हनुमान जी (Hanumanji) की कृपा पाने के लिए मंगलवार के दिन व्रत करके शाम के समय बूंदी का प्रसाद बांटने...
हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले गणेश जी (Ganesh ji) की पूजा की जाती है,...
आधुनिकता के नाम पर हम लोग अपना धर्म भूलते जा रहे हैं। आज की पीढ़ी से अगर ये प्रश्न किया...
हनुमान जी के कई स्थानों पर पदचिह्न भी बताए जाते है। ऐसे में हनुमानजी के ये पैरों के निशान के दर्शन करना अपने आप में अद्भुत अनुभव होता है। आइए जानते हैं कहां-कहां भगवान हनुमानजी ने धरती पर अपने कदम रखे थे, जहां उनके पैरों के निशान बन गए। उनमें से कुछ प्रमुख पदचिह्नों के बारे में तस्वीरों सहित संक्षिप्त में जानें।
भगवान श्री कृष्ण (Shri Krishna) का पांचजन्य शंख (Panchajanya Shankh) बड़ा ही विशिष्ट शंख है, यह दुर्लभ है। कहते हैं इस शंख की उत्पत्ति समुद्र मंथन के समय हुई थी। समुद्र मंथन में उत्पन्न रत्नों में छठा रत्न यही शंख था और उसके पश्चात भगवान विष्णु के पास माता लक्ष्मी तथा यह शंख सुशोभित हुए। किन्तु महाभारत में भी इस शंख की उपस्थिति का वर्णन है।
कार्तिक माह में हिन्दू मान्यता के अनुसार बहुत से त्यौहार मनाये जाते है। अलग अलग क्षेत्र, समुदाय के लोग अलग...
Chaitra Navratri 2022: नवरात्रि के दूसरे दिन आज मां के द्वितीय स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है। मां...
माँ सिद्धिदात्री के निचले दाहिने हाथ में चक्र और ऊपरी दाहिने हाथ में शंख है। उनके निचले बाएँ हाथ में कमल का फूल है, और ऊपरी बाएँ हाथ में गदा है। उन्हें अक्सर कमल के फूल पर बैठे या शेर की सवारी करते हुए चित्रित किया जाता है, जो शक्ति और निडरता का प्रतीक है।
महाशिवरात्रि (Mahashivratri) दक्षिण भारत एवं महाराष्ट्र में शक संवत् कालगणनानुसार माघ कृष्ण चतुर्दशी तथा उत्तर भारत में विक्रम संवत् कालगणनानुसार फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को आती है।
बिहार की राजधानी पटना में स्थित पटन देवी मंदिर (Patan Devi Mandir) शक्ति उपासना का प्रमुख केंद्र माना जाता है। देवीभागवत और तंत्रचूड़ामणि के अनुसार, सती की दाहिनी जांघ यहीं गिरी थी. नवरात्र के दौरान यहां काफी भीड़ उमड़ती है। सती के 51 शक्तिपीठों में प्रमुख इस उपासना स्थल में माता की तीन स्वरूपों वाली प्रतिमाएं विराजित हैं।
गोस्वामी तुलसीदास जी हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) में लिखते हैं, "अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता, अस बर दीन्ही जानकी माता" अर्थात हनुमान जी महाराज आठ सिद्धियों और नौ निधियों के अधिकारी देव हैं, दाता हैं।
हनुमानजी (Hanuman ji) रावण (Ravan) की स्वर्ण नगरी लंका को जला कर राख करके चले जाते हैं और रावण उनका कुछ नहीं कर सका। वह सोचते-सोचते परेशान हो जाता है कि आखिर उस हनुमान में इतनी शक्ति आई कहां से?




