माता लक्ष्मी पर आधारित है शिव के इस मंदिर का नाम, भगवान विष्णु ने किया था बद्रीनाथ के इस हिस्से में तप
श्री अमरनाथ यात्रियों के पहले जत्थे को उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने जम्मू के यात्री निवास भवन से झंडी दिखाकर रवाना किया। आज तड़के 3000 से अधिक तीर्थयात्री कश्मीर घाटी के लिए रवाना हुए। यह यात्रा दो साल के अंतराल के बाद हो रही है।
ठाकुर जी की घड़ी सेल से नहीं पल्स रेट से चलती है। 50 से भी अधिक साल से यह घड़ी चल रही है और अभी भी ठीक समय बताती है। ठाकुर जी के श्रृंगार के समय जब घड़ी उतारते हैं तो घड़ी बंद हो जाती है। ठाकुर जी के हाथ में डालते ही फिर से चलना शुरू हो जाती हैं।
दुर्गा सप्तशती एक ऐसा वरदान व प्रसाद है, जो भी प्राणी इसे ग्रहण कर लेता है वह धन्य हो जाता...
भगवान सूर्य की आराधना करने वाले मनुष्य को राग-द्वेष, झूठ और हिंसा से दूर रहना चाहिए
भगवान शंकर (विश्वनाथ) की अर्धांगिनी हैं माता अन्नपूर्णा । माता पार्वती ही सृष्टिकाल में महामाया, पालन करते समय अन्नपूर्णा और...
सूर्य के वर से सुवर्ण के बने हुए सुमेरु में केसरी का राज्य था। उसकी अति सुंदरी अंजना नामक स्त्री...
हिंदू धर्म में हर पूजा में सबसे पहले प्रथम पूज्य भगवान गणेश की आराधना की जाती है लेकिन क्या आप...
आज भी हर साल जगन्नाथ यात्रा के उपलक्ष्य में सोने की झाड़ू से पुरी के राजा खुद झाड़ू लगाने आते है।
51 पीठों में कामाख्या पीठ को महापीठ के नाम से भी सम्बोधित किया जाता है। इस मंदिर में एक गुफा है। इस गुफा तक जाने का मार्ग बेहद पथरीला है। जिसे नरकासुर पथ कहते है। मंदिर के मध्य भाग में देवी की विशालकाय मूर्ति स्थित है। यहीं पर एक कुंड स्थित है। जिसे सौभाग्य कुण्ड कहा जाता है। कामाख्या देवी शक्ति पीठ के विषय में यह मान्यता है कि यहां देवी को लाल चुनरी या वस्त्र चढाने मात्र से सभी मनोकामनाएं पूरी होती है।
पूर्णागिरी मंदिर काली नदी के तट पर स्थित है और इसे पूनागिरी के नाम से भी जाना जाता है। इन सभी पीठों में यह भक्ति पीठ, मलकागिरी, कालिकागिरी और हिमलागिरी प्रमुख स्थान रखती है। पूर्णागिरी पर्वत के उच्चतम बिंदु से, काली नदी को नेपाल से होते हुए देखा जा सकता है।
वास्तव में शिव का अवतार हनुमान (Shiv ka Avtaar Hanuman) ही थे और यह भी सत्य है कि भगवान राम (Bhagwan Ram) ही शिव के हनुमान अवतार (Hanuman Avtaar) का कारण बने थे। रामायण में बताया गया है कि एक बार भगवान शिव की भी इच्छा हुई कि पृथ्वीलोक चलकर भगवान राम के दर्शन किये जायें। उस समय भगवान राम जी की आयु लगभग 5 वर्ष के आसपास रही होगी।
