लाल पताका जिस पर श्री राम लिखा और हनुमान जी का चित्र अंकित हो, घर के आगे लगाने वाले बंधनवार जो कि लाल रक्षासूत्र से बने हो। ये सब हनुमान जी के चिन्ह हैं। इन्हें घर पर लगाने से स्वतः ही प्रभु के होने का आभास होता है।
अनमोल कुमार काशी एक यंत्र है,एक असाधारण यंत्र! मानव शरीर में जैसे नाभी का स्थान है, वैसे ही पृथ्वी पर...
शास्त्रों में प्रथम पूज्य भगवान गणेश जी (Ganesh ji) की पूजा बुधवार करने का विधान है। वैसे तो भगवान गणेश...
नीम करौरी बाबा के भक्त देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी हैं। नीम करौरी महाराज को हनुमान जी का अवतार भी कहा जाता है। बाबा के कई चमत्कारी किस्से लोगों को उनके दर्शन करने पर मजबूर कर देते हैं।
शरभ अवतार ब्रह्मांड की रक्षा के लिए भगवान शिव (Bhagwan Shiv) द्वारा लिया गया सबसे शक्तिशाली अवतार था। माना जाता हैं की शरभ अवतार का पूजा-पाठ करने से भाग्यशाली होने, नुकसान से बचाव सहित विभिन्न विवादों में भी जीत मिलती है।भगवान शिव के इस अवतार का उद्देश्य भगवान विष्णु के भयंकर और उग्र नरसिंह अवतार को काबू करना था।
द्वारका धाम गुजरात के काठियावाड क्षेत्र में अरब सागर के समीप स्थित है। मथुरा से जाने के बाद श्री कृष्ण ने इस विशाल नगर की स्थापना की थीं।
जब भी हम किसी शिव मंदिर (Shiv Mandir) जाते हैं तो अक्सर देखते हैं कि कुछ लोग शिवलिंग (Shivling) के...
हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले गणेश जी (Ganesh ji) की पूजा की जाती है,...
श्रीकृष्ण की लीलाओं में हमें उनके ऐश्वर्य के साथ-साथ माधुर्य के भी दर्शन होते हैं। ब्रज की लीलाओं में तो श्रीकृष्ण संसार के साथ बिलकुल बँधे-बँधे से दिखायी पड़ते हैं। उन्हीं लीलाओं में से एक लीला है बालकृष्ण द्वारा अपने पैर का अंगूठे पीने की लीला।
अक्सर धार्मिक तस्वीरों में देखा जाता है कि माँ लक्ष्मी (Maa Lakshmi) विष्णु जी (Vishnu ji) के चरणों के निकट बैठती हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि धन की देवी होने के बावजूद भी मां लक्ष्मी विष्णु जी चरणों के निकट क्यों बैठती हैं? चलिए जानते हैं रोचक तथ्य के बारे में।
हनुमान जी (Hanuman ji) के माता-पिता का नाम केसरी व अंजना था, जिन्होंने उन्हें बहुत यत्न के बाद प्राप्त किया...
छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के महासमुंद (Mahasamund) जिले में एक ऐसी जगह है, जिसके बारे में कहा जाता है कि वहां महाबली भीम और राक्षसी हिडिंबा का विवाह हुआ था। इस स्थान पर माता खल्लारी (Khallari Mata) का मंदिर है, जिनके दर्शन के लिए देश के कोने-कोने से लोग पहुंचते हैं। महासमुंद जिले में शहर से करीब 24 किलोमीटर दूर स्थित पहाड़ियों पर माता खल्लारी का मंदिर है।


