विश्व बैंक की निजी क्षेत्र की शाखा, अंतर्राष्ट्रीय वित्त निगम (IFC) ने साफ कर दिया है कि वह नई कोयला परियोजनाओं (coal projects) में निवेश का समर्थन नहीं करेगी।
ऐसा नहीं है कि इस तरह की लापरवाही पहली बार हुई है। सालों से इस तरह की लापरवाही होती आ रही है और सरकार एक जांच बैठाकर अपना पल्ला इस तरह दुर्घटनाओं से झाड़ लेती है और पब्लिक भी ऐसे कांडों को भूलकर फिर से अपनी जिंदगी में आगे बढ़ जाता है फिर किसी नई दुर्घटना के लिए।
ऊर्जा नामक इस संस्था ने किया वायु प्रदूषण, नागरिक मुद्दों, और शासन से संबंधित एक इच्छा सूची के साथ अपना घोषणापत्र जारी
दक्षिण-पश्चिम मानसून 2023 के एक जिला स्तर पर किए गए एक व्यापक विश्लेषण में भारत के वार्षिक मानसून मौसम पैटर्न में देश भर में वर्षा पैटर्न में चरम विषमता सामने आयी है।
मानसून बारिश और अल-नीनो नाम की समुद्री तरंग में वैसे तो गहरा नाता रहा है हमेशा, मगर भारत के विभिन्न क्षेत्रों में पिछली सदी के दौरान इन दोनों के रिश्तों के रंग बादल चुके हैं।
दरअसल आर्थिक और राजनीतिक निर्णयों ने मुख्य रूप से प्रकृति के कुछ ही मूल्यों को प्राथमिकता दी है। इनमें विशेष रूप से प्रकृति के बाजार-आधारित मूल्य, जैसे खाद्य पदार्थ, प्राथमिकता पाते हैं। इसके अलावा, नीति निर्धारण कि प्रक्रिया में आमजन के लिए प्रकृति के योगदान से जुड़े कई गैर-बाजार मूल्यों की अनदेखी होती है, जैसे कि जलवायु विनियमन और सांस्कृतिक पहचान।
क्या हाइड्रोजन वाकई गेम चेंजर बन सकता है, जैसा कि कुछ का मानना है? इन सवालों के जवाब के लिए कुछ बातों को समझना और उन पर गौर करना ज़रूरी है।
इन दिनों मणिपुर भारतीय राष्ट्रवाद की परीक्षा ले रहा है। भारत की यह मणि टूट रही है। भारत मां के 120 बच्चे उसकी गोद में हमेशा के लिए सो चुके हैं। कोई 45,000 बेघर हो चुके हैं। 2 महीने से ऊपर हो चुके, लेकिन खून के छींटे बंद नहीं हुए हैं।
लोकसभा चुनाव परिणाम भारतीय जनता पार्टी के लिए एक चेतावनी है। मतदाताओं ने इस बार बीजेपी को सिर्फ चेतावनी देकर छोड़ दिया है।
जलवायु थिंक टैंक 'क्लाइमेट ट्रेंड्स' ने भारत में मानसून के बदलते ढर्रे की वजह से अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन करने के लिए शुक्रवार को एक वेबिनार आयोजित किया, जिसमें विशेषज्ञों ने देश में जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम के बदले मिजाज और मौजूदा हालात से निपटने की संभावनाओं पर व्यापक चर्चा की।
दलित समाज से ताल्लुक रखने वाले रामनाथ कोविंद के बाद अब आदिवासी समाज से आने वाली मुर्मू को राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार बनाना महज संयोग नहीं वरन एक सुविचारित कदम है। इस एक कदम से भाजपा ने समाज के एक बड़े वर्ग को बड़ा संदेश दिया है। इसमें महिलाएं, दलित और आदिवासी समाज शामिल हैं।
भारत, नाइजीरिया, फिलीपींस और अफ्रीका समेत 33 देशों के बच्चे एक साथ हीटवेव, बाढ़, चक्रवात, बीमारी, सूखा और वायु प्रदूषण जैसे जलवायु प्रभावों का सामना कर रहे हैं। मगर इस सब के बावजूद, भारत में, बच्चों को दी जाने वाली जानकारी उतनी नहीं जितनी संभवतः आवश्यक है। और मानो इतना काफ़ी न हो, एनसीईआरटी (NCERT) ने हाल ही में इस संदर्भ में अपने स्कूल पाठ्यक्रम में जो बदलाव कर दिये हैं वो हैरान करने वाले हैं।







