शिव का अवतार हनुमान जी ही थे और यह भी सत्य है कि भगवान राम (Bhagwan Ram) ही शिव (Bhagwan...
यदि आप पर माता लक्ष्मी (Mata Laxmi) की कृपा नहीं है तो आपको वास्तु उपाय करना चाहिए। घर में मुख्य द्वार पर दीपक जलाकर रखने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और उनका घर में आगमन होता है। ऐसा करने से धन-संपत्ति में बढ़ोत्तरी होती है। जानते हैं कि माता लक्ष्मी के लिए दीपक किस समय जलाएं?
हिंदू पंचांग के अनुसार माता लक्ष्मी की पूजा शुक्रवार के दिन की जाती है। इसके साथ ही कई लोग माता...
श्रावण मास अर्थात त्योहार का महीना है। श्रावण का पहला पर्व है 'नागपंचमी'! हर साल श्रावण शुक्ल पक्ष पंचमी अर्थात...
इस मंदिर में मां जागृत अवस्था में विराजमान है। माँ के दर्शन के लिए लिए टिकारी शहर, इसके आस पास के गावँ के तथा टिकारी से बाहर रहने वाले लोग भी आते रहते हैं।
महाशिवरात्रि पर घर में पारद शिवलिंग की स्थापना करें और उसकी पूजा करें। इसके बाद नीचे लिखे मंत्र का 108 बार जाप करें-
ऐं ह्रीं श्रीं ऊं नम: शिवाय: श्रीं ह्रीं ऐं
सूर्य देव ने देखा कि इतना सब के बाद भी समुद्र के जल स्तर में रत्ती भर की कमी नहीं आई थी और न ही स्वयं के तेज में। जबकि इस कार्य में सहयोगी हवा भी सोंधी महक से सुरभित हो गई थी।
यह त्यौहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और भारत के विभिन्न भागों में इसका अलग-अलग पौराणिक महत्व है।
भारत में नवरात्रि 2022 (Navratri 2022) हर बार की तरह इस बार भी हिन्दू धर्म के भक्तगणों द्वारा बड़े ही धूमधाम और उमंग के साथ मनाई जाएगी। चैत्र नवरात्रि के पहले दिन को हिन्दू नव वर्ष की शुरुआत के रूप में भी मनाया जाता है अर्थात हिन्दू कैलेंडर के अनुसार इस दिन से नया वर्ष शुरू हो जाता है।
शनिवार का दिन शनिदेव (Shanidev) की पूजा के लिए खास माना जाता है। शनिदेव के अशुभ प्रभाव को कम करने व उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए विभिन्न प्रकार के पूजन किए जाते हैं। शनिवार को कौन सा कार्य करना चाहिए व कौन सा नहीं, इन बातों का भी ध्यान रखना चाहिए। जिससे अनजाने में भी शनिदेव का कुप्रभाव न पड़े।
भगवान श्री कृष्ण (Shri Krishna) का पांचजन्य शंख (Panchajanya Shankh) बड़ा ही विशिष्ट शंख है, यह दुर्लभ है। कहते हैं इस शंख की उत्पत्ति समुद्र मंथन के समय हुई थी। समुद्र मंथन में उत्पन्न रत्नों में छठा रत्न यही शंख था और उसके पश्चात भगवान विष्णु के पास माता लक्ष्मी तथा यह शंख सुशोभित हुए। किन्तु महाभारत में भी इस शंख की उपस्थिति का वर्णन है।
हर किसी को मालूम है कि गणेश जी (Ganesh ji) को मोदक और मिठाई कितनी पसंद है। शायद इसलिए वो किसी के भी निमंत्रण को स्वीकार कर लेते हैं और मन भर कर मोदक और मिठाई खाते हैं।





