चैती देवी मंदिर (Chaiti Devi mandir) उत्तराखंड (Uttarakhand) के उधम सिंह नगर जिले में काशीपुर (Kashipur) सिटी बस स्टैंड से 2.5 किमी दूर काशीपुर के कुंडेश्वरी रोड पर स्थित है। चैती देवी मंदिर को माता बालसुंदरी मंदिर (Mata Balasundari mandir) के नाम से भी जाना जाता है, कई भक्त यहां आध्यात्मिक आनंद में डूबने और पवित्र मंदिर के दर्शन करने आते हैं। मंदिर को ज्वाला देवी मंदिर (Jwala Devi Mandir) और उज्जैनी देवी (Ujjaini Devi) के नाम से भी जाना जाता है। यह काशीपुर के सबसे लोकप्रिय मंदिरों में से एक है।
Varuthini Ekadashi 2022: इस साल वरुथिनी एकादशी (Varuthini Ekadashi) आज मंगलवार 26 अप्रैल को है। मंगलवार को एकादशी (Ekadashi) होने...
णेश चतुर्थी, जिसे विनायक चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है, एक लोकप्रिय हिंदू त्योहार है जो भगवान गणेश के जन्म का जश्न मनाता है, जो ज्ञान, समृद्धि और सौभाग्य के देवता हैं।
महाराष्ट्र (Maharashtra) के कोल्हापुर (Kolhapur) में स्थित महालक्ष्मी मंदिर (Mahalaxmi Mandir) देश के प्रमुख मंदिरों में एक और शक्तिपीठ माना...
वास्तव में शिव का अवतार हनुमान (Shiv ka Avtaar Hanuman) ही थे और यह भी सत्य है कि भगवान राम (Bhagwan Ram) ही शिव के हनुमान अवतार (Hanuman Avtaar) का कारण बने थे। रामायण में बताया गया है कि एक बार भगवान शिव की भी इच्छा हुई कि पृथ्वीलोक चलकर भगवान राम के दर्शन किये जायें। उस समय भगवान राम जी की आयु लगभग 5 वर्ष के आसपास रही होगी।
Aaj Ka Rashifal 31 March 2022: आज दिनांक 31 मार्च 2022 और दिन वीरवार (Veerwar Ka Rashifal) है। आज का...
विश्व के गिने-चुने पहाड़ों में बराबर पहाड़ी शामिल है जो खण्डित है, जड़ से चोटी तक पूरी तरह टुकड़ों में बँटा है। यहाँ भगवान शिव सिद्धेश्वरनाथ शिवलिंग (Siddheshwarnath Shivling) के रूप में विराजमान हैं।
51 पीठों में कामाख्या पीठ को महापीठ के नाम से भी सम्बोधित किया जाता है। इस मंदिर में एक गुफा है। इस गुफा तक जाने का मार्ग बेहद पथरीला है। जिसे नरकासुर पथ कहते है। मंदिर के मध्य भाग में देवी की विशालकाय मूर्ति स्थित है। यहीं पर एक कुंड स्थित है। जिसे सौभाग्य कुण्ड कहा जाता है। कामाख्या देवी शक्ति पीठ के विषय में यह मान्यता है कि यहां देवी को लाल चुनरी या वस्त्र चढाने मात्र से सभी मनोकामनाएं पूरी होती है।
भगवान शिव के फल से ज्येष्ठ की अमावस्या में भगवान शनिदेव (Shanidev) का जन्म हुआ। सूर्य के तेज और तप के कारण शनिदेव का रंग काला हो गया। लेकिन माता की घोर तपस्या के कारण शनि महाराज में अपार शक्तियों का समावेश हो गया।
सरस्वती, जिसे शारदा के नाम से भी जाना जाता है, ज्ञान, संगीत, कला, भाषण, ज्ञान और विद्या की अनन्त देवी...
देश में अनेक मंदिर ऐसे हैं, जो अपने अंदर तमाम अनसुलझे रहस्यों को समेटे हुए है। विज्ञान भी इसकी तह तक नहीं जा सका। ऐसा ही है छत्तीसगढ़ के गरियाबंद शहर से 12 किलोमीटर दूर हरी-भरी पहाड़ियों पर स्थित निराई माता मंदिर (Nirai Mata Mandir)।
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के बलरामपुर (Balrampur) जिले में देवी के 51 शक्तिपीठों (Shaktipeeth) में से एक पीठ स्थित है, जिसे मां पाटेश्वरी देवी मंदिर (Maa Pateshwari Devi Mandir) से जाना जाता है। यह मंदिर शिव और सती के प्रेम का प्रतीक माना जाता है।




