भद्रा पृथ्वी पर नहीं पाताल लोक में, प्रतिपदा तिथि में नहीं बांधी जाती राखी
शिंगणापुर तीर्थ की गाथा बहुत ही दिलचस्प है। शनि शिंगणापुर गांव के चारों ओर पर्वतमालाएं हैं। यहां गांव के लोग अपने घरों में ताला नहीं लगाते। घरों, दुकानों पर दरवाजे वगैरह नहीं हैं। कहते हैं कि यदि कोई चोरी की नीयत से किसी का सामान छूता भी है तो शनिदेव उसको अपने ढंग से दंडित कर देते हैं। दरवाजे और चौखट न होने के बावजूद चोरी न होने को यहां के लोग शनिदेव की कृपा मानते हैं।
ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, भगवान शिव अपनी शरण में आए दैत्य माली-सुमाली की दारुण व्यथा सुनकर अत्यंत क्रोधित हुए। उन्होंने कश्यप नंदन सूर्य पर अपने त्रिशूल से प्रहार कर दिया। उस समय संपूर्ण लोकों को प्रकाशित करने वाले सूर्य देव अपने सात घोड़ों के रथ पर विराजमान थे। वह भोलेनाथ का प्रहार सहन नहीं कर पाए और रथ से नीचे गिर कर अचेत हो गए। उनके गिरते ही संपूर्ण सृष्टि अंधकार में डूब गई।
इस मंदिर की स्थापना भवानी मिश्र नामक तांत्रिक ने लगभग 400 साल पहले की थी। उसके बाद से ही मंदिर की पूजा-आरती का जिम्मा तांत्रिक के ही परिवार के सदस्य संभालते आए हैं। यहां माता की प्राण-प्रतिष्ठा तंत्र साधना से ही की गई है। तांत्रिकों की आस्था इस मंदिर के प्रति अटूट है।
सूर्यदेव (Suryadev) एक ऐसे देवता जिनके साक्षात दर्शन हमें प्रतिदिन नसीब होते हैं। जिनके प्रताप से ही हम समय की खोज कर सके हैं। जिन्हें समस्त ग्रहों का राजा माना जाता है। जिन्हें आदित्य, भास्कर, मार्तण्ड आदि अनेक नामों से जाना जाता है।
त्रेतायुग में श्रीविष्णु के सातवें अवतार श्री रामजी ने पुष्य नक्षत्रपर, मध्याह्न काल में अयोध्या में जन्म लिया। वह दिन...
कौरवों से जुए में राज-पाट हारने के बाद पाण्डवों को 12 साल का वनवास और एक वर्ष का अज्ञातवास हुआ था। 12 साल का समय समाप्त होने में कुछ समय शेष रह गया था और अज्ञातवास का आरंभ होना था।
हिंदू धर्म में जगत के पालनहार माने जाने वाले भगवान विष्णु की पूजा के लिए एकादशी तिथि को सबसे उत्तम माना गया है। साल भर में पड़ने वाली तमाम एकादशी में देवशयनी और देवउठनी एकादशी तिथि का बहुत महत्व है।
सप्तऋषियों में एक ऋषि भृगु थे, वो स्त्रियों को तुच्छ समझते थे। वो शिवजी (Shivji) को गुरुतुल्य मानते थे, किन्तु...
नवरात्रि के दौरान रंगों की एक विशेष भूमिका होती है क्योंकि प्रत्येक दिन देवी दुर्गा के एक विशेष रूप और उनके आशीर्वाद से जुड़ा होता है। भक्तजन दिव्य कृपा पाने और भक्तिभाव से अनुष्ठानों में भाग लेने के लिए इस दिन से संबंधित रंग पहनते हैं।
नवरात्रि हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जिसे पूरे भारत और दुनिया के अन्य हिस्सों में हिंदू समुदायों के साथ बड़े उत्साह और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इन नौ रातों और दस दिनों के दौरान, देवी दुर्गा के विभिन्न रूपों, जैसे सरस्वती, लक्ष्मी और पार्वती की पूजा की जाती है।
एक पंडितजी को नदी में तर्पण करते देख एक फकीर अपनी बाल्टी से...





