सूर्य देव ने देखा कि इतना सब के बाद भी समुद्र के जल स्तर में रत्ती भर की कमी नहीं आई थी और न ही स्वयं के तेज में। जबकि इस कार्य में सहयोगी हवा भी सोंधी महक से सुरभित हो गई थी।
दान से मंदिर को इस वर्ष कुल 18.90 करोड़ रुपये की आय हुई है। सबसे ज्यादा शीघ्र दर्शनम कूपन से मंदिर को इनकम हुई।
‘गणेश टोक’ (Ganesh Tok) गंगटोक (Gangtok) में भगवान गणेश (Lord Ganesha) को समर्पित मंदिर है। गंगटोक से 6 किमी की दूरी पर स्थित यह मंदिर, ताशी व्यूपॉइंट के पास, गणेश टोक व्यू पॉइंट गंगटोक के सबसे लोकप्रिय आकर्षणों में से एक है।
हनुमान जी का जन्म 58 हजार 112 वर्ष पहले त्रेतायुग के अन्तिम चरण में चैत्र पूर्णिमा को मंगलवार के दिन चित्रा नक्षत्र और मेष लग्न के योग में सुबह 6.03 बजे आज के झारखण्ड राज्य के गुमला जिले के आंजन नाम के छोटे से पहाड़ी गाँव के एक गुफा में हुआ था।
शनिदेव व्यक्ति को माया, मोह, असत्य, इन्द्रियजन्य सुख, विषय-वासना की आसक्ति से हटाकर परमतत्व का ज्ञान कराते हैं। साथ ही अच्छे-बुरे की पहचान भगवान शनिदेव द्वारा ही होती है। स्वार्थ की धुरी पर चलने वाली इस सृष्टि में व्यक्ति को परमात्मा की ओर मोड़ने वाले एक मात्र भगवान शनिदेव ही हैं। भगवान शनिदेव मानव को विभन्न प्रकार की कष्टाग्नि में तपाकर कुंदन बनाते हैं तथा समय के अनुसार चलना सिखाते हैं।
कलयुग में सबसे ज्यादा पूजे जाने वाले हनुमान जी के पास अनेक अस्त्र-शस्त्र हैं, जिनमें पहले स्थान पर उनका गदा आता है। आइये जानते हैं हनुमान जी को गदा कैसे प्राप्त हुआ और इसकी विशेषताएं क्या हैं?
उत्तराखंड (Uttarakhand) राज्य के रुद्रप्रयाग (Rudraprayag) शहर से 3 किलोमीटर दूर प्राचीन कोटेश्वर महादेव मंदिर (Koteshwar Mahadev Mandir) स्थित है। इस मंदिर का निर्माण 14वीं शताब्दी में किया गया था।
हनुमान जन्मोत्सव (Hanuman Janmotsav), जिसे हनुमान जयंती (Hanuman Jayanti) के रूप में भी जाना जाता है, भगवान हनुमान के जन्म को चिह्नित करने के लिए मनाया जाने वाला एक हिंदू त्योहार है, जिसे हिंदू पौराणिक कथाओं में शक्ति, भक्ति और वफादारी के प्रतीक के रूप में माना जाता है।
छपरा जिला मुख्यालय से महज दस किमी की दूरी पर स्थित पैराणिक गोदना, वर्तमान में रिविलगंज, के विषय में कम जानते होंगे। वस्तुत: यह क्षेत्र आरण्यक संस्कृति का प्रतिविम्ब है। घाघरा के तट पर यह स्थान ऋषि-मुनियों का साधना क्षेत्र रहा है। त्रेता युग में इसी स्थान पर महर्षि श्रृंगी के द्धारा कराए गए पुत्र्येष्टि यज्ञ के कारण ही प्रभु श्रीराम का जन्म हुआ था।
गुजरात के बनासकांठा जिले में अंबाजी मंदिर (Ambaji Mandir) दुर्गा माता (Durga Mata) का सबसे लोकप्रिय मंदिर है। इस मंदिर के लिए भक्तों में इतनी अपार श्रद्धा है कि यहां विदेश में रहने वाले गुजराती भी मां अंबाजी जी के दर्शन करने के लिए आते हैं।
श्री अरुणाचलेश्वर मंदिर, विश्व भर में भगवान शिव का सबसे बड़ा मंदिर है। लगभग 24 एकड़ क्षेत्रफल में अपने विस्तार के कारण यह भारत का आठवाँ सबसे बड़ा मंदिर माना जाता है।
कर्नाटक के चिकमगलूर जिले के कोप्पा में प्राचीन ‘कमंडल गणपति मंदिर’ (Kamandal Ganapati Temple) स्थित है। इस मंदिर में स्थापित गणेश प्रतिमा के ठीक सामने एक जल स्रोत का उद्गम स्थल है। ये उद्गम स्थल ब्राह्मी नदी का है।











