तमिलनाडु के मदुरै में भगवान विष्णु (Bhagwan Vishnu) को समर्पित अनोखा कूडल अझगर मंदिर (Koodal Azhagar Mandir) है। आठ हिस्सों में बने हुए इस मंदिर का शिखर ऐसा है, जिसकी परछाई धरती पर नहीं पड़ती। इस मंदिर में भगवान विष्णु की मूर्ति बैठी हुई मुद्रा में है। यह मूर्ति देखने में बहुत ही दिव्य और भव्य लगती है।
कलयुग में बजरंग बली (Bajrangbali) हनुमानजी (Hanumanji) को हिन्दू धर्म में बड़ा ही शुभ और मंगलकारी माना गया है। मंगलवार को इनका पूजन करना बहुत शुभफलदायी मन जाता है।
Chaitra Navratri 2024: माँ चंद्रघंटा (Maa Chandraghanta) देवी दुर्गा (Devi Durga) के नौ रूपों में से एक है, जिनकी पूजा नवरात्रि उत्सव के दौरान की जाती है।
1. एक मुख्य आचार्य व चार सहायक आचार्य होने चाहिए। क्योंकि मुख्य आचार्य स्वयं व्यास स्वरूप है तो सहायक चार...
पुणे से 51 किमी दूर रंजनगांव में एक पौराणिक गणपति मंदिर है। हिन्दू धर्म ग्रंथों के मुताबिक इस स्थान पर...
भगवान सूर्य (Lord Surya) जिस तिथि को पहले-पहल रथ पर आरूढ़ हुए, वह ब्राह्मणों द्वारा माघ मास की सप्तमी बताई गयी है, जिसे रथसप्तमी कहते हैं। उस तिथि को दिया हुआ दान और किया हुआ यज्ञ सब अक्षय माना जाता है। वह सब प्रकार की दरिद्रता को दूर करने वाला और भगवान सूर्य की प्रसन्नता का साधन बताया गया है।
महाशिवरात्रि के दिन शिवतत्त्व नित्य की तुलना में 1000 गुना अधिक कार्यरत रहता है। शिवतत्त्व का अधिकाधिक लाभ प्राप्त करने हेतु महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की भावपूर्ण रीति से पूजा-अर्चना करने के साथ ‘ॐ नमः शिवाय’ यह नामजप अधिकाधिक करना चाहिए।’
ज्योतिष और वास्तुशास्त्र के अनुसार पश्चिम दिशा के स्वामी शनि देव (Shani Dev) हैं इसलिए यहां भगवान शनि देव की...
विवाह के समय ब्रह्मवेत्ता मुनियों के निर्देश पर शिव-पार्वती ने गणपति की पूजा संपन्न की। कोई व्यक्ति संशय न करें, क्योंकि देवता (गणपति) अनादि होते हैं।
व्रत अनुष्ठान, तिथि, पूजा मुहूर्त, चंद्रोदय समय से लेकर उपवास की अवधि तक - जानें अहोई अष्टमी के बारे में सब कुछ
हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को भगवान विष्णु के शालीग्राम स्वरूप और माता तुलसी का...
क्या आपको पता है कि धन और वैभव की देवी माता लक्ष्मी के साथ गणेश जी की पूजा क्यों होती...




