अक्सर धार्मिक तस्वीरों में देखा जाता है कि माँ लक्ष्मी (Maa Lakshmi) विष्णु जी (Vishnu ji) के चरणों के निकट बैठती हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि धन की देवी होने के बावजूद भी मां लक्ष्मी विष्णु जी चरणों के निकट क्यों बैठती हैं? चलिए जानते हैं रोचक तथ्य के बारे में।
शास्त्रों में सूर्य को प्रत्यक्ष देव माना जाता है जिनके दर्शन हर कोई कर सकता है। सूर्यदेव (Suryadev) के बिना पृथ्वी पर जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। भगवान सूर्य (Lord Surya) को यदि कोई प्रसन्न कर ले तो उसका जीवन संवर जाता है।
शंकर जी बोले-हे उमा, कालकारमुख नामक एक भयानक बलवान राक्षस हुआ। ग्यारह मुख वाले उस विकराल राक्षस ने बहुत काल...
राजस्थान (Rajasthan) की अरावली पहाड़ियों (aravalli hills) की तलहटी पर स्थित परशुराम महादेव मंदिर (Parshuram Mahadev Mandir) हिन्दुओं के प्रमुख तीर्थ स्थानों में गिना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण परशुराम ने अपने फरसे से एक बड़ी चट्टान को काटकर किया था।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण के मुताबिक, खगोल विज्ञान के अनुसार शनि का व्यास 120500 किमी, 10 किमी प्रति सेकंड की औसत गति से यह सूर्य से औसतन डेढ़ अरब किलोमीटर की दूरी पर रहकर यह ग्रह 29 वर्षों में सूर्य का चक्कर पूरा करता है।
भगवान शिव (Lord Shiva) के जन्म के विषय में कई कथाएं प्रचलित हैं। शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव को स्वयंभू माना गया है। शिव के जन्म की कहानी हर कोई जानना चाहता है।
भगवान सूर्य (Lord Surya) जिस तिथि को पहले-पहल रथ पर आरूढ़ हुए, वह ब्राह्मणों द्वारा माघ मास की सप्तमी बताई गयी है, जिसे रथसप्तमी कहते हैं। उस तिथि को दिया हुआ दान और किया हुआ यज्ञ सब अक्षय माना जाता है। वह सब प्रकार की दरिद्रता को दूर करने वाला और भगवान सूर्य की प्रसन्नता का साधन बताया गया है।
सप्तऋषियों में एक ऋषि भृगु थे, वो स्त्रियों को तुच्छ समझते थे। वो शिवजी (Shivji) को गुरुतुल्य मानते थे, किन्तु...
वरदविनायक मंदिर (Varadvinayak Mandir) हिन्दू देवता गणेश (Lord Ganesha) के अष्टविनायको (Ashtavinayak) में से एक है। यह मंदिर भारत में महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के कर्जत और खोपोली के पास खालापुर तालुका के महड गाँव में स्थित है। इस मंदिर में स्थापित भगवान गणेश की मूर्ति को स्वयंभू कहा जाता है।
धन की अधिष्ठात्री देवी (Adhishthatri Devi) को प्रसन्न करने के लिए वैभव लक्ष्मी (Vaibhav Lakshmi) का व्रत करना उत्तम फलदायी माना गया है। जानते हैं ये व्रत कब और कैसे करना चाहिए। क्या है इस व्रत के नियम। व्रत कब कैसे करें, क्या खाएं, किस समय करें पूजा, जानें संपूर्ण विधि।
उषाकाल में पूर्व दिशा से अपने रथ पर सवार हो सूर्य देव (Surya Dev) निकलते है। सूर्यदेव जिनके रथ को सात अश्वों द्वारा खींचा जाता है। जिनके सारथी अरुण है, जो विष्णु के वाहन गरुड़ के भाई है। अब ख़ास बात ये हैं कि सूर्यदेव के रथ में सात घोड़ों का अर्थ क्या है?
हनुमान जी (Hanuman ji) कलयुग के देवता (Kalyug ke Devta) है, इसलिए सबसे ज्यादा भक्त उनके ही हैं। संकट मोचन हनुमान (Sankat Mochan Hanuman) अपने भक्तों के सारे कष्ट हर लेते हैं और उन्हें बल, बुद्धि, यश का वरदान देते हैं। सभी जानते हैं कि हनुमान जी को बाल ब्रह्मचारी कहा जाता है, लेकिन हनुमान जी की शादी हुई थी। उसके बाद भी उन्हें ब्रह्मचारी कहा जाता है। ऐसा क्यों?












