शनि एक धीमी गति से चलने वाला ग्रह है। पुराणों में यह कहा गया है कि शनिदेव (Shanidev) लंगड़ाकर चलते हैं, जिस कारण उनकी गति धीमी है। उन्हें एक राशि को पार करने में लगभग ढाई वर्ष का समय लगता है। शनिदेव लंगड़ाकर क्यों चलते हैं? इस पर शास्त्रों में दो कथाएं प्रचलित हैं।
अयोध्या (Ayodhya) राम नगरी (Ram Nagri) के रूप में जाना जाता है, लेकिन अयोध्या की राम की पैड़ी खेत्र में स्थित प्राचीन नागेश्वर नाथ मंदिर (Nageshwar Nath Mandir) भी है, जो पूरे देश में रहने वालों शिव भक्तों के लिए आस्था का बड़ा केंद्र है।
भगवान जगन्नाथ (Lord Jagannath) भारत और दुनिया भर में भक्तों द्वारा पूजे जाने वाले एक हिंदू देवता हैं। भगवान जगन्नाथ का मंदिर ओडिशा के पुरी शहर में स्थित है। यहां भगवान के साथ उनके भाई बलभद्र (Balarama) और बहन सुभद्रा (Subhadra) की भी पूजा की जाती है।
कहते हैं कि महाप्रतापी राक्षस रावण ने कामना की कि उसका पुत्र अजेय हो तथा उसकी मृत्यु न हो। वह...
उत्तराखंड (Uttarakhand) का त्रियुगीनारायण मंदिर (Triyuginarayan Mandir) ही वह पवित्र और विशेष पौराणिक मंदिर है, जहां भगवान शिव और पार्वती जी ने पवित्र अग्नि को साक्षी मानकर विवाह किया था। इस मंदिर के अंदर सदियों से यह अग्नि जल रही है।
तमिलनाडु के तिरुवरुर जिले में भगवान गणेश (Lord Ganesha) का आदि विनायक मंदिर (Vinayak Mandir) अपनी खासियत और पौराणिक महत्व के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। यह मंदिर दूसरे मंदिरों से बिल्कुल अलग है। जहां हर मंदिर में भगवान गणेश गज रूप में विराजमान हैं, तो वहीं इस मंदिर में भगवान की पूजा इंसान के रूप में की जाती है।
सूर्यदेव की इस पुत्री से विवाह करने खुद पहुंचे थे श्री कृष्ण
पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान गणेश (Lord Ganesha) जी का सिर हाथी का और एक दांत टूटे होने के कारण...
उर्मिला के विषय में उसकी निद्रा बड़ी प्रसिद्ध है जिसे "उर्मिला निद्रा" (Urmila Nidra) कहा जाता है। अपने 14 वर्ष के वनवास में लक्ष्मण एक रात्रि के लिए भी नहीं सोये।
कुण्डली में सूर्य कमजोर होने से मान-प्रतिष्ठा और किए गए कार्यों का श्रेय नहीं मिल पाता है। इसके अलावा रोग भी परेशान करते है। कुण्डली में सूर्य को मजबूत करने के लिए रविवार के दिन सूर्यदेव पूजन (Suryadev Pujan) जरूर करें।
हनुमानजी को आने जाने के लिये मात्र दो घण्टे का समय मिला था। इस मात्र दो घंटे में हनुमान जी द्रोणगिरी पर्वत हिमालय पर जाकर वापस 5000 किलोमीटर की यात्रा करके आये थे। अर्थात उनकी गति ढाई हजार किलोमीटर प्रति घंटा रही होगी।
द्वारका धाम गुजरात के काठियावाड क्षेत्र में अरब सागर के समीप स्थित है। मथुरा से जाने के बाद श्री कृष्ण ने इस विशाल नगर की स्थापना की थीं।












