है।
हिमालयी क्षेत्र, जो जम्मू-कश्मीर से अरुणाचल प्रदेश तक फैला हुआ है, में भी हाल ही में तुर्की (Turkey) में आए भूकंप (earthquake ) के समान 8 से अधिक परिमाण का एक बड़ा भूकंप आने की संभावना है।
जोशीमठ में संकट के बाद से बज रही खतरे की घंटी उत्तराखंड के कई अन्य पहाड़ी शहरों में गूंज रही है, उनके निवासियों का कहना है कि इमारतों और सड़कों में दरारों के कारण उन्हें भी खतरा है।
उत्तराखंड को महादेव शिव की तपस्थली भी कहा जाता है। भगवान शिव इसी धरा पर निवास करते हैं। इसी जगह पर भगवान शिव का एक बेहद खूबसूरत ताड़केश्वर भगवान का मंदिर है।
कटारमल सूर्य मंदिर (Katarmal Surya Mandir) देश का प्राचीनतम सूर्य मंदिर है। यह पूर्वाभिमुखी है तथा उत्तराखण्ड (Uttarakhand) राज्य में अल्मोड़ा (Almora) जिले के अधेली सुनार नामक गॉंव में स्थित है। इसकी विशेषता है कि यहां पर सूर्य देव की मूर्ति किसी धातु या पत्थर से निर्मित नहीं, बल्कि एक बड़ के पेड़ की लकड़ी से बनी है। यह अपने आप में अद्भुत व अनोखी है। इस सूर्य मंदिर को “बड़ आदित्य मंदिर” (Aditya Mandir) भी कहा जाता है।
उत्तराखंड (Uttarakhand) में गढ़वाल मंडल (Gharwal) के चमोली जिले में सोनप्रयाग से लगभग तीन किलोमीटर की दूरी पर मुंडकटिया मंदिर है। यह विश्व का एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहाँ बिना सिर के भगवान गणेश जी की पूजा की जाती है।
उत्तराखंड (Uttarakhand) के हरिद्वार (Haridwar) में एक प्राचीन मां चंडी देवी मंदिर(Chandi Devi Mandir) है। मां चंडी देवी को चंडिका देवी के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर शक्ति स्वरुप मां चंडी देवी को समर्पित है। यहां माता खंभ के रूप में विराजमान है।










